दल्ली राजहरा शनिवार 24 अक्टूबर 2026  भोजराम साहू 9893 765541

 

 एक समाचार चैनल द्वारा आयोजित जिला संवाद कार्यक्रम में दल्ली राजहरा का दर्द खुलकर सामने आया। कार्यक्रम में मंच पर हरीश सांखला अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स बालोद, डॉ. राहुल अग्रवाल अध्यक्ष IMA, जयंत किरी उद्योगपति, डॉ. प्रदीप जैन डायरेक्टर अरिहंत एकेडमी, डॉ. हिमांशु द्विवेदी प्रधान संपादक INH और गोविंद वाधवानी अध्यक्ष व्यापारी संघ दल्ली राजहरा ने जिले के विकास, शिक्षा और चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की।

 

कार्यक्रम का संचालन INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी कर रहे थे। जब गोविंद वाधवानी जी से दल्ली राजहरा के विकास पर सवाल पूछा गया तो उनका नाराजगी और दर्द दोनों फूट पड़ा।

 

गोविंद वाधवानी ने कहा – “मैं जिस शहर में रह रहा हूं, वो शहर बचेगा कि नहीं, ये सबसे बड़ी चिंता है ।”

 

गोविंद वाधवानी ने कहा कि मेरी सबसे बड़ी तकलीफ यही है कि मैं जिस शहर दल्ली राजहरा में रह रहा हूं, वो शहर बचेगा कि नहीं बचेगा, मुझे इसकी चिंता है। फिर विकास की बात क्या करें? शहर माइंस के लिए बसा था, माइंस में काम खत्म हो रहा है तो आबादी तेजी से घट रही है। सवा लाख की जनसंख्या घटकर 35 हजार रह गई है। अगर यही स्थिति 5 साल और रही तो शहर की जनसंख्या 10 हजार हो जाएगी और नगरपालिका से नगर पंचायत बनने का संकट खड़ा हो जाएगा।

बालोद जिले में एक भी CBSE और केंद्रीय विद्यालय नहीं – शिक्षा की बदहाल स्थिति ।

 

उन्होंने शिक्षा के मुद्दे पर कहा कि पूरे बालोद जिले में एक भी CBSE स्कूल नहीं है। केंद्रीय विद्यालय के लिए जिला बनने के दिन से पहल चल रही है, लेकिन आपसी लड़ाई और राजनीतिक कारणों से जगह बार-बार बदली गई और आज तक केंद्रीय स्कूल चालू नहीं हो पाया। दल्ली राजहरा को फाइनल किया गया था, वहां अस्थाई जगह भी दी गई है, लेकिन आज तक खुला नहीं है।

 

उद्योग के लिए 50 एकड़ जमीन थी, जन सुनवाई में विरोध के कारण नहीं मिल पाई

 

वाधवानी जी ने बताया कि दल्ली राजहरा के पास बिटाल गांव में 50 एकड़ जमीन थी, जिसमें से 25 एकड़ जमीन एसडीएम ने चयन करके देने की बात कही थी। लेकिन जन सुनवाई में विरोध के कारण वह जमीन नहीं मिल पाई। यदि 25-30 एकड़ में भी उद्योग खुलते तो कम से कम 500 लोगों को रोजगार मिलता। हमने गांव वालों को कहा कि आप ही उद्योग लगाइए, शासन सहयोग करेगा, लेकिन नहीं हो पाया। बड़ी अजीब दुविधा है।

 

हर महीने 12-15 करोड़ DMF फंड दल्ली राजहरा से, साल का 120 करोड़, फिर भी विकास नहीं

 

सबसे बड़ा खुलासा DMF फंड को लेकर किया। उन्होंने कहा कि बालोद जिले के विकास के लिए पैसा दल्ली राजहरा से आता है। हर महीने 12 से 15 करोड़ रुपये दल्ली राजहरा से DMF फंड में जाते हैं। साल में लगभग 120 करोड़ रुपये। 2015 से BSP DMF के माध्यम से पैसा दे रही है, अभी तक लगभग 1260 करोड़ रुपये दिया गया है।

 

नियम के तहत DMF फंड का 60% खर्च प्रभावित क्षेत्र यानी दल्ली राजहरा में होना चाहिए, परंतु होता यह है कि बाढ़ कहीं आई है और राहत कार्य कहीं और चल रहा है। यही हमारे साथ हो रहा है। लोग रिटायरमेंट के बाद यहां बसना चाहते थे, लेकिन जमीन होने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं होने की वजह से चले गए। नहीं तो दल्ली राजहरा बहुत अच्छी और शांत जगह है।

 

रेलवे क्षेत्र तथा बीएसपी क्षेत्र में बसे निवासियों को नि:शुल्क में दिया जाए मालिकाना हक ( पट्टा)

 

 

उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि राजहरा एक तरफ उजड़ रहा है दूसरी तरफ रेलवे क्षेत्र में बसे व्यक्तियों को रेलवे के द्वारा बार-बार जगह खाली करने के लिए नोटिस दिया जा रहा है बेहतर यही होगा रेलवे के द्वारा रेलवे क्षेत्र में बसे निवासियों को निशुल्क में जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) दिया जाए । साथ ही बीएसपी क्षेत्र और बाजार में रह रहे व्यक्तियों को भी सरकार के द्वारा निशुल्क पट्टा दिया जाए ताकि उजड़ता हुआ शहर फिर से बस जाए लोगों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल रहा है इसलिए लोग पलायन करने के लिए और मजबूत हो रहे हैं यदि सभी क्षेत्र के निवासियों को मालिकाना हक मिले तो लोग पलायन नहीं करेंगे और शहर फिर से आबाद हो सकेगा ।
मंच से निकला निष्कर्ष

 

अंत में चर्चा में यह बात निकलकर आई कि बालोद जिले में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़ी कमी है। दल्ली राजहरा शहर के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस कार्ययोजना की जरूरत है। सरकार सिंगल विंडो सिस्टम के साथ ऐसे स्थान चयनित करके उद्योगपतियों को उपलब्ध कराए जहां तुरंत उद्योग स्थापित हो सके।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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