विविध

संडे मेगा स्टोरी में आज रविवार 8 फरवरी 2026 को पढ़िए पार्षद से सामाजिक पदाधिकारी, शिक्षक और लेखक हीरालाल गुरुजी “समय” की कहानी ।

दल्ली राजहरा

रविवार 8 फरवरी 2026

भोजराम साहू 9893 765541

 

संडे मेगा स्टोर आज हीरालाल गुरुजी की कहानी बता रहे हैं वह ऐसे व्यक्तित्व के धनी हैं जिन्होंने कई कठिनाइयों से लड़कर आज शिक्षा के साथ छत्तीसगढ़ी की एक बेहतरीन लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाया है जिनकी लेख आज विभिन्न समाचार पत्रों में विस्तार से छपा करता है । जिसकी कई पाठक हैं जो उनके लेख की तारीफ करते नहीं थकते।

              कहा जाता है समयदान भी इंसान के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि समय एक मूल्यवान संसाधन है समय का दान करने से हम न केवल दूसरों की मदद करते हैं बल्कि संबंधों को मजबूत कर सकते हैं एक प्रेरक बन सकते हैं ।

परिवार मित्र और समाज के साथ जुड़ सकते हैं समयदान से आंतरिक शांति मिलती है और समाज सेवा में योगदान होता है लोगों को अपने कौशल अनुभव से प्रेरित किया जा सकता है बूढ़े मां-बाप के साथ बिताया गया समय भजन कीर्तन में लगाया समय अनमोल होता है वर्तमान में लोगों के पास धन संपत्ति बंग्ला गाड़ी ऐसो आराम की चीज सब कुछ है लेकिन उनके पास समय नहीं है समयदान अपनापनके साथ मान सम्मान भी दिलाता है

          ऐसे ही एक व्यक्तित्व है जो लौह नगरी दल्ली राजहरा में जन्म लेकर गरियाबंद जिले को कर्मभूमि बनाकर समयदान के महत्व के कारण ही आज “समय” के नाम से छत्तीसगढ़ के साहित्यिक क्षेत्र में पहचान बनाई है ।

30 नवंबर 1971 को दल्ली राजहरा के कोण्डे दफाई में श्रमिक मजदूर परिवार में जन्म लिए हीरालाल गुरुजी “समय” वर्तमान में गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड छुरा में शिक्षक के रूप में पदस्थ हैं । उनकी प्राथमिक शिक्षा 1978-79 में बीएसपी प्राथ शाला क्रमांक 22 क्र 33,पूर्व माध्यमिक शिक्षा कोण्डेकसा स्कूल, हाई स्कूल हायर सेकेंडरी शिक्षा बीएसपी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 3 में हुई स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई शासकीय नेमीचंद जैन महाविद्यालय दल्ली राजहरा से नियमित एवं स्वाध्यायी छात्र के रूप में पूरी की।

पढाई जीवन से ही वे खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रुचि रखते थे। उनका जन्म मजदूर परिवार में होने के कारण प्रारंभ से दल्ली राजहरा के मजदूर आंदोलन एवं शहीद शंकर गुहा नियोगी के विचारों का प्रभाव उनके रगों में रहा। बचपन में उन्होंने अपने पिताजी के साथ पान की दुकान भी चलाया।

आईटीआई पढ़ने के बाद उन्होंने श्रमिक व मजदूर वर्ग से ऊपर उठने की सोच बनाकर शिक्षण जगत में आने का मन बनाया और स्थानीय गांधी विद्या मंदिर स्कूल से अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत की वहाँ वे 16 वर्षों तक उस विद्यालय में सेवा करते समय दिया वे प्राचार्य रहे। इसी बीच सन 1999 में जब दल्ली राजहरा नगर विकास के लिए साडा से नगर पालिका दल्ली राजहरा का गठन हुआ और प्रथम बार अध्यक्ष पार्षदों का चुनाव हुआ जिसमें वार्ड क्रमांक 16 भगत सिंह वार्ड से हीरालाल साहू गुरुजी को प्रथम पार्षद निर्वाचित होने का श्रेय एवं गौरव प्राप्त हुआ ।

पार्षद चुनाव के समय ही उन्हें नया नाम हीरालाल साहू से हीरालाल गुरुजी नाम मिला था जिससे नगर में उनकी पहचान हुई उनके पार्षदीय कार्यकाल के दौरान वार्ड क्रमांक 16-17 के 596 यूनिट क्वार्टर में प्रथम बार बिजली आई।
जब वे नगर पालिका में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सभापति बने तो नगर के शासकीय उजचित मूल्य दुकानों को प्रति तीन वार्ड एक दुकान की व्यवस्था कराई जो आज पर्यंत इस व्यवस्था में चल रही है अपने पार्षदीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने वार्ड में नाली बिजली सड़क के साथ-साथ खाली पड़ी भूमि पर श्रमिक क्षेत्र में बच्चों के लिए नेहरु बाल उद्यान निर्माण कराया पानी के जल स्रोतों का संधारण, कुंड का साफ सफाई करवाया ।

यहीं से उन्हें समाज को समय दान देने की प्रेरणा अपने वार्ड में नशा मुक्ति पर जोर देने धार्मिक आयोजन से लोगों को जोड़ा लगातार 3 वर्षों तक अपने वार्ड में एक दिवसीय रामायण प्रतियोगिता आयोजित कराई, युवाओं के साथ मिलकर बैडमिंटन क्लब का गठन कर प्रतियोगिता आयोजित का प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया ।

