दल्ली राजहरा बुधवार 26 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

          स्वावलंबन की ओर पहला कदम

 

शिक्षा का महत्व तभी सार्थक होता है जब छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिकता और जीविकोपार्जन का भी ज्ञान मिले। स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ यदि व्यावहारिक जीवन का ज्ञान मिलता है तो शिक्षा समाप्त होने के बाद छात्र सरकारी या प्राइवेट नौकरी के अलावा स्वावलंबन के लिए स्वयं रोजगार उत्पन्न कर सकेगा, साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा पाएगा। छात्र-छात्राओं के आसपास दैनिक जीवन में ऐसे कई विकल्प हैं जिसके जरिए जीविकोपार्जन के साधन उत्पन्न किए जा सकते हैं।

इसी उद्देश्य को लेकर वनांचल शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोडेकसा की शिक्षिका रेणुका साहू बच्चों को किताबी ज्ञान के अलावा अन्य विषयों पर भी जागरूक कर रही हैं। उनका मानना है कि शिक्षा को एक दायरे में बांधने के बजाय उसे व्यावहारिक जीवन में उतारा जाए।

 

धान, चावल, अनाज  , साबूदाना से बनाई 100 से अधिक आकर्षक राखियां

इसी क्रम में शिक्षिका रेणुका साहू द्वारा शाला के बच्चों को धान, चावल, साबूदाना, दाल और मोली धागा से राखी बनाना सिखाया गया। शाला के छात्र-छात्राओं ने 100 से भी अधिक राखियां बनाईं और उसकी बहुत सुंदर पैकिंग भी की, जिससे राखियां पूरी तरह से बाजार से खरीदी गई प्रतीत हो रही थीं।
बच्चों ने अपनी बनाई हुई राखियां ग्राम के सरपंच मैनलाल भूआर्य, भूतपूर्व सरपंच ओमकार ठाकुर तथा अन्य ग्रामीणजनों के साथ शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कोडेकसा के समस्त शिक्षकों एवं प्राचार्य बी.आर. भैसारे, आश्रम शाला कोडेकसा के समस्त शिक्षकों और प्राथमिक शाला के शिक्षकों को उपहार स्वरूप भेंट की।

 

शिक्षिका रेणुका साहू के मार्गदर्शन में बच्चों की इस सकारात्मक पहल पर सभी के द्वारा उनकी सराहना एवं अभिनंदन किया गया तथा बच्चों से राखियां खरीदी भी गईं, जिससे बच्चों को 800 रुपये का लाभ भी हुआ। इससे बच्चों में स्वावलंबन का गुण आया तथा अपनी बनाई राखियों से बच्चों ने शाला में रक्षाबंधन मनाया, जिससे उनमें बहुत ही उत्साह देखने को मिला।
प्रयोगात्मक और TLM आधारित शिक्षण पर विशेष ध्यान

 

शिक्षिका बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समय-समय पर अनेक कार्यक्रम करती रहती हैं। शिक्षिका शाला में प्रयोगात्मक एवं टीएलएम आधारित शिक्षण पर विशेष ध्यान देती हैं। शिक्षिका के मार्गदर्शन में बच्चों द्वारा अभी तक शाला में लगभग 25 पौधे लगाए गए हैं, जो अब पेड़ बन चुके हैं।

शिक्षिका का मानना है कि शिक्षा का मतलब सिर्फ पुस्तक का ज्ञान नहीं, बल्कि वह सब है जो बच्चों के लिए जीवनोपयोगी है तथा उन्हें समाज में सिर उठाकर खड़े होने की हिम्मत प्रदान करता है। निश्चित ही वनांचल के इस छोटे से स्कूल की यह पहल पूरे जिले के लिए प्रेरणा है।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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