दल्ली राजहरा बुधवार 30 सितंबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, मजदूर-किसानों के मसीहा शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी जी के 35वें शहादत दिवस पर दल्ली राजहरा एक बार फिर संघर्ष की राजधानी बन गया। जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ द्वारा 27 और 28 सितंबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में वह हुआ जिसकी कल्पना उद्योगपतियों ने कभी नहीं की थी।

नियोगी जी की हत्या के बाद जो लोग सोचते थे कि लाल-हरे झंडे का विचार खत्म हो जाएगा, 28 सितंबर को शहीद वीर मेला मैदान में उमड़ा 7 से 8 हजार का जनसैलाब उस सोच पर तमाचा था। कांकेर, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, दुर्ग, सारंगढ़ से 80-90 बस, माजदा, पिकअप, बोलेरो, तूफान में सवार होकर मजदूर-किसान पहुंचे। यह भीड़ मजदूर-किसान एकता के प्रति आस्था का प्रमाण थी।
सिर्फ यादें ही शेष है ……….!
पहला दिन – 27 सितंबर: लाल-हरा झंडा फहरा, फ्लैग मार्च से गूंजा शहर
सुबह 8 बजे से ही नगर के मुख्य चौक-चौराहों और आसपास के उन सभी ग्रामों में जहां नियोगी जी को मानने वाले हैं, लाल-हरे झंडे का ध्वजारोहण हुआ। शहीद वीर नारायण सिंह चौक पुराना बाजार में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उपाध्यक्ष नगर पालिका रवि जैसवाल, संतोष देवांगन, व्यापारी संघ के रमेश मित्तल, समाजसेवी गिरवर साहू शामिल हुए।

शाम 4 बजे जन मुक्ति मोर्चा कार्यालय से लाल-हरे झंडे के सम्मान में ऐतिहासिक फ्लैग मार्च निकला, जो शहीद चौक, पुराना बाजार, महुआ चौक, वीर नारायण सिंह चौक, गुप्ता चौक, नियोगी चौक नया बस स्टैंड, श्रमवीर चौक, जैन भवन चौक, माइंस ऑफिस चौक होते हुए कृषि कार्यालय में समाप्त हुआ।

 

दूसरा दिन – 28 सितंबर: जनसैलाब, रैली और आमसभा
सुबह 3 बजे से ही भोजन प्रभारी नन्हा धनकर और साथी भोजन व्यवस्था में लग गए। 11 बजे तक हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार था। सबसे पहले भोथिपार (राजनांदगांव) के साथियों की बस पहुंची।

दोपहर 3 बजे जन मुक्ति मोर्चा कार्यालय में शहीद की धर्मपत्नी श्रीमती आशा गुहा नियोगी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा राजनांदगांव के आजू राम साहू, बरसन नेताम, अशोक साहू, निर्मलदास मानिकपुरी और भीम आर्मी सारंगढ़ के वीरेन्द्र कुर्रे द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद रैली वार्ड 13 मेला मैदान से घोड़ा मंदिर, मनोहर ऑफिस चौक, महुआ चौक, वीर नारायण सिंह चौक (मूर्ति पर माल्यार्पण), मेन रोड, आशा टाकीज चौक (सुनील साहू, दिनेश कौशिक द्वारा पानी पाउच वितरण), गुप्ता चौक (मांदरी-रिलो नृत्य और जमकर नारेबाजी), नियोगी चौक, श्रमवीर चौक होते हुए जैन भवन चौक में आमसभा में परिवर्तित हो गई।

 मंच से वक्ताओं के विचार – विस्तार से

 