            वर्ष 2000 से ही स्थानीय तहसील साहू समाज के युवा प्रकोष्ठ के पदाधिकारी बने पश्चात परीक्षेत्रीय साहू समाज से लेकर तहसील साहू समाज के विभिन्न पदों में पदाधिकारी रहकर समाज की सेवा में योगदान दिया उनके ही कार्यकाल में परिक्षेत्रीय साहू समाज सम्मेलन की शुरुआत हुई जो आज भी सतत जारी है गांधी विद्या मंदिर विद्यालय, साहू समाज, नगर पालिका परिषद एवं मजदूर संगठन से जुड़े होने के कारण वहां भी समयदान देते रहे ।

            वहां भी उन्होंने विभिन्न धार्मिक आयोजनों खेल प्रतियोगिता सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में समय दान देने लगे जिससे उनकी पहचान शिक्षकों के बीच हुई शिक्षक आंदोलन में भी वे समय दान देने लगे जिसके कारण उन्हें विकासखंड संगठनों में पदाधिकारी नियुक्त किया गया वर्ष 2011 में शिक्षक मानस परिवार छुरा के सचिव बनाए गए वर्ष 2013-14 में स्थानीय युवाओं ने एक साहित्यिक मंच का गठन किया जिसमें संचालन कार्य के लिए उनसे समयदान मांगे वहीं से उनके साहित्यिक जीवन का एवं रचना लेखन का पुनर्जन्म हुआ युवाओं के लिए प्रेरक बनने के लिए उन्होंने रात्रि कालीन कवि सम्मेलन में उत्सवों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मंच संचालन के साथ समय देते रहे साथ ही साथ लेखन कार्य में भी समय देते रहे जिसका परिणाम हुआ कि वर्ष 2015 से छत्तीसगढ़ के विभिन्न प¹त्र पत्रिकाओं शगुन चिरैया, राजिम टाइम्स, अमृत संदेश अपनडेरा, दैनिक भास्कर संगवारी इतवारी, नवभारत, पत्रिका पहट देशबंधु मईड़ के अंकों में सैकड़ो छत्तीसगढ़ी हिंदी कविता आलेखो का प्रकाशन हुआ ।

जो आज पर्यंत जारी है न्यूज़ 18 हिंदी छत्तीसगढ़ी में पढ़ें इस वेबसाइट पर उनके दर्जनों आलेख प्रकाशित है उन्होंने स्थानीय युवाओं को छत्तीसगढ़ी में लेख लिखने की प्रेरणा दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा को पुष्ट करने में समाज का योगदान दिया इसी बीच उन्हें छंद के छ ऑनलाइन गुरुकुल में छंद सीखने का अवसर मिला छंदगुरु अरुण निगम जी के सानिध्य में उन्होंने छत्तीसगढ़ी में विभिन्न छंदो को सीखा और अपनी रचना में उतारा जिनके कारण उन्हें छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग से भी सम्मान पत्र प्राप्त हुआ ।

जन स्वास्थ्य जागरूकता के तहत छत्तीसगढ़ योग आयोग से जुड़कर अपने साथियों के साथ समयदान करते हुए छुरा विकासखंड के विभिन्न ग्रामों में बच्चों युवाओं बुजुर्गों को योग के प्रति प्रेरित किया ।

 

 अपने शिक्षक की दायित्व के साथ-साथ धार्मिक सामाजिक साहित्यिक खेल सांस्कृतिक आदि कार्यक्रमों में समय दान देने एवं समय के समायोजन के साथ तय समय पर उपस्थित हो जाने के कारण ही उनके साहित्यिक साथी ललित साहू जख्मी उन्हें “समय सर” पुकारने लगे उन्होने “समय” नाम दिया जो आज एक साहित्यिक परिचय बनाकर चल रहा है अपने समय दान देने के कारण ही उन्हें आज शिक्षा संगठन में जिला के पदाधिकारी का दायित्व जिला गरियाबंद वेटलिफ्टिंग संघ के सचिव का दायित्व अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ के पदाधिकारी स्मरण साहित्य समिति जिला गरियाबंद के सचिव जिला गरियाबंद वेटलिफ्टिंग संघ के सचिव जिला योग आयोग के सदस्य म्यूजिकल संध्या के मंच संचालक का दायित्व संभाल रहे हैं ।

उनके सानिध्य में साहित्यिक लेखन शुरुआत करने वाले युवा अपनी प्रतिभा निखार कर छत्तीसगढ़ी फिल्मों में गीत, एल्बमों में गीत लिखकर पुस्तकों में लेख लिखकर छत्तीसगढ़ में नाम कमा रहे हैं साथ ही सांस्कृतिक एवं खेल में भी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा सृजित हुई है वाणी को सरस्वती बुद्धि को गणपति का आशीर्वाद प्राप्त होने के कारण ही उन्हें सरपंच जनपद जिला पंचायत सदस्यों अध्यक्षो के साथ साथ विधायक सांसद मंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मंच संचालन का श्रेय मिला।

 

हीरालाल गुरूजी समय को साहित्य समाज खेल सांस्कृतिक क्षेत्र में समयदान हेतु हिन्दी साहित्य भारती उत्तर प्रदेश, पं सुन्दरलाल शर्मा साहित्य समिति राजिम, वक्ता मंच रायपुर, छंद के छ, छत्तीसगढ़ शासन समाज कल्याण विभाग, श्री सहस्रचंडी महायज्ञ एवं विराट संत समागम निमोरा, राष्ट्रीय जनजाति साहित्य महोत्सव, समाज गौरव विकास समिति रायपुर साहित्य आजकल साहित्यिक संस्था लखनऊ खेल एवं युवा कल्याण विभाग काव्यकला साहित्य मंच बालोद आदि संस्थाओं से सम्मान पत्र प्राप्त हुआ है ।

 

Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!