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केकती पारा दल्ली राजहरा में भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत साहड़ा देव का पूजा अर्चना कर मनाया “गोवर्धन पूजा उत्सव” ।

दल्ली राजहरा शुक्रवार 25 अक्टूबर 2025 भोज राम साहू 9893765541

गोवर्धन पूजा उत्सव कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ वार्ड क्रमांक- 17, केकती पारा दल्ली राजहरा में कोसरिया यादव समाज -दल्ली राजहरा, सर्व समाज व फ्रेंड्स युवा विकास समिति -दल्ली राजहरा के संयुक्त तत्वाधान में मनाया गया। सभी ने मिलकर गौ-माता की पूजा अर्चना कर उन्हें खिचड़ी गुड़ और हरी घास खिलाई व नगर की समृद्धि व खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम के दौरान नगरवासियों ने आपसी सौहार्द व एकता का संदेश दिया।

गोवर्धन पूजा उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष- दल्ली राजहरा, कार्यक्रम की अध्यक्षता- जीत गुहा नियोगी प्रदेश अध्यक्ष जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़, विशिष्ट अतिथि- संतोष पांडे कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सेवादल छत्तीसगढ़, डिकेश्वर साहू इंजीनियर नगर पंचायत- पलारी, श्रीमती रेखा सहारे वार्ड क्रमांक- 17 पार्षद, ईश्वर कोड़प्पा पार्षद प्रतिनिधि वार्ड-16, उमेश यादव पुलिस विभाग-मोहला, टामन विश्वकर्मा पुलिस विभाग-कांकेर, योगेश यादव सचिव सर्किल कोसरिया राउत यादव समाज दल्ली राजहरा, रमन यादव, भूषण यादव,शंकर साहू, जगमोहन राणा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि- पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका परिषद- दल्ली राजहरा ने गोवर्धन पूजा के अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि गोवर्धन पूजा भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के महत्वपूर्ण प्रतीक है जो हमें भक्ति, स्नेह और एकता के मार्ग पर चलने का प्रेरणा देते हैं। गोवर्धन पूजा उत्सव पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रकृति संरक्षण और समीक्षा का संदेश भी देती है। उन्होंने ने डौंडी लोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक- श्रीमती अनिला भेड़िया की निधि से गोवर्धन स्थल में सीमेंटीकरण हेतु 03 लाख की स्वीकृति जल्द प्रदान करने का आश्वासन भी दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जीत गुहा नियोगी प्रदेश अध्यक्ष जन मुक्ति मोर्चा ने कहा कि गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है शास्त्रों के अनुसार गायों को गंगा नदी के समान पवित्र और देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। गौ-माता अपने दूध से स्वास्थ्य प्रदान करती है और उनके बछड़े खेतों में अनाज उगाने में सहायक होते हैं, इस पर्व के पीछे एक लोक कथा है जिसके अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचने के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर रखा था, ब्रजवासी उसकी छाया में सुरक्षित रहे, सातवें दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाने का आदेश दिया।

गोवर्धन पूजा उत्सव बड़ी श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया, गोवर्धन पूजा के बाद भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण जी और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा और जयकारे लगाए, परिक्रमा के दौरान भक्ति गीत गाते और मंत्रोपचार करते हुए भगवान श्री कृष्ण जी से आशीर्वाद की कामना करते दिखे। गोवर्धन पूजा का यहां पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और प्रेम की प्रेरणा देता है यह समाज को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनकी पूजा का भी संदेश देता है ताकि मानवता पर प्रकृति का आशीर्वाद बनी रहे।





