दल्ली राजहरारविवार 28 जून 2026भोजराम साहू 9893 765541लौह नगरी दल्ली राजहरा की कहानी को तीन हिस्से में बाटते हैं ।पहले दल्ली राजहरा की शुरुआत कैसे हुई सुविधा यहां कैसे बढ़ती गई अब मध्य अवस्था कैसा था और आज वर्तमान किस स्थिति से गुजर रहा हैं । प्रारंभ दल्ली राजहरा अनुपम खूबसूरती विभिन्न किस्म के पेड़ पौधे और जंगलों के बीच बसा सुंदर शहर जहां इस शहर को सात (सप्त) पहाड़ ( गिरी) घेर कर रखा हुआ है । जिसके कारण शहर के उद्यान का नाम सप्तगिरि पार्क रखा गया । इस शहर में जमीन से निकलती अनवरत जलधारा है तो आसपास विशाल बांध की खूबसूरती आपको देखने मिल जाएगी । आप पहाड़ी के ऊपर से मनमोहक नजारा देख सकते हैं शहर से कुछ 22 किलोमीटर दूर मां महामाया की शक्तिपीठ है तो पास ही कुमुर कट्टा की पहाड़ी पर मां शारदा विराजमान है ऊंचाई ऐसी है कि एक तरफ तो आपको बोडी डेम का सैकड़ो फीट नीचे खाई नजर आएगी तो दूसरी ओर 7 गांव का तालाब दूर धुँधला नजर आते हैं ऐसा मनमोहक शहर है दल्ली राजहरा । यह छोटा सा शहर जहां हिंदू मुस्लिम सिख और ईसाई एक साथ भाईचारे की तरह एकता बना कर रहते हैं । सभी एक दूसरे के त्योहारो पर एक दूसरे को बधाई देने के साथ-साथ आनंद भी लेते हैं । इस शहर में आपको मंदिर मस्जिद चर्च और गुरुद्वारा भी मिलेंगे । 1984 के दंगों से शहर पूरी तरह अछूता रहा ।जिसका बड़ा मिसाल आपसी भाईचारा था । आपको बता दें कि नगर के सबसे प्रसिद्ध साहित्यकार मातृशक्ति डॉक्टर शिरोमणि माथुर की पुस्तक मेरा दल्ली राजहरा में उन्होंने लिखी है कि सन 1900 के आसपास भारतीय भू वैज्ञानिक प्रथम नाथ बोस ने यहां लौह अयस्क खदानों की खोज की थी । यह पहाड़ी क्षेत्र वनों और जंगली जानवरों से भरपूर था । आसपास की जमीन दलदली थी जिसके कारण इस क्षेत्र का नाम दल्ली पड़ा । उन्होंने बताया कि राजहरा बाबा का नाम पहले राजाराव था बाद में राजहरा बाबा पड़ा । यहां आस-पास आदिवासियों की टोली रहते थे उनका जीवन सरल सभ्यता से दूर था शिक्षा का विस्तार उन तक नहीं था । कुछ आदिवासी की टोली यहां के पत्थरों को पिघलाकर लोहा बनाने व उनसे अस्त्र-शस्त्र औजार ,जीवन उपयोगी सामान बनाने के काम करते थे । मतलब वे यहां के पत्थरों से औजार कृषि उपयोगी सामान बनाने का काम करते थे । जिसकी अधिकारिक रूप से यहां के लौह अयस्क भंडार को प्रथम बार 1887 में अंग्रेज सरकार के अधीनस्थ भारतीय भू सर्वेक्षण विभाग के भारतीय वैज्ञानिक प्रथम नाथ बोस के नेतृत्व में लोगों के सामने लाया गया । 1960 में तत्कालीन सरकार की अनुमति से टाटा कंपनी ने फिर से सर्वेक्षण किया जिससे लौह अयस्क खदान की पुष्टि हुई । देश के स्वतंत्र होने के बाद 1957 में सोवियत रूस के साथ अनुबंध करके भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना की योजना बनी । 1953 _54 में नागपुर के अधिकारी व कर्मचारियों ने बी मुखर्जी के नेतृत्व में सर्वे किया ।1958 तक बीएसपी के अधिकारियों ने बहुत बड़ा भूभाग व माइंस क्षेत्र बीएसपी के लिए सुरक्षित कर लिया । और राजहरा में लौह अयस्क निकालने का काम चालू हुआ जहां प्रमुख रूप से स्वर्गीय मनोहर लाल जैन जैसे ट्रक मालिकों के माध्यम से लौह अयस्क निकालकर भिलाई स्टील प्लांट पहुंचाने का काम शुरू हुआ था । जहां 10000टन के ऊपर का आर्डर दिए जाते थे । पत्थरों को तोड़ने छह चक्कर ट्रैकों में माल चढ़ाने उतारने मालगाड़ी में लोड होने तक सभी काम मजदूरों के द्वारा होते थे । जिसमें जैन ब्रदर्स कंपनी मनोहर लाल जैन नेमीचंद जैन अनूप जैन इंद्र जैन और चौरसिया ब्रदर्स ये सब कंपनी के माध्यम से उत्खनन व परिवहन का कार्य होता था ।