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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दल्ली राजहरा ने मनाया कल “विशाल हिंदू सम्मेलन ” ।

दल्ली राजहरा सोमवार 22 दिसंबर 2025 भोज राम साहू 9893765541
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में लौह नगरी दल्ली राजहरा में विशाल हिन्दू सम्मलेन का आयोजन श्री राम मंदिर के सामने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शाखा दल्ली राजहरा के संरक्षक सौरभ लूनिया के नेतृत्व में कल रविवार 21 दिसंबर को सुबह 11:00 बजे से किया गया था।

इस आयोजन के मुख्य अतिथि रामनामी समाज से गुरु माता- सेत बाई रामनामी वा गुला राम रामनामी थे । मुख्य वक्ता जितेन्द्र शर्मा डॉ. वर्णिका शर्मा जी (राष्ट्रीय महामंत्री, राष्ट्रिय सुरक्षा जागरण मंच) विशेष अतिथि कृष्णा शुभम जी महाराज (सुप्रसिद्ध कथावाचक राजनांदगांव) जीतेन्द्र (विभाग प्रचारक राजनांदगांव ) राजेंद्र राठी (माननीय जिला संघचालक जिला-बालोद) तोरण लाल साहू (अध्यक्ष नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा) सौरभ लुनिया जी (कार्यक्रम संयोजक हिन्दू सम्मलेन आयोजन समिति) थे । कार्यक्रम अतिथि स्वागत के उपरांत प्रथम उद्बोधन के रूप में

➡️🔥💥डॉक्टर वर्णिका शर्मा ने कहा कि💥🔥⬅️
ने अपने उद्बोधन में पंच परिवर्तन के संबंध में विस्तार से बताया जिसमें सामाजिक समरसता पर्यावरण संरक्षण कुटुंब प्रबोधन स्व आधारित जीवन नागरिक कर्तव्य बोध था उन्होंने बताया कि हमें अपने स्व पर गर्व होना चाहिए क्योंकि स्व हमे निजता की ओर ईगो की ओर नहीं लेकर जाता हमारा स्व , का मतलब है एकमता हमारी पहचान कराता है यह हमें घमंड करना नहीं सिखाता । हम क्या थे और क्या हो सकते हैं और आध्यात्म से स्वयं को पहचान कर जनकल्याण करना सिखाता है ।

जहां हमारे देश में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर होती है जो की पुण्य श्लोक कहलाती है कठिन समय में चुनौतियों का सामना करने जाती है हमें हमारी शक्ति का बोध कराती है स्व रुचि स्व भाव स्व भाषा स्व भोजन सभी का पालन करें । अपने राष्ट्र अपने देश अपनी संस्कृति से प्यार करें अपनी वेशभूषा से प्रेम करें ।रानी लक्ष्मीबाई जब युद्ध के मैदान में जाती थी तो अपनी वेशभूषा में जाती थी कभी नहीं सोची कि मैं इस वेशभूषा में लड़ाई नहीं लड़ सकती । हमारी संस्कृति में स्व भोज रुचिकर है आप दूसरे संस्कृति का भोजन लगातार नहीं कर सकते आपके शरीर को नुकसान हो सकता है । लेकिन भारतीय संस्कृति का भोजन आपको हमेशा कभी नुकसान नहीं करेगा ।

