दल्ली राजहरा गुरुवार 13 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

 छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा/छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा ने विश्व आदिवासी दिवस पर सत्तारूढ़ राजनीति पार्टी  के प्रवक्ता  और अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिम्मेदार व्यक्ति के द्वारा की गई टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक और आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। विश्व आदिवासी दिवस को “विदेशी अवधारणा” बताकर आदिवासी समाज के संघर्ष, अधिकार और वैश्विक एकजुटता को नकारने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। 

9 अगस्त केवल कोई सामान्य दिवस नहीं है, बल्कि दुनिया भार के 200 देश और भारत के 750 जनजाति आदिवासी समुदायों के अधिकार, सम्मान, जल-जंगल-जमीन, संस्कृति, भाषा और अस्तित्व की आवाज को मजबूती देने का अवसर है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे मान्यता दिया जाना आदिवासी समाज के अधिकारों और संघर्ष की वैश्विक स्वीकृति है।

 पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर के कहा भारत का आदिवासी समाज सदियों से अपनी जमीन, जंगल, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष करता आया है। बिरसा मुंडा, शहीद गुंडाधुर और अनेक आदिवासी वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत तथा शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस को विदेशी बताना उन तमाम संघर्षों और शहीदों के इतिहास को छोटा करने जैसा है। 

 

श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके इस पर विरोध करते हुए कहा कि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस आदिवासी समाज के बीच जाकर नेता वोट, समर्थन और सम्मान मांगते हैं, उसी समाज के गौरव के दिन ऐसी टिप्पणी क्यों की जाती है? और यदि कोई व्यक्ति विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर आदिवासी समाज की भावनाओं के विपरीत टिप्पणी करता है, तो समाज को यह भी आत्ममंथन करना होगा कि क्या केवल चंद पैसों, निजी स्वार्थ या राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे लोगों को सामाजिक मंच और सम्मान की जगह देते रहना उचित है?

आदिवासी समाज को किसी राजनीतिक दल की कृपा की जरूरत नहीं है,कुछ तथाकथित आदिवासी नेता लोग अपनी राजनीति व अपने आकाओं को खुश करने के लिए ऐसे बयानबाजी करते रहते है जिसे आने वाला समय मे आदिवासी उसे उसकी सही जगह दिखायेंगे , सत्ता में बैठी सरकार जल जंगल जमीन के लिए लड़ने वालों हमेशा अपने विरोधी के रूप देखती है। समाज अपने इतिहास, संस्कृति और अधिकारों के प्रति जागरूक है और अपमानजनक टिप्पणियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना जानता है।

 

विश्व आदिवासी दिवस हमारा अधिकार, हमारी पहचान और हमारी अस्मिता का प्रतीक है।जल-जंगल-जमीन और आदिवासी स्वाभिमान पर कोई समझौता नहीं होगा।
Spread the love
Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

You missed

error: Content is protected !!