दल्ली राजहरा
सोमवार 01 जून 2026
भोजराम साहू 9893 765541
 हिंदुस्तान स्टील एंप्लॉयज यूनियन दल्लीराजहरा ने सीटू का 56 वाँ स्थापना दिवस यूनियन कार्यालय बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया।
 कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7 बजे क्रांतिकारी नारों के बीच ध्वजारोहण से हुई। इसके बाद संगठन के संस्थापक सदस्यों और मजदूर आन्दोलन में शहीद हुए साथियों को पुष्प समर्पित कर उनके त्याग को याद किया गया। शाम 6 बजे हुई आमसभा में सैकड़ों मजदूरों की मौजूदगी में यूनियन नेताओं ने संगठन के गौरवशाली इतिहास, निजीकरण-छंटनी की मौजूदा चुनौतियों और आने वाले समय की लड़ाई पर खुलकर बात रखी। मंच का संचालन कामरेड सुनील ने किया।

 मुख्य बिंदु एक नजर में
👉 ज्ञानेंद्र सिंह :– मालिक कभी मजदूर हितैषी नहीं हो सकता। घाटा लगते ही काम बंद और मजदूर बेरोजगार । सेल में 40% कटौती का फरमान जारी।`  
👉 प्रकाश क्षत्रिय:-– चुप रहोगे तो दमन बढ़ेगा। अन्याय के तले दब जाओगे। 4 श्रम संहिता मजदूरों के बुनियादी अधिकारों पर हमला है।   
👉  सिमैया पुरुषोत्तम: जब तक पूंजीवाद खत्म नहीं होता, लड़ाई जारी रहेगी। 2013 में जीरो, आज 500+ ठेका श्रमिक सीटू में।
👉 मुख्य आरोप: “सबका साथ-सबका विकास” का नारा देने वाली सरकार सिर्फ पूंजीपतियों का विकास कर रही है।

 “सीटू समझौता नहीं, संघर्ष का नाम है” – अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह  
सीटू अध्यक्ष कामरेड ज्ञानेंद्र सिंह ने आमसभा को संबोधित करते हुए कहा, सीटू एक सैद्धांतिक, कर्मठ और पूरी तरह मजदूरहितैषी संगठन है। सीटू का जन्म ही अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए हुआ है। हमारा मुख्य उद्देश्य मजदूरों के हक-अधिकार की लड़ाई लड़ना और उन्हें उनका पूरा हक दिलाना है। 
उन्होंने सीटू के जन्म की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा मजदूर संगठन एटक,जब वर्ग सहयोग के रास्ते पर चल पड़ा था। एटक का तत्कालीन नेतृत्व विरोध की आवाज को दबा देते थे। मालिकों और सरकार से सहयोग की नीति के कारण मजदूरों का शोषण बढ़ रहा था। इसी से क्षुब्ध होकर कामरेड बी.टी. रणदिवे के नेतृत्व में 28 से 31 मई 1970 तक कोलकाता में हुए ऐतिहासिक सम्मेलन में 30 मई 1970 को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस यानी सीटू का गठन हुआ। एकता के लिए संघर्ष और संघर्ष के लिए एकता यही हमारा मूल मंत्र बना।

ज्ञानेंद्र सिंह ने मौजूदा हालात पर चेताते हुए कहा,मालिक कभी मजदूर हितैषी नहीं हो सकता। उनका एक ही मकसद है असीमित मुनाफा कमाना ।। जिस दिन आप उनके अनुरूप नहीं रहे या उनको आपसे फायदा नहीं हुआ, उसी दिन वह आपको बाहर का रास्ता दिखा देगा। उन्होंने खुलासा किया कि हमारे उद्योग में स्टील सेक्रेटरी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियमित और ठेका श्रमिकों में 40% कटौती की जाए। आज खदान हो या प्लांट, हर जगह कर्मचारियों को कम करने की बात चल रही है। छोटे-छोटे ठेका कार्य बंद हो रहे हैं। वह दिन दूर नहीं जब यहां कार्यरत्त सैकड़ों लोग बेरोजगार घूमेंगे। सबका साथ-सबका विकास की बात करने वाली सरकार आज सिर्फ पूंजीपतियों के विकास के रास्ते पर चल रही है। इसलिए हमें व्यापक जन लामबंदी के लिए तैयार रहना होगा।

 

