दल्ली राजहरा मंगलवार 17 मार्च 2026 भोजराम साहू 9893 765541
15 मार्च 2026, रविवार को दल्ली राजहरा के माथुर सिनेप्लेक्स में साहित्य, संस्कृति और प्रेरणा का एक ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। अवसर था छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ साहित्यकार, छत्तीसगढ़ रत्न सम्मानित 82 वर्षीय डॉ. शिरोमणि माथुर जी की पाँच महत्वपूर्ण पुस्तकों —
(१)चल रे मनवा हद के पार, (२)अंतर ध्वनि,(३)समय की पुकार, (४) अभी नहीं तो कभी नहीं और (५) स्वर्णिम रश्मियां का हुआ भव्य विमोचन ।
यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह जागरूकता, साहित्य साधना और जीवन के अंतिम पड़ाव में भी सृजन की अटूट शक्ति का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। 82 वर्ष की आयु में भी डॉ. शिरोमणि माथुर जी की साहित्यिक ऊर्जा और समाज के प्रति समर्पण ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) श राकेश पाण्डेय जी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त) सुरेश कुमार चंद्रवंशी जी ने की। हीं विशिष्ट अतिथि के रूप में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव श्री भूपेंद्र कुलदीप जी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में दल्लीराजहरा नगर पालिका अध्यक्ष श्री तोरण साहू जी, सौरभ लूनिया (जिला महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी), प्रजापिता ब्रह्माकुमारी की पूर्णिमा बहन, जिला कांग्रेस कमेटी के चंद्रेश हिरवानी, डी.ए.वी. स्कूल के प्राचार्य राजशेखर राव
, रति राम कोसमा (अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी), हस्ताक्षर साहित्य समिति के अध्यक्ष संतोष ठाकुर, पीयूष सोनी, शमीम सिद्दीकी तथा पारकर जी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अतिथियों ने अपने उद्बोधनों में डॉ. शिरोमणि माथुर जी की साहित्य के प्रति गहन निष्ठा, निरंतर लेखन और समाज को दिशा देने वाली रचनात्मक चेतना की सराहना की।
कई वक्ताओं ने अपने छात्र जीवन के समय डॉ. माथुर जी से प्राप्त मार्गदर्शन और प्रेरणा को याद करते हुए कहा कि उनकी पुस्तकों का विमोचन उनके जीवन के लिए भी एक गौरवपूर्ण और भावनात्मक क्षण है।
इस ऐतिहासिक आयोजन के आयोजन समिति के अध्यक्ष दुर्ग के उद्योगपति, समाजसेवी तथा साहित्य एवं संगीत प्रेमी श्री कैलाश जैन ‘बरमेचा’ जी थे। उन्होंने इस अवसर को साहित्य का महोत्सव बनाने के लिए विशेष प्रयास किए। उनके द्वारा दुर्ग–भिलाई क्षेत्र के साहित्यकारों और कवियों को एकत्रित कर बस के माध्यम से कार्यक्रम स्थल तक लाने की व्यवस्था की गई, जिससे बड़ी संख्या में साहित्यकार इस कार्यक्रम में सम्मिलित हो सके।
साहित्य जगत का यह अनूठा आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री श्री राकेश पाण्डेय जी ने अपने उद्बोधन में इस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में साहित्यिक गतिविधियों को इस प्रकार वृहद स्वरूप देने के लिए श्री कैलाश जैन बरमेचा जी के साथ विशेष बैठक कर आगे भी बड़े आयोजन करने की इच्छा रखते हैं।
इसी क्रम में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री भूपेंद्र कुलदीप जी ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. शिरोमणि माथुर जी की पुस्तकों को आगामी शिक्षा सत्र में एम.ए. हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने हेतु वर्तमान में प्रकाशन प्रक्रिया में है जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान मंच से यह भी जानकारी दी गई कि साहित्य और समाज के लिए उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए आदरणीया “दादी जी” डॉ. शिरोमणि माथुर जी के नाम को गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी प्रस्तावित किया गया है। यह घोषणा सुनकर उपस्थित जनसमूह में उत्साह और गर्व का वातावरण बन गया।
अपने उद्बोधन में श्री कैलाश जैन बरमेचा जी ने डॉ. शिरोमणि माथुर जी की साहित्यिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि
“उनकी रचनाएँ केवल शब्दों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाली चेतना की मशाल हैं। साहित्यकार समाज का दर्पण होता है और ऐसे साहित्यकार समाज में सकारात्मक सोच, नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करते हैं।”
पुस्तक विमोचन के पश्चात कार्यक्रम में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग-भिलाई और आसपास के क्षेत्रों से आए अनेक प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
इ¹स काव्य गोष्ठी में डॉ. रौनक जमाल, डॉ. विजय गुप्ता, डॉ. संजय दानी, बृजेश मलिक, नावेद रज़ा दुर्गवी, सत्या चंद्राकर, ओमवीर करन, शुचि भवि, माला सिंह, सोनिया सोनी, शशि प्रभा गुप्ता, मिताली वर्मा, एन.एल. मौर्य, टी.एन. कुशवाहा, इस्माइल आज़ाद, आलोक नारंग, आलोक राय, प्रकाश चंद्र मंडल, नौशाद सिद्दीकी, डॉ. यशवंत सूर्यवंशी, तरुण पटेल, हाजी ताहिर, बैकुंठ महानंद सहित अनेक कवियों ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया।
इसके अतिरिक्त बिलासपुर से पधारे फिल्म निर्माता सुनील दत्त मिश्रा, सत्य चंद्राकर, सतीश पारख, एस.के. बंछोर, आलोक चंद्रा, तुलसी सोनी, दिनेश जैन, जाहिद खान, मृदुला रोजिंदार, सीमा यादव, राजेंद्र भारद्वाज, शेखर रेड्डी, राजेश पटेल, गोपेश गुप्ता, छगन साहू, राजेश श्रीवास्तव, हितेश पटेल, आशीष धुरिया, दिगंत माथुर, पार्थ माथुर सहित अनेक साहित्य प्रेमियों और सहयोगियों ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उपस्थित कवियों ने डॉ. शिरोमणि माथुर जी के सम्मान में लिखी गई अपनी विशेष रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं, जिससे पूरा सभागार भावनात्मक और साहित्यिक वातावरण से भर उठा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक श्री कैलाश जैन बरमेचा जी तथा माथुर परिवार द्वारा उपस्थित सभी साहित्यकारों और कविगणों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से रायपुर से पधारे कवि श्री मोहम्मद हुसैन को उनकी प्रभावशाली सरस्वती वंदना और काव्यपाठ के लिए श्री कैलाश जैन बरमेचा जी द्वारा चाँदी का सिक्का प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील श्रीवास्तव, नावेद रज़ा दुर्गवी और प्रखर दुबे ने अत्यंत प्रभावी ढंग से किया, जबकि अंत में श्रीमती रश्मि अग्रवाल ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित जनसमूह के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन न केवल दल्लीराजहरा बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए साहित्य, प्रेरणा और सांस्कृतिक चेतना का ऐतिहासिक अध्याय बन गया, जहाँ 82 वर्ष की एक साहित्य साधिका ने यह सिद्ध कर दिया कि उम्र केवल संख्या है, सृजन और जागरूकता की कोई सीमा नहीं होती।