सुविधाओं की थी कमीबताते हैं कि उसे समय दल्ली राजहरा में कोई दुकान नहीं था । लोग सामान खरीदने के लिए कुसुम कसा जाया करते थे । दल्ली राजहरा में प्रथम दुकान पुराना बाजार में 1959 में संपत लाल जैन कुसुम कसा निवासी ने खोली थी । जहां राजहरा का प्रथम क्लीनिक दवा खाना डॉक्टर आनंद दासानी ने खोला था । 1958 में राजहरा में टाउनशिप बना 1959 में रविंद्र ग्रंथालय बना तथा शहर का सर्वप्रथम दुर्गा पूजा भी इसी समय 1959 में चालू हुआ था । लौह अयस्क को भिलाई पहुंचने के लिए रेल पटरी बिछाई गई । जहां भाप इंजन के माध्यम से लौह अयस्क मालगाड़ी के माध्यम से भिलाई पहुंचाई जाती थी । जब राजहरा का निर्माण हो रहा था तो सबसे बड़ी बात आई लोगों को रहने के लिए क्वार्टर बनाने के लिए जहां अधिकारी वर्ग के लिए क्वार्टर प्रशासनिक भवन कर्मचारियों के लिए रहने के लिए भी व्यवस्था करना बीएसपी प्रबंधन के लिए बहुत बड़ी चुनौती था । तब उस समय राजहरा के विश्वकर्मा बन कर आये थे नामदेव।दल्ली राजहरा के प्रथम कॉलोनी नामदेव कॉलोनीक्या आप जानते हैं नामदेव कॉलोनी का निर्माण किसने किया था ..?शायद बहुत कम ही लोगों को मालूम होगा । आपको बता दें कि नामदेव कॉलोनी का निर्माण बुद्धवासी नामदेव कांबले, कांबले गैस एंड डेमोक्रेटिक एंप्लाइज के संस्थापक बुद्ध वासी शिवदास कामले एवं वर्तमान में संचालक सतीश कांबले के दादाजी के द्वारा किया गया था । उन्होंने जब दल्ली राजहरा में कदम रखा तो उनके द्वारा या पहले कॉलोनी बनाई गई उनका एक कंस्ट्रक्शन कंपनी था जिसके माध्यम से हुए महामाया में पूरे बीएसपी क्वार्टर का निर्माण दल्ली राजहरा के गेस्ट हाउस जेडी ऑफिस पानी की टंकियां राजहरा क्लब ओपन थिएटर उन्हीं के द्वारा लगभग 1964 में बनाया गया था । आपको बता दें कि पूरे बालोद जिले में एकमात्र बुद्ध विहार का निर्माण भी उन्हीं के द्वारा दल्ली राजहरा के मुख्य मार्ग में कांबले गैस के कार्यालय के सामने किया गया । नगर के आसपास का पहला ईटा भट्ठा आवरी के पास था जो कि नामदेव कामले के द्वारा ही बनाया गया था और शहर का पहला स्कूल नामदेव कॉलोनी में उन्हीं के मकान में लगता था । उसके बाद नेहरू स्कूल का निर्माण शासकीय स्कूल के रूप में हुआ । फिर बीएसपी के द्वारा स्कूल का निर्माण किया गया । यदि यह कहा जाए की राजहरा के विश्वकर्मा नामदेव कामले जी हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । राजहरा में गैस कनेक्श लाने का श्रेय भी कांबले परिवार को ही जाता है सतीश कामले के पिता बुद्ध वासी शिवदास कांबले के द्वारा सन 1984 में भोजन बनाने के लिए गैस कनेक्शन की शुरुआत की थी । सतीश कांबले ने बताया कि पहले कुछ लोगों के घरों में ही सिलेंडर का उपयोग किया जाता था । पहले या तो लोगों के मन में अज्ञानता था की गैस सिलेंडर से बहुत बड़ी हानि होगी साथ ही बीएसपी के द्वारा कोयला का पूर्ति बहुत ही कम कीमत में होता था साथ लकड़ी की बहुतायत होने के कारण लोग गैस सिलेंडर की तरफ ध्यान नहीं दे पाते थे लेकिन जिनको अवश्यता हुआ करता था वह भिलाई दुर्ग या राजनादगांव से लेकर आते थे । जब नगर में गैस सिलेंडर देने की शुरुआत हुई तब पोस्ट ऑफिस में लोग फॉर्म जमा करते थे और लॉटरी के माध्यम लोगों को सिलेंडर आवंटित की जाती थी । आज भी उनके पास अंचल के हजारों संतुष्ट ग्राहक हैं ।