दल्ली राजहरासोमवार 22 जून 2026भोजराम साहू 9893 765541 ग्राम तुएगोंदी- जामडी पाट में आयोजित सर्व आदिवासी समाज का पारंपरिक जमहा कोर्राम पाट देव जतरा शांतिपूर्ण, गरिमामय एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में आदिवासी समाज सहित विभिन्न समुदायों के लोग अपनी आस्था, परंपरा एवं पुरखा संस्कृति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने जतरा स्थल पहुंचे।छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष जनकलाल ठाकुर ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए एकत्रित हुआ था, न कि किसी प्रकार के विवाद या हिंसा के लिए। उन्होंने कहा कि समाज संविधान, कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है तथा अपने जल, जंगल, जमीन और पारंपरिक अधिकारों की लड़ाई शांतिपूर्ण एवं वैधानिक तरीके से लड़ता रहेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि एक पक्ष को व्यापक पुलिस सुरक्षा प्रदान करते हुए पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। समाज के लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर श्रद्धालुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों की आवाजाही बाधित की गई, जिससे लोगों में असंतोष की स्थिति बनी। https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/06/VID-20260621-WA0004.mp4छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने कहा कि जामडी पाट क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर भय का वातावरण निर्मित किया गया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपने संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित और जागरूक रहने की आवश्यकता है। हेमंत कांडे ने कहा कि आदिवासी समाज के वनाधिकार, जल-जंगल-जमीन तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। परंपराओं में हस्तक्षेप का आरोपसर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जतरा के अंतर्गत आयोजित पारंपरिक जल कैना कार्यक्रम के दौरान सिविल ड्रेस में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा हस्तक्षेप किया गया । समाज ने इसे अपनी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक अधिकारों में हस्तक्षेप बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। समाज का कहना है कि आदिवासी परंपराएं सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर हैं और उनमें अनावश्यक हस्तक्षेप न केवल सामाजिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि संवैधानिक रूप से संरक्षित सांस्कृतिक अधिकारों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।आस्था, संस्कृति और पुरखा परंपरा का महापर्वजतरा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। पारंपरिक पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक गतिविधियां पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ संपन्न हुईं। समाजजनों ने इसे अपनी पुरखा संस्कृति, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक बताया। आगा देव के आगमन की सूचना से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखा गया।छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने कहा कि आदिवासी समाज अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। संगठन ने शासन-प्रशासन से आदिवासी परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील एवं सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाने तथा सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है।Spread the lovePost navigationसरस्वती शिशु मंदिर में हर्षोल्लास से मनाया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, बच्चों ने दिखाए सूर्य नमस्कार और प्राणायाम । BSP समूह खदानों में 2 दिवसीय नेतृत्व विकास कार्यशाला शुरू, अधिकारियों को दिए गए टीम प्रबंधन के गुर..!