दल्ली राजहरामंगलवार 02 जून 2026भोजराम साहू 9893 765541दल्ली राजहरा शहर का प्रशासनिक और न्यायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला जेडी ऑफिस परिसर, जिसे स्थानीय लोग “पावर हब” के नाम से जानते हैं, आज खुद मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। परिसर में स्थित विभिन्न कार्यालयों में प्रतिदिन सैकड़ों न्यायार्थी, पक्षकार, अधिवक्ता और कर्मचारी पहुंचते हैं, लेकिन यहां पेयजल, स्वच्छ शौचालय, पार्किंग, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है।इस परिसर में व्यवहार न्यायालय, एसडीएम/सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय, उप तहसील कार्यालय, राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी कार्यालय, उप कोषालय तथा सेवा सेतु केंद्र संचालित हैं। इसके कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए यहां पहुंचते हैं।जानकारी के अनुसार यह भवन मूलतः भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के राजहरा माइंस प्रबंधन द्वारा प्रशासनिक कार्यों की देखरेख एवं संचालन के लिए निर्मित कराया गया था। बाद में राजहरा माइंस के लिए नया प्रशासनिक भवन बनने के पश्चात उक्त भवन जिला प्रशासन को प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों के संचालन हेतु हस्तांतरित कर दिया गया है। वर्तमान में परिसर में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।चारों ओर बदहाली का आलमजेडी ऑफिस परिसर में प्रवेश करते ही बदहाली साफ नजर आती है। परिसर के चारों ओर गंदगी का आलम है। शौचालयों से उठती दुर्गंध, आसपास फैला कचरा और बजबजाती नालियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। न्यायालय और प्रशासनिक कार्यालयों में आने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमराईनगर पालिका द्वारा कुछ वर्ष पूर्व लगाया गया वाटर कूलर देखरेख के अभाव में खराब होकर अनुपयोगी हो चुका है। इसके चलते दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों, न्यायार्थियों तथा कर्मचारियों को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।शौचालयों की स्थिति दयनीयपरिसर के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है। कई नल टूटे हुए हैं तथा साफ-सफाई का अभाव बना हुआ है। शौचालयों के भीतर प्लास्टिक की बोतलें पड़ी हुई हैं, जबकि परिसर में शराब की खाली शीशियां मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। महिला न्यायार्थियों और महिला अधिवक्ताओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।महिलाओं के लिए कॉमन रूम का अभावपरिसर में महिला अधिवक्ताओं और विभिन्न कार्यों से आने वाली महिलाओं के लिए कॉमन रूम की व्यवस्था नहीं है। छोटे बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं को बच्चों की देखभाल और स्तनपान जैसी आवश्यक जरूरतों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाता। महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि कॉमन रूम और बेहतर शौचालय व्यवस्था की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही है।पार्किंग व्यवस्था जर्जर, बैठने की भी नहीं सुविधाप्रतिदिन बड़ी संख्या में न्यायार्थी, पक्षकार और ग्रामीण अपने प्रकरणों के सिलसिले में परिसर पहुंचते हैं, लेकिन उनके बैठने की समुचित व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। सुनवाई या कार्यालयीन कार्यवाही के दौरान लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में फरियादियों को कभी धूप में तो कभी पेड़ों की छांव में खड़े होकर समय बिताना पड़ता है।पार्किंग व्यवस्थाभी पूरी तरह अव्यवस्थित है। पूर्व में पार्किंग के लिए चिन्हित स्थान का उपयोग अब अन्य कार्यों में होने लगा है, जिसके कारण वाहनों को परिसर में इधर-उधर खड़ा करना पड़ता है और आवागमन प्रभावित होता है।सुरक्षा व्यवस्था भी रामभरोसेपरिसर में सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था नहीं है। कुछ स्थानों पर बाउंड्रीवाल क्षतिग्रस्त है और मुख्य प्रवेश द्वार भी अधिकांश समय खुला रहता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि रात्रि के समय परिसर में असामाजिक तत्वों की आवाजाही देखी जाती है, जिसके प्रमाण के रूप में परिसर में पड़ी शराब की खाली बोतलें देखी जा सकती हैं।पूर्व में कलेक्टर ने किया था निरीक्षणअधिवक्ता इसराइल शाह, मनोज कुमार, पवन गोयल, राकेश द्विवेदी, पीतांबर रावटे, जागेंद्र भारद्वाज, हिमानी पांडे, एच.डी. डिसूजा, सुनील नंदी एवं मनोज प्रताप सिंह ने बताया कि अधिवक्ताओं की शिकायत पर पूर्व में कलेक्टर ने स्वयं जेडीऑफिस परिसर का निरीक्षण किया था तथा समस्याओं के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया था। इसके बाद कई बार अधिकारियों से भी शिकायत की गई। इसके बावजूद वर्षों बाद भी पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, पार्किंग, कॉमन रूम और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।अधिवक्ताओं का कहना है कि जिस परिसर में लोगों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया संचालित होती है, वहीं मूलभूत सुविधाओं का अभाव होना चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन एवं संबंधित विभागों से पेयजल, स्वच्छ शौचालय, महिला कॉमन रूम, पार्किंग, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने की मांग की है।Spread the lovePost navigation“तुएगोदी क्षेत्र में आदिवासी वनाधिकारों 2006 का हनन, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग..!” – छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा 2-3 जून 1977 के शहीद मजदूरों की स्मृति में निकली बाइक रैली, शहर में गूंजा संघर्ष और शहादत का संदेश..!