राजहरा में लोग काम के तलाश में आते गए जनसंख्या बढ़ती गई बीएसपी प्रशासन ने रहने के लिए विभिन्न स्तर के क्वार्टर बनाये गए । जहां प्रशासनिक कार्यालय जेडी ऑफिस को बनाया गया ।सप्तगिरि पार्क के कलावाटिका में फ़िल्मी गाने की शूटिंगअच्छे स्वास्थ्य के लिए बीएसपी का अस्पताल बना जो एक समय क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल था । शिक्षा व्यवस्था बेहतरीन बनाने के लिए बीएसपी ने प्राथमिक शालाएं से लेकर हाई स्कूल बनाया तथा एक स्कूल इंग्लिश मीडियम के लिए बनाई गई । बीएसपी के स्कूलों में हाई स्कूल क्रमांक 1 ,2 ,3 एवं प्राथमिक शाला क्रमांक 6 ,22, 26 ,28 ,30 32 थे और सीनियर सेकेंडरी स्कूल इंग्लिश मध्यम में एक ही था । जहां निजी तौर पर श्री गुरु नानक हाई स्कूल बना तो सरकार के द्वारा एकमात्र सरकारी तौर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम से नेहरू स्कूल बनाया गया ।1966 में निजी निर्मला इंग्लिश मीडियम सीनियर सेकेंडरी स्कूल खुला जहां बच्चे अंग्रेजी माध्यम से शिक्षक ग्रहण करते हैं।शहर में हाई स्कूल तक की कक्षाएं तो लगती थी जहां मात्र 12वीं कक्षा तक ही बच्चों को शिक्षा मिल सकता था उच्च शिक्षा के लिए उन्हें दुर्ग भिलाई या राजनांदगांव जैसे शहरों पर जाना पड़ता था । उसके लिए स्व.संपत लाल जैन एवं स्व. शांतिलाल जैन के द्वारा अपने पिताजी स्व.नेमीचंद जैन की स्मृति में निजी स्तर पर कॉलेज का निर्माण किया गया जो समय अंतराल बाद शासकीय कॉलेज के रूप में परिवर्तन हुआ । आपको बता दें कि पहले बीएसपी के द्वारा क्रीज घर बना था जहां खदान में काम करने वाली महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को क्रीज घर में छोड़कर काम में जाया करती थी। जहां उन बच्चों को देखभाल के लिए बीएसपी प्रशासन ने अपना एक अलग से स्टाफ रखे हुए थे ।पानी की कमी को दूर करने के लिए झरन मंदिर के पास अनवरत बहाने वाले पानी को रोकने के लिए कुंड बनाए गए साथ ही शहर के आसपास तीन विशाल डेम का भी निर्माण किया गया । जिसमें ईट कसा डेम बोईरडीही डेम और डेम साइड है ।समय के साथ शहर का विकास होता गया और शहर दिन प्रतिदिन आगे बढ़ता गया इसी दरमियान माइंस में काम करने वाले श्रमिकों ने अपना संगठन बनाया जहां शहर के विकास में एक बदनुमा दाग भी लगा जहां दो-तीन जून 1977 को अपनी शांतिपूर्ण मांग कर रहे एक बालक सहित 11 ठेका श्रमिकों की सरकार के द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसी बीच एशिया का सबसे बड़ा मजदूरों के द्वारा निर्मित और मजदूरों के द्वारा संचालित न्यूनतम कीमत पर इलाज हो रहे शहीद अस्पताल का निर्माण हुआ जो की दल्ली राजहरा क्षेत्र का एक बेहतरीन अस्पताल है।सिर्फ बालोद जिला ही नहीं यहां बस्तर मानपुर चौकी क्षेत्र से लोग इलाज कराने यहां आते हैं जो काम सरकार नहीं कर पाया वह मजदूरों ने कर दिखाया ।मुख्य महाप्रबंधक के रूप में कार्य कर रहे एस के साहा के द्वारा प्रसिद्ध कलाकार अंकुश देवांगन की सहायता से बीएसपी से निकलने वाले अनुपयोगी लोहे के सामान से गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज विशाल भीष्म रथ का निर्माण दल्ली राजहरा के व्यू प्वाइंट गेस्ट हाउस के पास किया गया है । जहां से आप पूरे शहर का नजारा देख सकते हैं इस जगह से सूर्योदय और सूर्यास्त का मनोरम दृश्य तो दिखता ही है बरसात और ठंड के दोनों में कोहरे और आसमान का मिलन भी बड़ा अद्भुत दृश्य निर्मित करता है ।