दल्ली राजहरा बुधवार 14 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 (नोट _उपरोक्त आकड़े सिर्फ दर्ज 9 मंदिरों के हैं अन्य जगहों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए हैं! ) हिंदू संस्कृति में शक्ति आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि, लौह नगरी दल्ली राजहरा में पूरे आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नगर के 9 प्रमुख मंदिरों में इस वर्ष कुल 1248 मनोकामना ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/10/video_20261013_191546.mp41. नगर देव राजहरा बाबा मंदिर – कुल 204 कलश (6 घी, 198 तेल)नगर के सबसे प्रसिद्ध नगर देव राजहरा बाबा मंदिर में ज्योति कलश की शुरुआत आज से 41 वर्ष पूर्व 1985 के आसपास मंदिर के पूर्व पुजारी स्व. देवगिरी बाबा द्वारा की गई थी। यह मंदिर अनेक देवी-देवताओं का संगम है। यहां महादेव, बजरंगबली, मां दुर्गा, मां शीतला, भगवान विश्वकर्मा, मां पाताल भैरवी, मां दंतेश्वरी, वासुदेव कृष्ण एवं शनि देव के मंदिर स्थापित हैं। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने पर मन्नत पूरी होती है और भक्त यहां अपना आराध्य मंदिर बनवाते हैं।2. मां दुर्गा मंदिर, रेलवे कॉलोनी – कुल 470 कलश (82 घी, 388 तेल)सबसे ज्यादा ज्योति कलश इसी मंदिर में स्थापित हैं। मंदिर के पुजारी गौकरण यादव ने बताया कि यहां 34 वर्ष पूर्व 1992 से ज्योति कलश स्थापित हो रहे हैं। यह मंदिर आस्था का बड़ा प्रतीक है। परिसर में मां दुर्गा के साथ पवन पुत्र हनुमान और भगवान शिव के विशाल मंदिर हैं। भक्तों की भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे नगर में याचकों की सबसे ज्यादा भीड़ यहीं लगती है।3. झरन दल्ली खदान पहाड़ी मंदिर – कुल 258 कलश (58 घी, 200 तेल)इस मंदिर की स्थापना की कहानी बड़ी रोचक है। खदान के पूर्व कर्मचारी कृपाराम ने बताया कि 70 के दशक में जब पहाड़ी पर लौह अयस्क का खनन होता था, तब शांति लाल जैन प्रमुख ठेकेदार थे। अयस्क से भरी गाड़ियां अपने आप पहाड़ी से नीचे गिर जाती थीं, जिससे जान-माल का नुकसान होता था। तब श्रमिकों, अधिकारियों और ठेकेदारों ने जन-हानि से बचने के लिए मां दुर्गा की स्थापना की थी। 1980 में यहां 1-2 कलश से शुरुआत हुई थी, जो आज बढ़कर 258 हो गई है। यहां से एक तरफ पूरा दल्ली राजहरा और दूसरी तरफ मनोरम पहाड़ी का दृश्य दिखता है। 4. झरन माता मंदिर, पुराना बाजार – कुल 55 कलश (9 घी, 46 तेल) मंदिर के व्यवस्थापक एवं वरिष्ठ पत्रकार रमेश मित्तल ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना के बाद सन 2007 में चैत्र नवरात्रि से ज्योति कलश की परंपरा शुरू हुई। यहां दोनों नवरात्रि में कलश स्थापित किए जाते हैं। 5. गायत्री शक्तिपीठ – 1 सार्वजनिक कलशविश्व शांति, मनुष्य में देवत्व के उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण की कामना को लेकर यहां सार्वजनिक रूप से एक ही ज्योति कलश स्थापित किया जाता है। व्यवस्थापक हीरालाल पवार ने बताया कि हरिद्वार शक्तिपीठ के आदेशानुसार यहां एक ही कलश की अनुमति है। 6. मां दंतेश्वरी मंदिर, हल्बा समाज टाउनशिप – कुल 61 कलश (13 घी, 48 तेल)जलाराम मंदिर के पास स्थित इस मंदिर का संचालन हल्बा समाज द्वारा किया जाता है। यहां 2006 से ज्योति कलश स्थापित हो रहे हैं। प्रतिदिन संध्या माता सेवा का आयोजन होता है।7. मां शीतला मंदिर, रेलवे स्टेशन – कुल 42 कलश (1 घी, 41 तेल)पुजारी नंदकुमार पटेल ने बताया कि यह मंदिर 41 वर्ष से अधिक पुराना है और यहां भी उतने ही समय से ज्योति कलश स्थापित हो रहे हैं।8. मां शीतला मंदिर, पावर हाउस वार्ड 14 – कुल 19 कलशस्थानीय हीरालाल साहू एवं रमन यादव ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना 1972 के आसपास खदान श्रमिकों द्वारा की गई थी। यहां वार्ड 14, 15, 16, 17 के लोग पूजा करने आते हैं।9. नवजोत शीतला माता मंदिर, सुभाष चौक – कुल 138 कलश (29 घी, 109 तेल)अध्यक्ष विजय कुमार साहू ने बताया कि यहां 1987 से ज्योति कलश स्थापित किए जा रहे हैं। नवरात्रि के समाप्ति पर विशाल भंडारा का आयोजन किया जाता है सनातन धर्म में मां दुर्गा के प्रति दीवानगी क्या होती है, इसे देखना है तो दल्ली राजहरा के इन मंदिरों में आकर छत्तीसगढ़ी भाषा में हो रही माता सेवा को जरूर देखें, जहां ढोल की थाप पर भक्त थिरकने लगते हैं। Spread the lovePost navigationबजरंग चौक वार्ड 11 की महिलाओं के बुलावे पर पहुंचे नपा अध्यक्ष तोरण लाल साहू: पेयजल, सड़क और बिजली की समस्याओं का किया अवलोकन, जल्द निराकरण का दिया आश्वासन । NIDJAM 2026: बालोद में नेशनल इंटर डिस्ट्रिक्ट जूनियर एथलेटिक्स के लिए ट्रायल संपन्न, 13 होनहारों का चयन, हैदराबाद में दिखाएंगे दम ।