दल्ली राजहरा
बुधवार 03 जून 2026
भोजराम साहू 9893 765541

 

ये शहीदों लाल सलाम, मां अनुसूया, जगदीश भैया, गुहा नियोगी लाल सलाम`… आज दल्ली राजहरा की फिजा में लाल सलाम के गगनभेदी नारे गूंज उठे। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने 2-3 जून 1977 के खूनी गोलीकांड में शहीद हुए 11 मजदूरों के 49वें शहादत दिवस पर शहीद स्तंभ और शहीद बेदी पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। 

2 जून 1977 की वो खूनी रात: क्यों हुई थी शहादत  
आज से 49 साल पहले दल्ली राजहरा खदान के मजदूर झुग्गी मरम्मत के लिए ₹100 की मांग कर रहे थे। 31 मई 1977 को समझौता हुआ, मगर 1 जून को ठेकेदार मुकर गया। शहीद शंकर गुहा नियोगी के नेतृत्व में 10000 हजार  से 12000 मजदूर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। 2-3 जून की रात 2:45 बजे पुलिस ने नियोगी जी को जबरन उठा लिया और प्रदर्शन स्थल पर अंधाधुंध गोली चला दी। बालक सुदामा समेत 11 लोग शहीद हो गए – अनुसूईया बाई, जगदीश, टीभु राम, सोनउराम, रामदयाल, पूनउराम, समारू राम, हेमनाथ, डेहर लाल और जय लाल।

श्रद्धांजलि सभा: शहीदों के रास्ते पर चलना होगा । 
सुबह 11 बजे वीर नारायण सिंह और शंकर गुहा नियोगी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से कार्यक्रम शुरू हुआ। 11 शहीदों के स्तंभ और बेदी पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। सांस्कृतिक टीम ने कॉमरेड फागू राम के गीतों से शहीदों को नमन किया। शहीद अस्पताल की टीम ने युद्ध से होने वाले नुकसान पर जनजागरूकता कार्यक्रम दिया। महामंत्री रामचरण नेताम ने संचालन किया।
 वक्ताओं ने क्या कहा 
1. जनक लाल ठाकुर: मोर्चा के सभी कार्यकर्ता, गांव से आए सभी साथियों का आभार व्यक्त किया। कहा – छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा लगातार सभी जनवादी आंदोलनों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस तानाशाही सरकार के खिलाफ हमे मिलकर लड़ना होगा। हमे शहीदों के बताए मार्ग पर चलना होगा। आज नहीं तो कल हम सफल जरूर होंगे। जामडी पाट का आंदोलन केवल आदिवासियों का नहीं, जल जंगल जमीन को बचाना सभी की जिम्मेदारी है। हमने तात्कालिक समस्याओं को 2 जून को SDM को ज्ञापन सौंपा है। अगर विचार नहीं किया जाएगा तो उग्र आंदोलन करने को हम बाध्य होगें`।
2. सोमनाथ उइके, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ: 31 मई 1977 में मजदूर दूसरे यूनियन में थे। उन मजदूरों ने यूनियन के चालों को समझ कर काफी सूझ बूझ के साथ, नियोगी जी के दिशा निर्देश में श्रम कानून के तहत बोनस की मांगों को लेने के लिए आंदोलन हुआ था। इस दौरान मजदूर आंदोलन की चिंगारी पूरे देश में फैल गई। आज किसानों और मजदूरों को दबाया जा रहा, उनके अधिकारों को छीना जा रहा है`।

3. डॉ. शैबाल जाना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी शहीद अस्पताल: प्रधानमंत्री चुनाव से पहले और चुनाव के बाद अलग अलग बात करता है। 49वीं शहादत दिवस के अवसर पर 70 साल से ऊपर के सभी मोर्चा के साथियों का IPD और OPD इलाज फ्री रहFile Edit View Insert Format Tools Tableने की घोषणा करता हूं`।

4. शैलेश बम्बोडे: सभी लड़ाकू साथियों का धन्यवाद जिन्होंने 1977 के आंदोलन में हिस्सा लिया। 1977 में श्रमिक संघ का उदय हुआ। 2 महीने बाद संगठन पर गोली चली। शासन-प्रशासन ने इसकी ताकत का अंदाजा लगा लिया था। नियोगी जी को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी की आड़ में राजहरा के श्रमिकों पर गोली चलाई गई। आज भी हमारा संगठन संघर्षरत है`।