शहर का मध्यकालमध्य प्रदेश से अलग होकर जब 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ । नगर पालिका अध्यक्ष के लिए चुनाव हुआ जिसमें छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा को विजय हासिल हुई और प्रथम नगर पालिका अध्यक्ष पुरोबी वर्मा बनी उनके कार्यकाल में अनेक विकास हुए जिसमें प्रमुख रूप से चार तालाब शहर में बनाए गए वार्ड नंबर 5 में शंकर तालाब वार्ड नंबर 7 में वार्ड नंबर एक एवं दो में एक तालाब तथा वार्ड नंबर 15 में एक तालाब बना कई छोटे-छोटे गार्डन वार्ड नंबर 1,2,3, 7,8 ,15 में बनाए गए जहां लोग मनोरंजन के लिए घरों के पास बने इस गार्डन में जाकर कुछ पल सकून की बिताया करते थे । विभिन्न वार्डों में नाली निर्माण सड़क निर्माण जिस विभिन्न कार्य नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी केडी चंद्राकर के द्वारा करवाए गए ।शहर का विकास होता गया यह दल्ली राजहरा का युवा काल था जहां लगभग डेढ़ लाख की जनसंख्या में लोग यहां पर निवास करते थे । बीएसपी क्वार्टर हो या मजदूर वर्ग के क्वार्टर सभी भरे रहते थे । गर्मी के दिनों में उस समय ऐसी नहीं होता था अधिकतर घरों में कुलर होते थे लोड बढ़ने पर लोड सेटिंग करने के लिए अलग-अलग क्षेत्र में बीएसपी के द्वारा बिजली बंद भी की जाती थी । जब टीवी पर रामायण आया उस समय जुनून ऐसा होता था पुरी की पूरी सड़क सुनी हो जाती थी ।रविवार का बाजार ऐसा होता था जब न्यू आशा टॉकीज से लेकर अनिल प्रिंटिंग प्रेस के गली तक तथा क्रिकेट ग्राउंड से लेकर जेडी ऑफिस तक और पूरी तरह से बाजार भरा रहता था । जहां खरीदारी के लिए दल्ली राजहरा के आसपास घोटिया डौंडी चिपरा कुसुमकसा खल्लारी शेरपार महामाया तक के ग्रामीण अपना सामान विक्री तथा खरीदी के लिए दल्ली राजहरा आया करते थे । आसपास के लोग वनों या अपने खेतों में मिलने वाले सीताफल आम जिमी कंद मशरूम जिसमें बोडा और डोहरु फूटू प्रमुख रूप से ग्रामीण आज भी बेचे शहर में आते हैं। दल्ली राजहरा शहर में एक समय बीएसपी के द्वारा कई कार्यक्रम कराए जाते थे जिसमें शहर का सबसे प्रसिद्ध आल इंडिया आयरन ओर गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन जिले के सबसे बड़े फुटबॉल ग्राउंड पंडित जवाहरलाल नेहरू फुटबॉल स्टेडियम में होता था ।जो कि अंचल का सबसे बड़ा टूर्नामेंट होता था जिसमें दिल्ली मुंबई फगवाड़ा कोलकाता और गोवा जैसे जगहों के प्रसिद्ध टीम यहां खेलने के लिए आते थे । बेहद ही रोमांचक मुकाबले होते थे । जहां स्कूल के बच्चों पढ़ने वाले बच्चों को मैच देखने के लिए स्कूल समय में परिवर्तन कर दिया जाता या फिर छुट्टी दे दिया जाता था बीएससी में काम करने वाले कर्मचारियों को स्पेशल पास दिया जाता था मैच का रोमांस ऐसा की आधा शहर खेल के वक्त रुक जाता था । कोलकाता से विशेष तौर पर एक व्यक्ति लेमन चूस नाम के चॉकलेट बेचने आया करते थे।