उन्होंने समरसता के बारे में बताया कि हम चाहे ईश्वर को साकार रूप में पूजने वाले हो या निर्गुण निराकार रूप में हो । चाहे किसी भी भौतिक स्थिति के रहने वाले हो चाहे हमारा रंग कुछ भी हो हम सब मिलने बांटने के बाद भी एक होकर एक राष्ट्र के लिए बांटने का काम नहीं करते यही क्षमता हमारी समरसता बनती है । उन्होंने बताया कि बच्चों में अपनी संस्कृति के संबंध में चर्चा करना चाहिए बच्चों को किसी चीज की जरूरत हो तो उसे सहर्ष बताएं ना कि मोबाइल से गूगल से खोजने को ना कहें । बच्चों को अपने धर्म और संस्कृति के बारे में बताएं अपने घरों का आचरण माहौल इस तरह से बनाएं की बच्चे आपसे सीख सकें ।
➡️🔥💥श्री कृष्णा शुभम जी महाराज सुप्रसिद्ध कथा वाचक 💥🔥⬅️
ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म पर किसी विधर्मी की नजर पड़ती है तो इसका दोष हम पर ही जाएगा । यदि आप चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी मंदिरों में जाए कहीं और न जाए आपकी आने वाली पीढ़ी आपकी बेटियों आपकी बहुएं सिर उठाकर चल सके और आपका समाज एक होकर चले तो आज से हिंदू परंपरा हिंदू पद्धति से अपने घरों को सजाये । अपने घरों पर कुत्ते से सावधान ना लिखकर जय श्री राम लिखे जिनके घरों के ऊपर भगवान का नाम होगा तो कोई ना कोई भक्त आपका भला अवश्य करेगा । अपने आपको मॉडल होने का दिखावा ना करें। मॉडल होना तो आपके विचारों में होना चाहिए आपके संस्कृति में होना चाहिए । आपकी तंग और बेढंग कपड़ों से नहीं होना चाहिए । अपने बच्चों से अच्छे संस्कार की उम्मीद करते हो उन्हें रामायण की चौपाई बताओ कि प्रातः उठकर अपने मां पिताजी को प्रणाम करना चाहिए ।

एक बार अपने आप से प्रश्न करके देखिए क्या आप अपने पिता अपने मां को प्रणाम करते हैं । आने वाले स्वस्थ समाज की निर्माण इस पीड़ी पर टिकी है । जिस प्रकार दो बूंद पोलियो की बच्चों को पिलाई जाती है बुजुर्गों को नहीं । इस प्रकार हमारे संस्कार की दो बूंद बच्चों को देते रहेंगे तो वह अच्छे विचारवान बनेंगे ।आज हमारा दुर्भाग्य है कि हमारे युवा पीढ़ी का आदर्श कुछ पैसे लेकर नाचने वाले लोग जुये को प्रमोट करने वाले क्रिकेटर बन गए हैं । किसी बच्चे से मैंने पूछा बेटा बड़ा होकर क्या बनोगे तो उन्होंने कहा कि मैं आमुख तरह के क्रिकेटर बनूंगा फिल्म स्टार बनूंगा बॉडीबिल्डर बनूंगा किसी ने आज तक यह नहीं बोला कि मैं महान भगत सिंह स्वामी विवेकानंद सुभाष चंद्र बोस रानी लक्ष्मीबाई की तरह बनूंगा/बनूंगी या फिर राजमाता रानी होलकर बनूंगी l हमारे बच्चे में दिग भ्रमित हो रहे हैं आज यह विचार उनके मन में क्यों आया है इसकी जिम्मेदार हम स्वयं हैं । यदि हमारा बच्चा रोता है तो मां बच्चों को मोबाइल पकड़ा देती है बच्चा क्या देख रहे हैं क्या सीखेगा यह सब का उन्हें कोई मतलब नहीं है । टीवी में आप क्या देख रहे हैं बच्चे भी क्या देख रहे हैं इसे समझना जरूरी है बच्चा जो देखेगा वही सीखेगा । आजकल के युवा सड़कों पर गाड़ी अंधों की तरह दौड़ाते है । आप अपने बच्चों को आदर्श नहीं सिखा पा रहे हैं अपने आप को बदल कर एक आदर्श व्यक्ति का चरित्र स्थापित करिए । केवल आधार कार्ड पर लिखी जाति से आप हिंदू होने का प्रमाण नहीं पेश कर सकते । उसके लिए आपको हिंदुओं की तरह आचरण करना होगा आपके घरों को अपने परिवार को हिंदुत्व की परिभाषा में ढलना होगा।

मैं बचपन से संघ से जुड़ा हूं संघ में जिस तरह से मेरे जैसे लाखों करोड़ों युवाओं को सवारा है मैं संघ के उसे पूज्य संस्कृति को प्रणाम करता हूं । हम सब लोग भारत के जिस प्रभुता का अनुभव कर रहे हैं जिस गौरवशाली स्वरूप में देख पा रहे हैं जीतने विकट परिस्थिति ईस राष्ट्र ने देखी है और हम हिंदू गर्व से तिलक लगाकर घर से निकल पा रहे हैं इसके लिए संघ का बहुत बड़ा योगदान है यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं होता तो यह सब आज संभव नहीं होता । जितने मंदिरों बने हुए हैं उसकी जगह पर मजार बनी हुई होती । यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद नहीं होता तो भारत की नक्शा कुछ और होता ।

