दल्ली राजहरामंगलवार 02 जून 2026भोजराम साहू 9893 765541 👉“वनाधिकार कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं” – सर्व आदिवासी समाज |👉 “ग्रामसभा की सहमति बिना निर्माण अवैध” – मुक्ति मोर्चा जमड़ी पाट स्थित तुएगोदी क्षेत्र में बाबा बालक दास के कथित अवैध कब्जे और निर्माण के विरोध में सोमवार को सर्व आदिवासी समाज ने छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के समर्थन से कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। पूर्व सूचना के बावजूद भारी बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन सैकड़ों आदिवासी युवा बैरिकेड तोड़कर कलेक्टर कार्यालय परिसर पहुंच गए। https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/06/VID-20260601-WA0019.mp4शाम तक चला शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शनकारी दिनभर कलेक्टर कार्यालय में डटे रहे और बाबा बालक दास के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते रहे। उनका कहना था कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी बात सुनी जाए और वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत मिले अधिकारों की रक्षा की जाए। शाम तक चले शांतिपूर्ण धरने के दौरान पुलिस-प्रशासन मौजूद रहा।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/06/VID-20260601-WA0020.mp4“कानून का पालन हो” – जनक लाल ठाकुर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने कहा, वनाधिकार अधिनियम 2006 आदिवासी समुदाय को संवैधानिक सुरक्षा देता है। हमारा आग्रह है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे और कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करे। लोग अपनी जायज मांग लेकर आए हैं, उनकी बात सुनी जानी चाहिए।`क्या है तुएगोदी विवाद? स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि तुएगोदी क्षेत्र उनके पारंपरिक उपयोग में रहा है। जंगल, चराई भूमि, जल स्रोत और लघु वनोपज उनकी आजीविका का आधार हैं। बाबा बालक दास द्वारा पटेश्वर धाम में किए जा रहे निर्माण कार्य और भूमि पर कब्जे की गतिविधियां उनके सामुदायिक वनाधिकारों का उल्लंघन हैं।वनाधिकार अधिनियम 2006: ग्रामसभा सर्वोपरि वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अनुसूचित जनजाति और परंपरागत वनवासियों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार प्राप्त हैं। कानून के अनुसार ग्रामसभा को वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और उपयोग में निर्णायक भूमिका दी गई है। किसी भी निर्माण या भूमि हस्तांतरण से पहले ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। ग्रामीणों का आरोप है कि तुएगोदी में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।संगठनों की 3 प्रमुख मांगें 1. निष्पक्ष जांच: बाबा बालक दास के निर्माण कार्य और भूमि उपयोग की उच्चस्तरीय जांच हो। 2. कानून का पालन: वनाधिकार अधिनियम 2006 के प्रावधानों की समीक्षा कर ग्रामसभा की भूमिका सुनिश्चित की जाए। 3. अधिकारों की रक्षा: आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की रक्षा हो।अल्टीमेटम: कार्रवाई नहीं तो जन-आंदोलन सर्व आदिवासी समाज ने कहा है कि यदि बाबा बालक दास के कथित अवैध कब्जे पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। यह केवल भूमि विवाद नहीं, आदिवासी समुदाय के अधिकारों, प्राकृतिक संसाधनों पर पारंपरिक नियंत्रण और सामाजिक न्याय का सवाल है` – संगठनों ने कहा।Spread the lovePost navigationहिंदुस्तान स्टील एम्प्लॉयज यूनियन ने मनाया सीटू का 56वाँ स्थापना दिवस। “संगठित रहो, संघर्ष करो” का दिया नारा..! दल्ली राजहरा के ‘पावर हब’ जेडी ऑफिस परिसर की बदहाली: पानी, शौचालय, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल..?