चॉकलेट का लोग दीवाना ऐसे होते थे कि लोग खरीदने के लिए टूट पड़ते थे क्योंकि इस चॉकलेट का स्वाद (खट्टी मीठी तीखी और नमकीन लिए होता था जो की अलग ही था। क्रिकेट के रोमांच से भी दल्ली राजहरा अछूता नहीं रहा दल्ली राजहरा में खाली सर्कस मैदान जगह में जैन भवन चौक के पास बीएसपी के अधिकारी पी एस अहलूवालिया के सहयोग से क्रिकेट ग्राउंड का निर्माण हुआ जहां आज भी पूरे जिले से बच्चे क्रिकेट सीखने शहर में आते हैं और विभिन्न स्तर के क्रिकेट प्रतियोगिता भी दल्ली राजहरा में आयोजित की जाती है ।बीएसपी के द्वारा प्रतिवर्ष मई माह में दो दिन का लोक कला महोत्सव का आयोजन किया जाता था । जहां कई नामी गिरामी कलाकार प्रस्तुति देने दल्ली राजहरा आते थे ।26 जनवरी सन 1980 में प्रसिद्ध फिल्मी गायक मोहम्मद रफी , मनाडे एवं शारदा ( फिल्मी गायिका ) का शंकर जय किशन नाइट कार्यक्रम में राजहरा आगमन हुआ था । यह कार्यक्रम एक यादगार कार्यक्रम रहा क्योंकि मोहम्मद रफी साहब बीमार होने के बावजूद दल्ली राजहरा में कार्यक्रम देने आए थे अफसोस यह कार्यक्रम उनका अंतिम कार्यक्रम साबित हुआ । फुटबॉल ग्राउंड में ही टोको फोको नाम का एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था लोगों की भीड़ इतनी थी की कार्यक्रम के दौरान मंच पर जाकर एक व्यक्ति के डांस करने से उठे विवाद में भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस प्रशासन को लाठी चार्ज भी करना पड़ा था ।सांस्कृतिक धरोहर के रूप में शहर में कई संस्थाएं भी अपने प्रस्तुति दिया करता था । जहां पर छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के मजदूर माटी पुत्र कलाकार स्व. फागूराम यादव मजदूर वर्ग के शोषण के खिलाफ मजदूरों की विकास , वर्तमान स्थिति समाज सुधार जैसे कई विषयों पर उन्होंने गीत गाए थे । माटी पुत्र स्व. फागूराम यादव के गीत आज भी छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के कार्यक्रमों में वहां के कलाकार बड़े श्रद्धा के साथ गाते हैं । दल्ली राजहरा में कला मंच के द्वारा भी कई प्रस्तुति दी जाती थी ।जिसमें प्रमुख रूप से भुईया के सिंगार और उवत चंदा प्रमुख थे ।दल्ली राजहरा की धरती फिल्म निर्माण का भी गवाह है जहां फिल्म का निर्माण दल्ली राजहरा एवं आसपास के अंचलों में किया गया था । यहां की सप्तगिरि पार्क में भी एक बेहतरीन की छत्तीसगढ़ी फिल्म मोर छैया भुईया की बेहतरीन गीत तै आकाश के बन जा चंदा मैं सूरज बन जाथो फिल्माया गया था ।शहर में विकास के साथ दो टॉकीज भी बनाए गए थे जिसमें न्यू आशा टॉकीज तथा महावीर टूरिन टॉकीज था। जहां कई फिल्में दिखाई जाते थे महावीर टूरिन टॉकीज कुछ समय बाद बंद हो गया लेकिन न्यू आशा टॉकीज लंबे अंतराल तक चलता रहा। फिल्मों का रोमांस ऐसा होता था शनिवार रविवार को भरपूर भीड़ रहती थी साथ ही गांव से शहर आने पर लोग गांव वालों को फिल्म दिखाने जरूर टॉकीज लाते थे। धीरे-धीरे वीडियो आने के बाद फिल्म देखने की ललक कम होती गई ।शहर के विकास के दौरान दुखद घटना जो लोगों को जहान में हमेशा याद रहेगाइसी विकास के बीच दुखद घटनाएं भी हुई। दो-तीन जून 1977 को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के नेता शहीद शंकर गुहा नियोगी के नेतृत्व में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे एक बालक सहित 11 महिला एवं पुरुषों को तत्कालीन सरकार के द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । कुछ समय बाद मजदूरों के मसीहा कहे जाने वाले शहीद शंकर गुहा नियोगी का उद्योग पतियों ने भिलाई में गोली मारकर हत्या कर दी थी । महामाया माइंस की ओर पेट्रोलिंग में जा रहे सीआईएफ के जीप को बारूद से उड़ा दिया गया जिसमें तीन जवान शहीद हुए थे ।