एक बालक की अवस्था से आगे बढ़कर 100 वर्ष की भीष्म पितामह की अवस्था तक संघ आज पहुंचा है जहां जामवंत हनुमान जी को शक्ति का ज्ञान कराया है । इस तरह संघ आज जामवंत की उम्र में है हमें राम की सेना की तरह हम सब उस राष्ट्र के विचारों को आगे बढ़ाना है ।

उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता की कड़ी निंदा की हमारी बहने बेटियों के साथ वहां बर्बरता पूर्वक उनकी अमत लूटी जा रही है । हिंदुओं काटे जा रहे हैं वहां अत्याचार हो रही है हम अपने सोशल मीडिया पर अपना अभिव्यक्ति देते हैं ऐसा नहीं होना चाहिए सरकार को सोचना चाहिए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होना चाहिए ।

आप सोचिए क्या इस तरह की घटनाएं एक दिन में हो जाती है ऐसा नहीं है इस तरह की घटनाएं क्यों हुई इस तरह की घटनाओं के लिए एक इतिहास को जन्म लेती है जहां हिंदू मौन हो जाती है हिंदू सो जाता है जहां-जहां हिंदू अपना आर्थिक उन्नति के बारे में सोचता है वहां पर हिंदू अपना समाधि स्वयं खोदता है । हम लोग परिवार में आर्थिक उन्नति के बारे में ही नहीं सोचते परिवार की समृद्धि को ध्यान रखकर अच्छे से रखते हैं याद करिए उन दिनों को कश्मीर से कश्मीर पंडितों को मार कर भगाया गया वे मजबूर हो गए अपने जन्मभूमि अपना घर धन दौलत को छोड़ने के लिए । सब कुछ छोड़ दिए फिर भी अपनी बहन बेटियों का इज्जत नहीं बचा पाए । हरियाणा के नूहू में देखते हैं हिंदुओं के परिवार का पलायन हो रहा है बड़े-बड़े घरों में लिखा है इसे बेचना है यह सब क्यों हो रहा है हम अपनी धन की चिंता करना चालू कर देते हैं ।

विशाल हिंदू सम्मेलन में आज मैं अपने एक प्रश्न का दल्ली वासियों से उत्तर चाहता हूं क्या दल्ली राजहरा में बस इतने ही हिंदू हैं उन्हें कम दर्शकों की संख्या पर अफसोस जताते हुए कहा हम हिंदू गणेश चतुर्थी में 11 दिनों तक मूर्तियां स्थापना करते हैं 11वें दिन उनका विसर्जन यात्रा में डीजे बचाकर शराब के नशे में नाचते हैं नवरात्रि में गरबा का आयोजन होता है इस आयोजन के बारे में पेपरो में पढ़ने को मिलता है यहां पर अश्लील गाने बजाए गए यहां पर बजरंग दल हिंदू जागरण मंच ने विरोध किया । क्या हिंदू नाच गा कर ही प्रदर्शन कर सकता है क्या आपकी यही संस्कृति है क्या हिंदू होने का प्रभाव यही है कि आप कितनी बड़ी शोभायात्रा निकालते हैं आप कितना खर्चीला डीजे का सेट लगाकर कार्यक्रम करते हैं ..?

आपके हिंदू होने का प्रमाण तो यह है कि आपके परिवार में एकता है कि नहीं आपके बेटे आपके बेटियां हिंदू संस्कृति में है कि नहीं आजकल बच्चे घरों से बाहर निकलते हैं टीका लगाना पिछड़ा पर होने का पर्याय मानते हैं इसे ओल्ड फैशन मानते हैं उनके मंदिर जाना हवन में बैठना कथा सुनना सत्संग में जाना व्यर्थ लगता है । आजकल की पीढ़ी को सोशल मीडिया पर रील बनाना अच्छा लगता है क्या हम हिंदु पद्धति से जीवन यापन कर सकते हैं क्या हमारे घर प्रतिदिन सुबह पूजा होती है क्या हम सुबह शाम उठकर अपने बड़ों को प्रणाम करते हैं क्या हमारे घरों में गीता रामायण का पाठ होता है । आप चाहे बच्चों को राम बना दे या रावण बना दे बच्चे जो देखते हैं वही करते हैं ।