5. नवाब जिलानी, डौंडीलोहारा: सभी शहीद साथियों को लाल जोहार। उद्योगपति के तलवा चाटने वाले लोगों को पता था अभी इसे नहीं रोका गया तो उन्हें समस्या होगी। बीजेपी सरकार जब-जब देश में आई मजदूर-किसानों पर आक्रमण किया। महंगाई, बेरोजगारी चरम है। युवा त्रस्त होकर कॉकरोच जनता पार्टी बना रहे। सरकार युवा साथियों को कॉकरोच कह रही है। हमारे भारत के अंदर भी तख्ता पलट होगा। संगठन में शक्ति है`।
6. कला दास डहरिया: गीत के माध्यम से श्रद्धांजलि दी – कुर्सी तोड़ने वाले तूने क्या बनाया है`। कहा – लगातार सरकार द्वारा आदिवासी इलाकों बस्तर क्षेत्र में दमनकारी नीतियां बनाई जा रही हैं, जिसके खिलाफ हमारा संगठन आज भी मजबूती से खड़ा हुआ है`।
7. प्रेम नारायण वर्मा: 1977 में हमारे 11 साथी अपनी जान गवाई। आज की बीजेपी सरकार वही पार्टी है जो सुंदर लाल पटवा के नेतृत्व में नियोगी जी की हत्यारी है`।

8. सौरा यादव, जन संघर्ष: आज 49 साल बाद भी इस एरिया की हालत बद से बदतर हो रही है। ठेका मजदूरों की स्थिति बहुत ही खराब है। मजदूरों के खिलाफ सरकार 4 श्रम संहिता लाई है, लेकिन सरकार लागू करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही है। माओवादी बोलकर आदिवासियों के साथ अन्याय किया जा रहा है`।

9. घसनीन, पूर्व महिला अध्यक्ष: हमको आज भी ये गोलीकांड कल जैसा प्रतीत होता है। उद्योगपति, ठेकेदारों के मन में मजदूरों की मांग चुभने लगी थी। नियोगी जी ने लड़ने और आगे बढ़ने के लिए हमे प्रेरित किया`।

10. सुरेन्द्र साहू: आज हम राजहरा के महापुरुषों को याद कर रहे हैं। नवयुवक साथियों को जागना होगा। मोर्चा और श्रमिक संघ अधिकार का रास्ता दिखा रहा है। शहीदों के रास्ते पर हमे अमल करना है`। 

11. प्रसाद राव, जन संघर्ष मोर्चा: जो हालत आज देश में बनी हुई है, मजदूरों-किसानों के आंदोलनों को कुचलने की कोशिश कर रही है। आज ये तानाशाही सरकार देश को लूटने के लिए बनी है। ये हत्यारों की सरकार है`।

12. गेंद सिंह ठाकुर, जिला किसान संघ बालोद अध्यक्ष:* कॉमरेड नियोगी जी के नेतृत्व में श्रम कानून के तहत संघर्षरत थे। शासन-प्रशासन ने उन्हें दबाने का प्रयास किया`।

13. सावित्री जगनायक, महिला अध्यक्ष: जब-जब बीजेपी सरकार आई तब-तब मजदूरों, किसानों और लाल हरा परिवारों को दबाने की कोशिश करती है`।
14. तेज राम विद्रोही: तानाशाही रवैया अपनाते हुए जो मजदूरों पर गोली चलाई उन सभी शहीदों को भारतीय किसान संघ की ओर से लाल सलाम। 1977 से लेकर अभी तक दमन के खिलाफ लड़ाई जारी है। लगातार प्रकृति ने अपना रुख बदला है। जंगलों की कटाई से परिवर्तन हो रहे हैं। वहीं सरकार लाखों पेड़ काटकर एक पेड़ मां के नाम` का दिखावा कर रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने के लिए जानबूझ कर सप्लाई रोक दी गई और अब कीमत बढ़ाने पर कहीं भी पेट्रोल-डीजल की किल्लत नहीं`।