बीएससी क्वार्टर में ही सोए हुए एक ईमानदार अधिकारी मेजर गुहा की हत्या कर दी गई थी । तो कुछ वर्ष बाद एक दूसरी घटना भी घटी जहां ईमानदार वित्त विभाग के अधिकारी एस. श्री राम की संदिग्ध परिस्थिति में बोईरडीही डेम में लाश मिली तो घटना के तीसरे ही दिन एक कर्मचारी की गैरेज में लाश मिली थी जो आज तक अबूझ पहेली बन गया । आज से 30 साल पहले एक दुखद घटना दल्ली राजहरा में घटी थी । पोस्ट ऑफिस के सामने तिवारी परिवार के तीन व्यक्ति की गैस सिलेंडर ब्लास्ट होने से मौत हो गई थी। घटना इतना खतरनाक था कि पूरे मकान में दरारें पड़ गई थी । मकान में लगे आम के पेड़ जल गए थे और कपड़े उड़कर पेड़ों तक लटक गए थे।घटना के बाद शहर में इतना दहशत था शाम होते ही उस गली में गुजरने से भी लोग डरा करते थे ।इसी बीच आया दहशत का वह समय कोरोना काल छत्तीसगढ़ में कोरोना काल के दौरान सबसे पहला लॉक डाउन 23 मार्च 2020 से राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में लगाया गया था, जिसे बाद में केंद्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (25 मार्च से शुरू) में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद कोरोना की दूसरी लहर के दौरान, अप्रैल 2021 में छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों (जैसे रायपुर, दुर्ग आदि) में फिर से सख्त लॉक डाउन लगाए गए थे। इस कोरोना काल में हमारा दल्ली राजहरा भी अछूता नहीं रहा ।कई अपने अपनों से बिछड़ गए। मौत भी ऐसी आई की परिजन उन्हें छूने को भी डरते थे अंतिम विदाई भी बड़ा दुखदाई था ।जहां कई दवाइयां भी बेअसर हो गई दहशत इतना कि अगर खांसी भी किसी को आ जाए तो उसे कमरे में बंद कर देते थे। पूरा शहर के गली सुना हो गया था। बस सुनाई देता था तो पुलिस की सायरन लोग घर से बाहर निकलते जैसे ही सारण की आवाज आता लोग दौड़कर अपने-अपने घर में घुस जाते थे । वह आंख मिचोली का खेल भी बड़े मजेदार होता था । मजदूर वर्ग के परिवार में फाके की नौबत आ गई।कई हाथ भी उठे जो मदद करने में आगे आए । जहां सेवा के सर्वश्रेष्ठ रूप में जाने जा रहे श्री गुरु नानक देव के अनुयाईयो के द्वारा शहरों में जरूरतमंदों को राशन के पैकेट दिए जा रहे थे । वहीं बीएसपी के अधिकारियों की पत्नियों के द्वारा संचालित राजहरा महिला समाज के द्वारा भी जरूरतमंदों को सुखी राशन की पैकेट दिए जा रहे थे । इसी बीच नगर के दानदाताओं उत्कल समिति से जरूरतमंदों को घर पहुंचा कर पका हुआ भोजन दे रहे थे । जिसमें प्रमुख रूप से मोनू चौधरी क्रांति जैन सतीश जैन सुमित जैन जैसे युवा आगे आए राजहरा अनाज किराना व्यापारी संघ और विभिन्न समाज की ओर से राशन आदि का सहयोग मिला ।राजहरा वासियों को शायद याद होगा किसी भी धर्म या समाज के व्यक्ति की मृत्यु होती थी यदि उसे व्यक्ति को पता चलता तो वह दाह संस्कार में सम्मिलित होने चले जाते थे। हर काम वे अपने हाथों से निस्वार्थ रूप से करते थे। चाहे वह उसे जानते हो या ना जानते हो। इसी कोरोना काल में उसे व्यक्ति की मौत हो गई । शायद आप में से कई लोग जानते होंगे वह व्यक्ति थे प्रफुल्ल मोहंती जिसे लोग महंती दादा के नाम से जानते थे। समय ऐसा था जो व्यक्ति सब के परिजनों के अंतिम संस्कार में सम्मिलित होते थे उनके अंतिम संस्कार में राजहरा वासी ही सम्मिलित नहीं हो पाए ।