दल्ली राजहरा

शुक्रवार 13 दिसंबर 2024

दल्ली राजहरा 98937 65541

जगद्‌गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका वृन्दावन वासिनी परम पूज्या श्रीश्वरी देवी के द्वारा दिनांक 23 दिसंबर 2024 से 5 जनवरी 2025 तक प्रतिदिन शाम 5:30 से 7:30 तक बीएसपी हॉस्पिटल सेक्टर मैदान सृजन ग्राउंड वार्ड नंबर 8 दल्ली राजहरा के मैदान में जगद्गुरु कृपाल संकल्या समिति दल्ली राजहरा के द्वारा आयोजित की जा रही है l श्रीर्श्वरी देवी जी का प्रवचन वेद, गीता, रामायण, भागवत इत्यादि समस्त धर्मग्रंथों के प्रमाणों से युक्त होता है, जिसमें अनेक परस्पर विरोधी गुढ़ तात्विक सिद्धांतो का समन्वय रहता है l जिससे आप समस्त सांसारिक कार्यों को करते हुये इस घोर कलयुग में सरलता से ईश्वर प्राप्त कर सकें।

प्रवचन का प्रमुख विषय रहेगा l

मानव देह का महत्व क्या है?,जीव का परम-चरम लक्ष्य क्या है?,जीव का परम-चरम लक्ष्य कैसे प्राप्त होगा ? ,ईश्वर का स्वरूप क्या है?, क्या हम ईश्वर को देख, जान, सोच-समझ एवं प्राप्त कर सकते है? ,भगवत्कृपा किसे कहते है? वह किस पर होती है? अभी तक हमें ईश्वर प्राप्ति क्यों नहीं हुई ?, भगवत् शरणागति का रहस्य क्या है?, संसार का वास्तविक स्वरूप क्या है? वैराग्य किसे कहते है? संसार से वैराग्य कैसे होगा ?, गुरू या महापुरूष किसे कहते है? क्या के बिना ईश्वर प्राप्ति संभव है?, महापुरूषों के धर्म विरूद्ध आचरणों का रहस्य क्या है? ईश्वर प्राप्ति के कौन-कौन से मार्ग है? ,क्या कर्म-धर्म से ईश्वर प्राप्ति संभव है? ,क्या ज्ञान के द्वारा ईश्वर प्राप्ति संभव है? क्या भक्ति भगवान से मिल सकती है? , भक्ति तत्व का क्या रहस्य है? भगवान का ध्यान कैसे करें ? ,गृहस्थ में रहते हुये भगवान की प्राप्ति का सर्वसाध्य सुगम एवं सरलतम उपाय क्या है ?

पूज्यनीय श्रीश्वरी देवी विश्व के पंचम मूल जगद्‌गुरू भक्तियोग रसावतार भगवद् अनंत श्री विभूषित 1008 स्वामी श्री कृपालुजी महाराज की परमप्रिय शिष्या है l पूज्यनीय श्रीश्वरी देवी के सरल, सारगमित प्रवचनों ने लाखों दिग्भ्रमित ज्ञानपिपासु जीवों को अपने गुरूवर द्वारा बताये अति सुगम साधना पथ का मार्ग दर्शन करके भगवद् प्राप्ति और प्रेम की ओर सहज ही प्रेरित किया है। वे बाल्यकाल से आध्यात्म के प्रति प्रबल अनुराग रही किन्तु भौतिकी में स्नातकोत्तर के अध्ययन के अंतिम दिनों अप्रैल 2005 में जगद्‌गुरू स्वामी श्री कृपालु जी महाराज के सानिध्य में आयी और अक्टूबर 2007 में महाविद्यालयीन शिक्षा MSC, M.Fill उपरांत गुरुधाम में वास करने लगी। जहाँ महाराज जी ने इनको आध्यात्म वास्तविक ज्ञान के प्रचार का दायित्व सौंपा। वे अल्पकाल में ही गुरू प्रदत्त समस्त शास्त्रो-वेदो के ज्ञान को आत्मसात कर लिया। तब 8 मार्च 2009 को गुरूवर ने इनको दिव्य नाम एवं दिव्य वस्त्र प्रदान किया। तब से वे अनवरत् प्रवचनों द्वारा उस ज्ञान को आध्यात्म प्रेमी एवं ज्ञान-पिपासु जीवों में बांट रही हैं।

Spread the love
Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

error: Content is protected !!