दल्ली राजहरा रविवार 13 सितंबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 कोलकाता से कुमुरकट्टा तक – हर मूर्ति में बसा है एक अलग रूप, 350 से 20 हजार तक सजी दुकानें । ढोल-नगाड़ों की थाप और गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से पहले ही लौह नगरी दल्ली-राजहरा पूरी तरह गणेशमय हो गई है। नगर के हर चौक-चौराहे पर पंडालों की बांस-बल्ली गड़ चुकी है और कारीगर अंतिम सजावट में जुटे हैं। वहीं घर-घर में भी लोग अपने घर के विघ्नहर्ता को लाने के लिए बाजार का रुख कर रहे हैं। रविवार को नगर के मूर्ति बाजार में जो दृश्य दिखा, वह देखते ही बनता था। मूर्तिकारों की टपरी के सामने खरीदारों की भीड़ इस कदर उमड़ी थी कि पैर रखने की जगह नहीं थी। कोई अपने ड्राइंग रूम के लिए छोटी सी मूर्ति ढूंढ रहा था, तो कोई अपने मोहल्ले के बड़े पंडाल के लिए 6 फीट की विशाल मूर्ति का मोलभाव कर रहा था। महंगाई की मार के बीच भी आस्था भारी मूर्ति खरीदने आए लोगों में दो तरह की बातें सुनने को मिलीं। कुछ लोग मनचाहा दाम देकर अपनी पसंद की मूर्ति ले जा रहे हैं, तो कुछ बढ़ती महंगाई को लेकर मायूस भी दिखे। मूर्तिकारों के अनुसार पिछले साल तक जो मूर्ति 400 रुपये में मिल जाती थी, इस बार कच्चे माल – रंग, प्लास्टर, कपड़ा और बांस की कीमत बढ़ने से उसकी शुरुआती कीमत ही 600 रुपये हो गई है।कोलकाता से आए कलाकारों ने बताया कि वे जून महीने से ही दल्ली-राजहरा में डेरा डाले हुए हैं। वे यहां गणेश चतुर्थी से लेकर विश्वकर्मा पूजा और दुर्गा पूजा तक मूर्तियां बनाएंगे। उनके पास भगवान गणेश की 9 इंच की छोटी मूर्ति से लेकर 6 फीट की विशाल मूर्ति तक उपलब्ध है, जिनकी कीमत 500 से 20 हजार रुपये तक है। उनकी मूर्तियों की खासियत है उनकी विविधता – कहीं गणेश जी शिव अवतार में नंदी पर बैठे हैं, तो कहीं सन्यासी वेश में ध्यानमग्न हैं, कहीं अपने वाहन मूषक पर सवार हैं तो कहीं माता पार्वती की गोद में बाल गणेश के रूप में मुस्कुरा रहे हैं। 350 वाली मिट्टी की मूर्ति बनी आकर्षण का केंद्र इस भीड़ में सबसे अलग कहानी है स्थानीय मूर्तिकार दीपचंद तुलाराम कुंभकार की। बालोद जिले के कुमुरकट्टा निवासी दीपचंद हर साल अपने परिवार सहित ज्ञानू पेट्रोल पंप के सामने मूर्तियां बनाते हैं। इस बार उनके बेटे-बेटियां भी उनका हाथ बंटा रहे हैं। उनकी मूर्तियों की सबसे बड़ी खासियत है उनका दाम और मिट्टी से लगाव। जहां कोलकाता के कलाकार सवा फीट की मूर्ति का दाम 850 रुपये मांग रहे हैं, वहीं दीपचंद के पास उसी आकार की मिट्टी की मूर्ति मात्र 350 रुपये में मिल रही है। उनका कहना है – “हमारा मकसद ज्यादा पैसा कमाना नहीं है, बस लागत और मेहनताना निकल जाए।” वे मिट्टी के अलावा सीमेंट की भी मजबूत मूर्तियां बनाते हैं और साल भर गणेश, सरस्वती, दुर्गा और विश्वकर्मा की मूर्तियां बनाकर अपना परिवार चलाते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी उनकी मिट्टी की मूर्तियां तालाबों के लिए अधिक सुरक्षित हैं। कल सोमवार को शुभ मुहूर्त में होगी स्थापना । वार्ड क्रमांक 23 के भागवताचार्य एवं पंडित विजय शर्मा जी ने बताया कि इस वर्ष गणेश चतुर्थी सोमवार 14 सितंबर को मनाई जाएगी। स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:15 बजे से शुरू होगा। चतुर्थी तिथि 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को पड़ेगी, यानि भक्तों को पूरे 11 दिन तक बप्पा की सेवा और पूजा का सौभाग्य मिलेगा। विसर्जन अनंत चतुर्दशी के बाद किया जाएगा।स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है गणेशोत्सव की कहानी वैसे तो भगवान गणेश की पूजा सदियों पुरानी है, लेकिन सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव मनाने की परंपरा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है। जब अंग्रेजों ने लोगों के एक जगह जमा होने पर पाबंदी लगा दी थी, तब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में महाराष्ट्र से गणेश पूजा के बहाने लोगों को एकजुट करना शुरू किया। देशभक्ति की वह छोटी सी पहल आज देश के सबसे बड़े लोक-उत्सव में बदल चुकी है और लौह नगरी में भी उसी उत्साह के साथ मनाई जा रही है।Spread the lovePost navigationचिखलकसा के पार्षदों की पहल लाई रंग, दिव्यांग बालिका तनुश्री को मिला बैटरी चलित ट्राइसिकल । गांव-गांव में गूंज रहा शहीद नियोगी का नाम, मुक्ति मोर्चा ने दिलाया संघर्ष का संकल्प ।