समय अंतराल बढ़ता गया शहर का विकास विभिन्न पहलू में हुआ जहां भारतीय स्टेट बैंक पंजाब नेशनल बैंक जैसे बड़े बैंक बैंकों को नया भवन मिला तो कई निजी बैंक भी नगर में आए यह शहर का विकास की गाथा रही उसके बाद हुआ विघटन ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/06/video_20260628_140536.mp4दल्ली राजहरा मुट्ठी में भरी रेत की तरह फिसल रहा है सारी सुविधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है मानो की हाथ से रेत खत्म होते जा रहा है पता नहीं कब इसका अंत हो जाएगा । कारण सिर्फ एक ही है केंद्र और राज्य में भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों की सरकार रही । लेकिन दोनों राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं ने कभी शहर के विकास के बारे में नहीं सोचा । सिर्फ दल्ली राजहरा दोनों पार्टी के लिए वोट बैंक बनकर ही रह गया क्योंकि सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला शहर होने के कारण जितना मेहनत आसपास के ग्रामीण अंचलों में घूम-घूम कर करना पड़ता उससे कम समय में शहर वासियों को बरगलाना आसान था वह काम राजनीतिक पार्टियों ने किया । विभिन्न सुविधाओं का लालच देकर शहर से वोट बटोरते गए और राज करते गए। लेकिन शहर में रोजगार स्थापित करने के बारे में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया । जिसके कारण राजहरा की स्थिति रोजगार के मामले में दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है ।यह बहुत ही निंदनीय बात है की राजनीतिक दल की पूरी लापरवाही के कारण राजहरा की स्थिति बन रही है । शहर से सुविधा सरकार ने धीरे-धीरे कैसे कम की अब यह देखें । आरटीओ कार्यालय दुर्ग से आरटीओ के अधिकारी लाइसेंस बनाने एवं आरटीओ संबंधित कार्य के लिए बीएसपी के गेस्ट हाउस में आया करते थे जिसे अब बंद कर दिया गया है । जब दुर्ग से जिला बनने की बात हुई तब पूरे शहर वासियों ने पूरा जोर मांग की थी कि दल्ली राजहरा को जिला बनाया जाए लेकिन निराशा हाथ लगी । वहीं जिला ना बनने पर जिला मुख्यालय राजहरा में बनाया जाए वह भी तत्कालीन सरकार के द्वारा अनदेखा कर दिया गया नगर से धीरे-धीरे प्रशासनिक विभाग अन्य स्थानों पर स्थानांतरण होते गए ।जिसमें तहसील कार्यालय डौंडी चला गया एकलव्य विद्यालय भी डौंडी चला गया । सीआईएसएफ के लिए बनने वाले क्वार्टर बालोद जिले के ही बालोद से गुरुर रोड पर ग्राम धनोरा चला गया । सरकार नहीं चाहता कि राजहरा का विकास हो इसलिए योजनाएं भी ऐसी नहीं लाई जो क्रियान्वत हो सके ।जनप्रतिनिधि स्थानीय निवासियों के द्वारा नगर हित को देखते हुए यहां 100 बिस्तर अस्पताल की मांग की गई थी सरकार द्वारा 30 बिस्तर अस्पताल तो बना कर दिया लेकिन सुविधा नहीं दी स्थिति जाकर देखेंगे तो बस ऐसा लग रहा है जैसे छोटे बच्चों को टॉफी पकड़ा दिया है । बेहतरीन शिक्षा के लिए केंद्रीय विद्यालय की मांग की गई थी भूमि आवंटन तो हुआ लेकिन ऐसा नहीं लग रहा है कि सरकार इस ओर भी ध्यान दे रहे हैं । प्रयास विद्यालय खुलने के बात सरकारी अमला के द्वारा किया गया वह भी ठंडे बस्ते में जाकर चुपचाप बैठ गया । 