15. सुखलाल साहू: जिन उद्योगपतियों ने सरकार के साथ मिलकर नियोगी जी की हत्या करवाई वे खुद आज मर रहे हैं। भिलाई आंदोलन आज भी सुप्रीम कोर्ट में है। हमारी जीत तय है। मजदूरों के अधिकार मिलकर रहेंगे`।

16. बसंत साहू: सुप्रीम कोर्ट और सरकार युवाओं को कॉकरोच और मजदूरों को कीड़ा-मकोड़ा समझ रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा को पत्र लिखने को मजबूर है। भिलाई आंदोलन के मजदूरों से मध्यस्थता करना चाह रहा है`।

17. घना राम साहू: इस पावन भूमि में शहीद हुए सभी शहीदों को नमन करता हूं। निश्चित रूप से हमे शहीदों के रास्ते में चलने की जरूरत है। बेरोजगार, किसान, मजदूरों, जल-जंगल-जमीन का शोषण हो रहा है`।

18. हेमंत कांडे: देश में जितने भी महापुरुष हुए जिनकी बदौलत हमे जीने का अधिकार मिला, आज देश की हालत 1977 जैसी है। आज भी शासन-प्रशासन और कॉरपोरेट घरानों का गठबंधन चल रहा है। इन गठबंधनों के खिलाफ हमे लड़ना होगा। आज अगर आप नहीं लड़ोगे तो इससे बदतर हालात होने वाली है`।

 

19. तुलसी राम मरकाम: इसी प्रांगण से हमारी राजनीतिक, सामाजिक और शिक्षा जीवन की शुरुआत हुई है। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। सभी को संघर्ष के रास्ते में आना होगा। देश में लगातार सरकार दमनकारी नीतियां बना रही है। माताओं से निवेदन है बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। मजदूरों के आंदोलनों से सीखना होगा। आने वाले दिन में आंदोलन की गति बढ़ेगी। संघर्ष और निर्माण का जीत जागता सबूत शहीद अस्पताल हमारे सामने खड़ा है`।

20. मुरारी प्रजापति: आम मतदान करने वालों का कितना अधिकार है ये लोगों को सोचना होगा। एक आम व्यक्ति का अधिकार प्रधानमंत्री नियुक्त करता है। हमे सोचना और विचार करना चाहिए। हमे संकल्प लेना होगा कि संगठन कैसे मजबूत होगा`।

शहीद मरते नहीं अमर हो जाते हैं` – नियोगी जी 
शहीद शंकर गुहा नियोगी कहते थे – शहीद मरते नहीं अमर हो जाते हैं। इनकी शहादत ने हमारे लिए संघर्ष का रास्ता खोल दिया है। निर्माण के लिए संघर्ष और संघर्ष के लिए निर्माण – जब तक आप इनमें सामंजस्य नहीं बनाएंगे तब तक अधिकार नहीं पा सकते`।

कार्यक्रम में रायपुर से सुखलाल साहू, दिलीप वर्मा, डौंडीलोहारा से नवाब जिलानी, जिला किसान संघ बालोद अध्यक्ष गेंदसिंह ठाकुर, मुरारी प्रजापति, लीलाधर ढाले, सुरेश, डौंडी, भिलाई, जामुल, राजनांदगांव, तेडेसरा, जन संघर्ष से सौरा यादव, सीटू ट्रेड यूनियन से क्षत्रिय, पुरुषोत्तम सिमाइया समेत आसपास के सभी कार्यकर्ता शामिल हुए। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके, कोषाध्यक्ष राजाराम बरगद, संगठन मंत्री तुलसी कोला, सुरेन्द्र साहू, मोहन, शैलेश बम्बोडे, हेमंत कांडे जी, नियोगी जी के सभी सिपाही एकत्रित हुए। शहीद अस्पताल से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैबाल जाना, बिहारी लाल ठाकुर और सभी कर्मचारी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। संस्कृतिक टीम से संतु सारथी, प्रेम साहू, देव भंडारी, नारायण यादव, रोमिन यादव, राहुल गंधर्व, पन्ना साहू ने गीत-संगीत के माध्यम से शहीदों की कुर्बानी को याद किया।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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