 “चुप रहोगे तो अन्याय के तले दब जाओगे” – प्रकाश क्षत्रिय  
संगठन सचिव कामरेड प्रकाश क्षत्रिय ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा, जरूरी नहीं है कि आपके हर आंदोलन से आपको सफलता मिले, लेकिन यदि आप चुप रहोगे तो दमन बढ़ता जाएगा और आप अन्याय के तले दबते जाओगे। मजदूर वर्ग को मजदूरों की सत्ता स्थापित होने तक संघर्ष करना ही पड़ता है दूसरा कोई रास्ता नहीं है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभिन्न सरकारी उपक्रमों में नियमित कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है और उनकी जगह ठेका श्रमिकों से काम कराया जा रहा है। ठेका श्रमिक पूरी ईमानदारी से उत्पादन बढ़ाने में प्रबंधन का सहयोग कर रहे हैं, कंपनी को करोड़ों का लाभ हो रहा है, फिर भी कंपनी मजदूरों को मिलने वाले लाभों में कटौती कर रही है। क्षत्रिय ने चेताया कि सरकार 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिता ला रही है। इससे मालिकों को मजदूरों का खुलकर शोषण करने का अधिकार मिल जाएगा। मजदूर कभी हड़ताल नहीं कर सकेंगे, विरोध प्रकट नहीं कर सकेंगे। हर तरफ से मजदूर पर पाबंदी होगी। मैं दावे से कहता हूं कि पूरे देश में मजदूर आंदोलन से यदि सीटू को निकाल दिया जाए तो आंदोलन शून्य हो जाएगा।
 “सीटू ने सडक से कोर्ट तक बडी लडाइयां लडी और जीतीं – पुरुषोत्तम सिमैया  
सचिव कामरेड पुरुषोत्तम सिमैया ने संगठन की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, 2013 से पहले हमारे संगठन में एक भी ठेका श्रमिक नहीं था। आज 500 से ज्यादा ठेका श्रमिक हमारे गौरवशाली सदस्य हैं। यह हमारे संघर्ष का ही नतीजा है। 

उन्होंने बताया कि सीटू ने बीईएमएल में काम करने वाले कर्मचारियों को एडब्लूए दिलाने के लिए केंद्रीय श्रम आयुक्त रायपुर में प्रकरण लड़ा और जीता। इसी तरह कोकान के सिंह ट्रांसपोर्ट ठेका में अवैधानिक कामबंदी के खिलाफ कानूनी लडाई लडी और जीत हासिल की । 70 कर्मचारियों को लाखों का बकाया दिलवाया।

 

 सिमैया ने कहा कि सीटू ने AWA की लड़ाई, कैंटीन की लड़ाई, चित्रकोट हॉस्टल में महिलाओं की लड़ाई और सबसे प्रमुख सुरक्षा गार्ड की लड़ाई जीती है। सुरक्षा गार्ड का वेतन लगभग दोगुना हो गया है। हमारे प्रयासों से माइंस भत्ता और रात्रि कालीन भत्ता, और ठेका श्रमिकों को ओपीडी चिकित्सा सुविधा भी चालू हुआ।
उन्होंने याद दिलाया कि सालेम स्टील प्लांट को बिकने से भी सीटू ने बचाया है। आने वाला समय बहुत विकट होने वाला है। प्रबंधन और सरकार ट्रेड यूनियन को खत्म करने पर तुली है। जब तक बगावत के रास्ते मजदूर नहीं उतरेंगे, तब तक हक नहीं मिलेगा। सीटू केवल मजदूरों का संगठन नहीं, सामाजिक व आर्थिक समानता हासिल करना भी हमारा लक्ष्य है। जब तक दुनिया में पूंजीवाद खत्म नहीं होता, तब तक लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी।`
  उपाध्यक्ष  नकुल देवांगन ने कहा: संगठन का साथ दो  
उपाध्यक्ष नकुल देवांगन ने अपने संबोधन में कहा कि सीटू बनाने का एक ही उद्देश्य है – संगठित रहना और मजदूरों के हक-अधिकार के लिए लड़ना। बेहतर यही है कि जब भी संगठन की ओर से आपको बुलाया जाए, आप संगठन का साथ दें और अवश्य उपस्थित हों। दूसरों के कंधे पर लड़ाई नहीं जीती जाती, इसलिए अपने संगठन को मजबूत बनाना हमारा पहला कर्तव्य है।

इस अवसर पर सुजीत मंडल, जे. गुरुवुलु, मुकेश मानस , रामचंद्र यादव, शशिकांत सहित सीटू के सैकड़ों सदस्य, महिला कर्मी और ठेका श्रमिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मजदूर एकता जिंदाबाद के नारों से परिसर गूंज उठा।

 

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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