1. श्रीमती आशा गुहा नियोगी – “एक रहो, संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलेगा”
शहीद की धर्मपत्नी ने भावुक अपील करते हुए कहा – “संघर्ष की लड़ाई अकेले नहीं लड़ी जाती, इसके लिए एकता बनाए रखना बहुत आवश्यक है। आज सभी वक्ताओं ने बस्तर से लेकर छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में हो रहे शोषण की बात बताई। छत्तीसगढ़ में अपार संपदा का भंडार है। इसे धान का कटोरा कहते हैं, लोहा, सोना, तांबा, एल्युमिनियम, कोयला सब कुछ है, फिर भी छत्तीसगढ़ की जनता उसके लाभ से वंचित है, शोषण का शिकार हो रही है।”
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा – “आज युवाओं को सोचना होगा कि क्या करना है। एक होकर और मिलजुल कर नियोगी जी के विचारों को आगे ले जाना है। एक बात का हमेशा ध्यान रखना – बिना संघर्ष के कुछ भी नहीं होगा। दल्ली राजहरा संघर्षों की नगरी रही है, यहां बहुत सारे दमन हुए, लड़ाई हुई, गोलीकांड हुए, महिलाएं और पुरुष सब मिलकर लड़े और जेल भी गए, शहादत भी दी, तब जाकर अपने अधिकार प्राप्त किए हैं। उन्हीं की बदौलत भिलाई, नंदिनी, राजनांदगांव सभी जगह नियोगी जी के विचारों को लेकर संगठन बना। पूरे छत्तीसगढ़ में संगठन बन रहा था, जिससे मजदूर वर्ग उद्योगपतियों के दमन को रोक रहे थे, इसलिए उद्योगपतियों ने उनकी हत्या करवा दी। आपको किसी से डरने की बात नहीं है। गांव से आए भाई-बहनों से मेरा निवेदन है कि अपने गांव की कोई भी समस्या हो, एक होकर शांतिपूर्ण ढंग से उसका निराकरण करें।”
2. वीरेन्द्र कुर्रे (भीम आर्मी, सारंगढ़) – “जाति-धर्म के नाम पर लड़ाई बंद करो, शोषण के खिलाफ लड़ो”
उन्होंने कहा – “राजहरा इसलिए उजड़ रहा है क्योंकि मशीनीकरण के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। जो काम 5000 से 10000 से अधिक मजदूर करते थे, वह एक मशीन कर दे रही है। लोग सरकार से रोजगार मांग रहे हैं, सरकार रोजगार के बजाय गली-गली में शराब दुकान खोल रही है। परिवार में अराजकता फैल रही है। जो लड़ाई मजदूरों को सरकार से नौकरी के लिए लड़नी थी, वह घर-घर में लड़ाई हो रही है। बच्चे पढ़ाई की जगह सट्टा और नशा में लिप्त हो रहे हैं।”
कुर्रे ने आगे कहा – “सरकार की नीति को समझना होगा। हमारी लड़ाई धर्म की नहीं है, हमारी लड़ाई रोजगार, अपनी संस्कृति एवं पर्यावरण को बचाने की है। नियोगी जी ईमानदारी से लड़ाई लड़ रहे थे, वह दूर की सोचते थे। गरीब भाइयों को इलाज के लिए तकलीफ होती थी, इसलिए मजदूरों के द्वारा एक अस्पताल बनवाया जिसका संचालन आज मजदूर वर्ग कर रहे हैं, बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल बनाया, उन्होंने मजदूरों के सहयोग से जनक लाल ठाकुर को विधायक बनाया। अगर वह आज होते तो पूरे छत्तीसगढ़ तो क्या देश में ही लाल-हरा की सरकार होती। एक ईमानदार और जनता की सरकार। सरकार चाहती है गरीब को गरीब रहने दो, यह कहकर सोते हुए कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी को गोली मारकर हत्या कर दी। अब हमें उनके रास्ते पर चलने की देरी है। तभी शोषण खत्म होगा। हमें क्षेत्र, धर्म, जाति के नाम पर नहीं लड़ना है, मानव-मानव एक समान मानकर गुरु घासीदास, महात्मा बुद्ध और बाबा साहेब अंबेडकर के रास्ते में चलना होगा।”
3. दिलीप बघेल (पूर्व सभापति, जिला पंचायत कांकेर) – “विकास के नाम पर बस्तर में शोषण”
उन्होंने कहा – “मैं उस क्षेत्र से आया हूं जहां आप लोगों ने मेटा, बोदली, चारगांव के नाम सुने होंगे। आए दिन उद्योगपतियों और नेताओं के साथ हम लोगों का बहस होते रहता है, क्योंकि इन लोगों की नजर अब बस्तर की खनिज संपदा पर लगी है। बस्तर की खनिज संपदा को बचाने का हम लोग अथक प्रयास कर रहे हैं। विश्व आदिवासी दिवस में वक्ताओं के माध्यम से हम लोगों ने सुना कि बस्तर में केंद्रीय मंत्री के बेटे के नाम से जमीन खरीदी गई है, क्योंकि उनको मालूम है कि खनिज संपदा जितनी बस्तर में है वह कहीं नहीं है।”
4. मुक्तेश उसेंडी (जिला पंचायत सदस्य, कांकेर/अंतागढ़) – “ना अस्पताल, ना ब्लड बैंक“
उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा – “मैं अंतागढ़ क्षेत्र से आया हूं, वहां माइनिंग की अपार संभावनाएं हैं, रावघाट प्रोजेक्ट है। लेकिन एक भी ढंग का अस्पताल नहीं है और ना ही वहां ब्लड बैंक है। हम गर्मी में धूल और बारिश में कीचड़ से परेशान रहते हैं। हम सभी साथियों से एक ही आह्वान करते हैं – इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एक होकर लड़ना होगा।”
5. मोहन ठाकुर (गोंडवाना समाज) – “विचारों को गांव-गांव पहुंचाना होगा”
उन्होंने कहा – “मजदूरों को नियोगी जी ने संगठित किया और उन्होंने 17 विभाग बनाए – स्वास्थ्य विभाग, खेलकूद विभाग, मनोरंजन विभाग, संस्कृति विभाग। यहां के चंद उद्योगपतियों ने उनके नाम और विचार को देश-दुनिया से हटाने के लिए उनकी हत्या कर दी, लेकिन आज की भीड़ बता रही है कि उनके विचार गांव-गांव तक पहुंच रहे हैं, फिर उनका सपना साकार होने जा रहा है। हमें उनके विचारों को गांव में पहुंचाने और संगठित होने का वक्त आ गया है।”

 

कार्यक्रम के अन्य प्रमुख वक्ता: संजीवनी अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. राजीव लोचन (हसदेव मुद्दे पर), अशोक साहू (छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा राजनांदगांव), नीलिमा श्याम (जिला पंचायत सदस्य बालोद), शिव पोटई (सामाजिक कार्यकर्ता कांकेर), गुप्तेश उसेंडी आदि ने भी अपनी बात रखी। मंच संचालन ईश्वर निर्मलकर ने किया। नवा बिहान के चन्द्रशेखर यादव, रमित यादव, धर्मपाल, ललित गेडाम ने जनगीत से कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस दौरान सर्व आदिवासी समाज द्वारा पानी व बिस्किट वितरण किया गया।

 

कार्यक्रम में जीत गुहा नियोगी, तंद्रा गुहा नियोगी, काशीराम निषाद, मूलचंद चंदेल, महेंद्र गंजिर, रूपा साहू, नवल चन्द्राकर सहित हजारों साथी उपस्थित थे।

 

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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