मैं हमेशा कहता हूं हिंदू कोई धर्म नहीं है हिंदू कोई जाति नहीं है हिंदू एक जीवन शैली है एक आचरण है आप इस बात का विश्वास मानिए हिंदू नाम है हिंदुत्व अस्मिता का प्रेम का अपनेपन का हिंदुत्व आपकी वैचारिक शुद्धता का नाम है यदि यह सारे गुण आप में है तो आप गर्व से कह सकते हैं कि मैं हिंदू हूं ।

मुख्य अतिथि राम नामी समाज
ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ के बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं जानता हूं । बस इतना जानता हूं इस का मतलब होता है एकता । हम जो भी जाति पाति के हैं सब एक मिलकर एक धागा में पिरोकर राष्ट्रहित और राष्ट्र को ही सब कुछ मानने वाला यदि कुछ है कोई है तो वह है संघ की विचारधारा है । केवल राम-राम कहने से कोई राम नहीं बन जाता । हमारी राम नामी होने का एक ही उद्देश्य है भोजन सादा हो मादक द्रव्य का सेवन न करें और मन और कर्म से किसी भी प्राणी को पीड़ा नहीं पहुंचना चाहिए बच्चों में देशभक्ति संस्कृति को सिखाना जरूरी है ।

➡️🔥💥जितेंद्र शर्मा विभाग प्रचारक राजनांदगांव 💥🔥⬅️
ने अपने उद्बोधन में कहा कि 1925 की विजयदशमी विक्रम संवत 1982 को शुरू हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस ने अपनी स्थापना की आज 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं । संघ को जानना है तो संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार को जानना होगा ।

डॉक्टर हेडगेवार जी ने 1925 में नागपुर में संघ की स्थापना की थी ।आज हम संघ की स्थापना की शताब्दी वर्ष मना रहे हैं । डॉक्टर हेडगेवार जी कोलकाता में पढ़ाई की उसे समय वह बहुत छोटे आयु में देशभक्ति की पढ़ाई करने के लिए गए वे चाहते तो महाराष्ट्र में भी रहकर पढ़ाई कर सकते थे । लेकिन उन्होंने कोलकाता को चुना हुआ इसलिए क्योंकि कोलकाता क्रांतिकारी विचारधारा का गढ़ था । वह वापस नागपुर आकर स्वराज आंदोलन में तिलक जी के साथ जुड़ गए । आगे चलकर कांग्रेस के नेतृत्व संभालने के लिए महर्षि अरविंद के पास पांडिचेरी गए लेकिन उन्होंने मना कर दिया यह सब करने के बाद डॉक्टर साहब के मन में विचार आया । आखिरकार देश के लिए संघर्ष करने वाले लोग हैं उनका स्थाई समस्या का हल नहीं है स्थाई समस्या के हल के लिए हमें आगे और खुलकर आना होगा ।
देश में वंदे मातरम के लिए विरोध होता है था लोग निसंकोच वंदे मातरम बोलने के लिए घबराते थे देश की राष्ट्रीय ध्वज आज कुछ लोगों के दबाव में आकर भगवा होने से रह गया। उन्होंने सोचा देश को पूर्ण स्वतंत्र ऐसे नहीं प्राप्त होगा । इसलिए डॉक्टर साहब के मन में उथल-पुथल मच रहा था जिसका यह उद्देश्य था जो इस देश के साथ रिश्ता रखता है जिसने देश को सर्वोपरि माना धरती को मां कहा जिसने संस्कृति रीति रिवाज परंपरा को माना है । वे मानते थे समाज जब तक एक होकर खड़ा नहीं होगा तब तक पूर्ण पूरन गोरख को प्राप्त नहीं होंगे वह समाज जो वसुदेव कुटुंबकम की बात करता है । हिंदू वह समाज है जो पूरी धरा को मां मानता है जो समाज में नर और नारायण को देखता है । हम सिकंदर से मुगलो शको से और बरबर अंग्रेजों के जुल्मों को सहा है अब इसके बाद कोई नहीं आएगा या हम नहीं कह सकते क्या गारंटी है कि अब इसके बाद कोई और आतंकी हमारे देश में नहीं आएगा ।

