दल्ली राजहरा

गुरुवार 5 फरवरी 2026

भोजराम साहू 9893 765541

फूलों से नित हँसना सीखो,

भौंरों से नित गाना ।

तरु की झुकी डाली से,

नित सीखो शीश झुकाना।।

 सीख हवा के झोंको से लो,

हिलना जगत हिलाना ।

दूध और पानी से ,

सीखो मिलना और मिलाना।।

श्रीनाथ सिंह द्वारा रचित कक्षा 4 थी की यह कविता आज कई मायने में प्रासंगिक है । तत्कालीन नगर प्रशासक एस जी श्रीखंडे के नेतृत्व ने राजहरा को हरा भरा करने की दिशा में बीएसपी क्वार्टरों के बीच गणेश मंदिर के पास, काली मंदिर के आस पास ,भीष्म रथ के आसपास ,जैसे कई जगहों पर सागौन पेड़ का वृक्षा रोपण किया गया था । उसी समय इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस ऑफिस के सामने सागौन के पौधे के साथ कागज का पौधे भी लगाए थे। आज वह सागौन का पेड़ लगभग 50 फीट ऊंचा हो गया गया है साथ ही अपने साथ अपने बचपन के मित्र कागज के पेड़ को भी अपने साथ पकड़ कर रखा है दोनों की दोस्ती देखते ही बनती है दिसंबर माह से लगभग मार्च के अंत तक कागज के पेड़ फूलों से लदा रहता है।
रोड से गुजरने वाले लोग रुक कर एक टक इसे जरूर निहारते हैं तो कोई उसके सामने खड़े होकर सेल्फी लेते हैं कोई तो यादें बनाने के लिए इन्हें अपने मोबाइल के कमरे में कैद कर लेते हैं । कागज का यह पेड़ कई मायने में प्राकृतिक रूप से हमें शिक्षा देती है कि बिना खाद और पानी ( किसी बिना सुविधा ) के आदमी जब हौसला हो तो कैसे अपने मंजिल को हासिल कर लेता है।

तो दूसरी ओर सागौन और कागज के पेड़ जिसे एक साथ लगाया गया था उससे यह भी प्रकृति हमें शिक्षा देता है कि विपत्ति में भी अपने दोस्त का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। दोनों एक साथ बड़े हुए एक साथ इतनी सुंदरता के साथ खड़े हैं की मन को मोह लेता है ।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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