दल्ली राजहरा शुक्रवार 07अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

हस्ताक्षर साहित्य समिति दल्ली राजहरा के द्वारा महान साहित्यकार सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष में काव्य गोष्ठी का आयोजन निषाद समाज भवन में किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आचार्य जे आर महिलागे वरिष्ठ साहित्यकार एवं अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार ठाकुर ने किया । समिति के वरिष्ठ सदस्यों में शमीम अहमद सिद्दीकी ,सरिता गौतम मधु , गोविंद कुट्टी पाणिकर घनश्याम पारकर अमित दुबे प्रखर एवं दीपक कुमार मंडल उपस्थित थे । इस अवसर पर महान साहित्यकार कहानी कार एवं उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी के जीवन परिचय एवं कहानी को अपने शब्दों में सुनाकर उन्हें याद किया गया ।
साथ ही प्रमुख उनके उपन्यास का जिक्र भी किया गया आपको बता दें कि उनका जन्म 1980 को एवं उनकी मृत्यु 1936 को हुआ था । उनकी कथा एवं कहानी आम जीवन को दिखाते थे । जिनमें प्रमुख रूप से गोदान निर्मला अछूत कर्मभूमि जैसे उपन्यास है । महान गायक मोहम्मद रफी साहब को भी उनकी बेहतरीन गायकी के लिए उनकी पुण्यतिथि पर याद किए गए । साथ ही छत्तीसगढ़ के महान अंतर्राष्ट्रीय पंडवानी गायिका स्वर्गीय तीजन बाई को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई । तीजन बाई की महान विभूति रही जिन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत का मान सम्मान देश-विदेश तक बढ़ाया । वह पद्म विभूषण पद्मश्री पद्म विभूषण से सम्मानित रही उनकी मृत्यु छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है क्योंकि वे हमारे बीच अपनी पंडवानी गायिका के रूप में याद किए जाते रहेंगे । इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । 
इस काव्य गोष्ठी में सरिता गौतम मधु ने गजल प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने कहा की गीता और कुरान एक ही है सभी में प्यार है । इंसान को इंसान को समझाने की भावनाएं इसमें उद्वित किया गया है । 
 मैं ही गीता और मैं ही कुरआन हूं ,
प्यार से पढ़ लो मुझे इंसान हु ।
एक पहेली जग समझता है मुझे ,
देखने में किंतु मैं आसान हूं ।।
वही शमीम अहमद सिद्दीकी ने कृष्ण भक्ति मुक्तक सुनाया उन्होंने अपनी मुक्तक में कहा कि कृष्ण के प्रेम में मैं मदमस्त हो गया हूं । हे कृष्ण की मैं तुम्हारी मुरली बनू या गोकुल बन जाऊं या अर्जुन बन जाऊं या तुम्हारी प्रिय मित्र सुदामा बन जाऊं । किसी न किसी तरह मैं आपसे दूर होना नहीं चाहता ।
 तेरी मुरली का तराना बन जाऊं ,
तेरी गोकुल का फ़साना बन जाऊं ।
तेरा अर्जुन बनू या ना बनू,
 मैं तेरा सुदामा बन जाऊं ।।
संतोष कुमार सरल ने अपनी कविता में बताया कि कांच और हीरा दिखने में दोनों एक समान दिखते हैं दोनों की चमक ही वैसी रहती है लेकिन हीरे की परख जौहरी ही बता सकता है । उन्होंने अपने कविता में कहा 
सबका हक है सम्मान पर,
 जो देता है वह पता है ।
योग्यता हीरे की परख है ,
जो जौहरी ही बताता है ।।
दीपक कुमार मंडल ने मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास कर्मभूमि और रंगभूमि और उनकी ईदगाह की कहानी को अपनी कविता में समेटा है । आपको बता दें कि मुंशी प्रेमचंद की ईदगाह एक ऐसे मासूम बच्चे की कहानी है । जो मेला देखने के लिए मां के द्वारा दिए गए पैसे को व्यर्थ में ना खर्चा कर चिमटा खरीदता है । वह इसलिए की रोटी बनाते समय उनकी मां की हाथ जल जाया करती थी । बाकी अन्य मित्रों ने किसी ने हाथी तो किसी ने घोड़ा तो किसी ने सिपाही खरीदा जो घर आते तक टूट कर बिखर गया । कविता में उन्होंने बताया कि 
प्रेम आश्रम में बैठकर ,
 भारत देश की कर्मभूमि में ।
साहित्य की रंगभूमि सजाई ,
मां की ममता के लिए।
 ईदगाह के मेले से,
 चिमटा लेकर आए।।
जिसमें उन्होंने वर्तमान युग में जन्म देने वाल मां और पिता के प्रति बच्चों के भावनाओं को उन्होंने अपनी कविता में बताया कि मां पिता के जिंदा रहते तक कभी उनके बेटे उन्हें तीर्थ यात्रा नहीं कराते हैं और ना ही कभी गीता रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों के बारे में उन्हें बताते हैं जब उनकी मृत्यु हो जाती है तब उनके अस्थि को गंगा में ले जाकर विसर्जन करते हैं । गंगाजल उनके प्राण निकल जाने के बाद ही पिलाते हैं उन्होंने अपनी कविता में कहा।
 घनश्याम पारकर ने शुद्ध छत्तीसगढ़ी में अपनी प्रस्तुति दी 
जिसमें उन्होंने वर्तमान युग में जन्म देने वाली मां और पिता के प्रति बच्चों के भावनाओं को उन्होंने अपनी कविता में बताया कि मां पिता के जिंदा रहते तक कभी उनके बेटे उन्हें तीर्थ यात्रा नहीं कराते हैं और ना ही कभी गीता रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों के बारे में उन्हें बताते हैं जब उनकी मृत्यु हो जाती है तब उनके अस्थि को गंगा में ले जाकर विसर्जन करते हैं । गंगाजल उनके प्राण निकल जाने के बाद ही पिलाते हैं उन्होंने अपनी कविता में कहा।
 ददा दाई के चोला तरसे ,
तीरथ धाम नहीं पाए
  खरतरीया ओकर बेटा
 हाड़ा ला गंगा ले जाए 
गीता रामायण के नई करें 
कबहु तय बखान 
पान परसादी खही कहीं के 
जब निकलत हे प्राण।।
 वरिष्ठ कवि जे आर महिलागे ने अपनी कविता में कहा कि 
मानव में प्रेम ज्योति जला दो 
विश्व बंधुत्व की भावना भर दो 
प्रेम युक्त व्यवहार भरने दो 
तनाव औसाद दूर कर दो ।।
वही के पनिकर ने अपने कविता में कहा कि
 जो प्यार बांटना हो महावीर बुद्ध सा
महलों को छोड़कर कभी सड़कों पर आइए
जो प्यार बांटना चाहता  है 
 रोशनी की अगर दिल में आपके
 गोविंद आफताब सा खुद को जलाइए ।
अमित प्रखर ने अपनी कविता में कहा कि
गूंगे बहरों की है कौन यहां हम क्या बोले
 कुत्ते बिल्ली भेंड़ों की है कौन यहां हम क्या बोले ।
हम तुम बटते बिकते हैं हर रोज यहाँ हम क्या बोले ।।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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