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया युद्ध की मुहाने पर खड़ी है सिर्फ हिंदुस्तान के सिद्धांत उन्हें बचा सकता है । आज हमारे योग के सिद्धांत को पूरी दुनिया एक साथ मना रही है पूरा विश्व भारत की ओर आकर्षित हो रही है भारत की परंपरा संस्कृति उन्हें आकर्षित कर रही है । जिसका ताजा उदाहरण है कुंभ के मेले में लाखों की संख्या में लोग भारत भूमि में आए थे । लोग भारत को जानना चाहते हैं हमारी भाईचारा की भावना तथा हमारी संस्कृति को अपनाने के लिए आतुर है क्योंकि भारत भूमि मानव से मानव को प्रेम करना सीखाता है हम अपने संस्कृति और भाईचारे की भावना से देश पूरे विश्व में शांति का संदेश देना चाहते है ।अब हम सामाजिक समरसता स्वदेशी स्वभाव के विषय पर्यावरण नागरिक कर्तव्य बोध पर काम कर रहे हैं । हिंदुस्तान और हिंदुत्व को पूरी दुनिया जाने । हिंदू संस्कृति का घर-घर में आकलन हो इसलिए हम निकले हुए हैं । हिंदू जिन बातों से माना और जाना जाता है वह हिंदूत्व जब हमारी आचरण से भी जाना जाएगा तब वह सदी भारत की होगी l
विराट हिंदू सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था जहां लोक गायिका एवं पार्षद टी ज्योति ने छत्तीसगढ़ महतारी , कभी राम बनके कभी श्याम बनके,जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है,सजा दो घर को गुलशन से बेहतरीन ढंग से गाई जहां तालिया की गड़गड़ाहट से उपस्थित जनों ने उत्साहवर्धन किया । वही सरस्वती शिशु मंदिर की शिक्षिका मनप्रीत कौर ने मेरे झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे राम आएंगे गाकर सुंदर शमा बांधी वार्ड क्रमांक 22के बालिकाये श्रद्धा निषाद मोनिका रामटेक लवली देवांगन सौम्या वाडेकर ने भी बेहतरीन छत्तीसगढ़ी संस्कृति का गीत प्रस्तुत किया कार्यक्रम का बेहतरीन आकर्षक योग क्रिया था जहां सरस्वती शिशु मंदिर के 11 छात्राओं ने योग का सजीव मंचन कर दर्शकों को मंत्र मुक्त कर दिया जिससे प्रसन्न होकर नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू ने ₹1100और धर्मचंद जैन ने ₹1100 की उत्सवर्धन राशि देकर बच्चों का सम्मान किया । इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी परंपरा की गीत सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र और छात्राओं ने सामूहिक रूप से दिया ।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राजेश्वर कृदत महेंद्र भाई पटेल कृष्णा साहू पुष्पेन्द्र जी सौरभ लूनिया पूजा जैन पवन गंगबेर नागेश्वर राव पुरोबी वर्मा ,नागेवर राव शेखर रेड्डी ( समर्थ लखानी राकेश देवांगन राजेश्वरी साहू, रेणुका साहू, रेनू साहू संजीव सिंह, पिंटू दुबे ,रामेश्वर साहू प्रसाद श्रीजीत भूपेंद्र श्रीवास, रमेश गुज्जर भूपेन्द्र तिवारी, नरेन्द्र ग्वाल डॉ गोविन्द शर्मा वीरेन्द्र जी साहू, अरुणा रामटेके (स्वच्छता) नंदा पसीने टी ज्योति, द्रोपदी साहू साक्षी खटवानी , संध्या शर्मा नीलिमा भारद्वाज भुवन सिन्हा तरुण साहू निर्मल कुमार शिल्पी राय राहुल साहू प्रदीप साहू टिकेश्वर साहू नरेंद्र भारद्वाज सुरेश साहू एवं मनन गुप्ता एवं सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल परिवार और बहुत से लोगों का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग रहा ।

कार्यक्रम में बेहतरीन मंच संचालन कृष्णा साहू ने किया ।





