दल्ली राजहरा बुधवार  9 सितम्बर 2026 भोजराम साहू 9893 765541

   गांव की परंपरा पर हमला है ,”समान नागरिक संहिता”

 

दुर्ग में आयोजित जन परामर्श बैठक में गरमाया माहौल, राजनांदगांव में अगली बैठक में बड़ी जुटान का आह्वान ।

 

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासी और सामाजिक पारा चढ़ने लगा है। राज्य सरकार द्वारा यूसीसी पर आम जनता और सामाजिक संगठनों से सुझाव लेने के लिए गठित समिति की बैठक सोमवार को दुर्ग जिले के लोक निर्माण विभाग के सभागार में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में बालोद जिले के प्रमुख सामाजिक संगठनों ने एक स्वर में यूसीसी का पुरजोर विरोध दर्ज कराया और इसे आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में लागू न करने की मांग की।

शासन द्वारा इस बैठक के लिए सभी आम जनता, सामाजिक, राजनीतिक और अन्य संगठनों को आमंत्रित किया गया था। जिम्मेदारी समझते हुए छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, बौद्ध महासभा दल्ली-राजहरा और बालोद आदिवासी महासभा के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में बैठक में पहुंचे और अपनी आपत्ति दर्ज कराई। बैठक के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब समर्थन में बोल रहे एक व्यक्ति का संगठनों ने विरोध किया।

 

भारत गांवों का देश है, परंपरा खत्म करने की कोशिश – जनक लाल ठाकुर

 

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत गांवों का देश है। गांव सिर्फ एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक सामाजिक और व्यक्तिगत समूह है, जो अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और अलिखित नियमों से चलता है। देश के हर जाति, धर्म और क्षेत्र की अपनी अलग परंपरा है, जिसे लोग समझते हैं और उसी के अनुसार अपना जीवन यापन करते हैं।
उन्होंने समिति के सामने तर्क रखा कि ऐसी स्थिति में ग्रामीण परंपरा की अवहेलना करके समान नागरिक संहिता जैसा कानून बनाना कहां तक उचित है। यह ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्रों में प्रशासन का सीधा हस्तक्षेप है। यदि यूसीसी लागू होती है तो गांव के रीति-रिवाज, विवाह, उत्तराधिकार, तलाक और संपत्ति बंटवारे जैसे मामले जो आज गांव में ही बड़े-बुजुर्गों की उपस्थिति में शांतिपूर्ण और आपसी समझौते से सुलझ जाते हैं, वह व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ जाएगी। सरकार इन मामलों को गांव से खींचकर कोर्ट-कचहरी तक ले जाना चाहती है। यह गांव के नियमों को स्थानीय लोगों से छीनकर व्यापारिक परंपरा में बदलने जैसा है, जो आदिवासी और प्रकृति से जुड़े लोगों के साथ खिलवाड़ है।

 

आदिवासी संस्कृति पर चोट, लिव-इन को बताया पाश्चात्य सभ्यता
वहीं आदिवासी समाज बालोद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी रूढ़िवादी और प्राचीन संस्कृति के अनुसार चलता है। हमारा अपना गोटुल, अपना मांझी, अपना नियम और कानून है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। सरकार इस कानून के माध्यम से हमारी इसी पहचान को खत्म करना चाह रही है, जिसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

 

बैठक के दौरान समिति द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप पर कानून बनाने की बात कहे जाने पर सभी संगठनों ने एकमत से इसे पाश्चात्य सभ्यता की व्यवस्था बताया। संगठनों ने कहा कि भारत जैसे सांस्कृतिक देश में लिव-इन जैसे मामले समाज को गर्त में ले जाएंगे और युवा पीढ़ी इससे बिगड़ रही है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
समिति पर पक्षपात का आरोप

 

मुक्ति मोर्चा ने यूसीसी के लिए गठित समिति पर गंभीर आरोप भी लगाया। मोर्चा का कहना है कि समिति अपने साथ यूसीसी का समर्थन करने वालों को लेकर चल रही है। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट समिति और बेमेतरा के एक व्यक्ति, जो स्वयं को वकील बताते हैं, को सभी के विरोध के बावजूद अलग से बोलने का मौका दिया गया ताकि लोगों को बरगलाया जा सके। उस व्यक्ति ने उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने का उदाहरण देते हुए कहा कि लागू हुए बिना मन में भ्रांति न पालें, एक बार लागू होने दें। इस बात को सुनकर सभी सामाजिक संगठनों ने जोरदार विरोध किया, जिसके बाद उस व्यक्ति को बैठाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार और गठित समिति सामाजिक संगठनों को बरगलाने के लिए लोगों को साथ लेकर चल रही है। दुर्ग-भिलाई के मुस्लिम समुदाय ने भी यूसीसी का विरोध जताया है।

 

राजनांदगांव बैठक के लिए आह्वान

 

अंत में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने आह्वान किया कि राजनांदगांव में होने वाली समिति की अगली बैठक में सभी सामाजिक संगठनों को बढ़-चढ़कर पहुंचना चाहिए और इस कानून को पारित होने से रोकने के लिए अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। दुर्ग की इस बैठक में बौद्ध महासभा से हेमंत कांडे सहित दल्ली-राजहरा से पहुंचे सभी सामाजिक संगठनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विरोध दर्ज किया।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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