1986 के आसपास राव घाट परियोजना बीएसपी के द्वारा लाया गया राजहरा से भिलाई के लिए लौह अयस्क का परिवहन किया जाता है लोगों की मांग पर रेलगाड़ी चालू हुआ जो दल्ली राजहरा से दुर्ग जाती थी । उस समय भाप इंजन हुआ करता था जो डीजल के बाद इलेक्ट्रॉनिक में परिवर्तन हो गया लोगों की मांग पर ट्रेन का विस्तारीकरण किया गया । तथा शहर वासियों की मांग पर ट्रेन को दो शिफ्ट में रायपुर तक बढ़ाया गया और वही राव घाट परियोजना को देखते हुए नक्सल प्रभावित क्षेत्र अंतागढ़ तक विस्तारीकरण किया गया । विडंबना यहां रही थी राजहरा वासियों की मांग पर चालू हुई ट्रेन में अब राजहरा वालों को बैठने के लिए भी जगह के लिए जद्दोजहज करना पड़ रहा है ।इसी परिपेक्ष में अनेकों संगठन ने ट्रेन को बिलासपुर एवं नागपुर तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि दोनों स्टेशन से संपूर्ण भारत को जोड़ा जा सकता है ।बीएसपी ने भी राजहरा के सुविधाओं से हाथ खींच रहा है जहां कई स्कूल प्राथमिक शाला से लेकर हाई स्कूल तक चला करते थे आज बीएसपी की पूरी स्कूल बंद हो चुकी है । जिले की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता आयरन ओवर गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट होता था जो शहर के लिए पूरा एक रोमांच था वह पूरी तरह से बंद हो चुका है ।लोक कला महोत्सव में नामी गिरामी कलाकार आते थे वह बंद हो चुका है । एक समय था जब राजहरा क्लब के पास गर्मी के दिनों में मनोरंजन के लिए प्रोजेक्टर से फिल्म दिखाए जाते थे वह तो बीते दिनों की बात ही हो गई lएक समय रोजगार की विकेंशी बीएसपी द्वारा निकाली जाती थी समय के साथ-साथ अधिक उत्पादन और लागत को कम करने के लिए औद्योगिकरण शुरू हुआ और मजदूरों की जगह मशीनों ने ले ली और बीएसपी ने मेन पावर कम करना चालू कर दिया धीरे-धीरे बीएसपी के द्वारा नए कर्मचारियों की भर्ती लेना बंद कर दिया । लोग काम की तलाश में पलायन करना चालू कर दिए । यही से शहर की बर्बादी चालू हो गया । राजहरा शहर एक ऐसा शहर है जहां पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी भी आ चुके हैं नामी कलाकार सुरेंद्र दुबे मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव शब्बीर कुमार पद्म श्री तीजन बाई और फिल्मी गायक मोहम्मद रफी का अंतिम गाना भी इस दल्ली राजहरा की धरती पर गाये हैं । न्यू आशा टॉकीज महावीर टूरिन टॉकीज आंखों के सामने धीरे-धीरे उजड़ गया। माथुर परिवार के द्वारा एक प्रयास कर माथुर टॉकीज का निर्माण किया गया है जो कुछ हद तक फिल्म प्रेमियों के लिए मददगार साबित हुआ है ।बीएसपी के द्वारा करोड़ों रुपया की रॉयल्टी सरकार को दे रहे हैं उसका फायदा शहर को नहीं हो रहा है । आज भी राजहरा उपेक्षा का शिकार है । इस रायल्टी के पैसे से बालोद जिले के अलावा अन्य जिले राजनांदगांव दुर्ग बस्तर के क्षेत्र का विकास हो रहा है लेकिन दल्ली राजहरा का विकास के बारे में जनप्रतिनिधि ने सोचना ही बंद कर दिया है ।शहर का पावर हब जो मूलभूत अति आवश्यक सुविधाओं के लिए तरस रहा है ।शहर के विकास में नगर पालिका में बैठे पूर्व जनप्रतिनिधियों के द्वारा भी प्रयास नहीं किया गया । शहर के विकास के लिए नगर पालिका की ओर से कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया गया । दो टाउन हॉल के नाम पर करोड़ों रुपया कहां खत्म हो गए इसका जवाब नगर पालिका के पास नहीं है इतने सालों में नगर पालिका ने टाउन हॉल तक नहीं बना पाए । शहर में बहने वाली बरसाती नाला कभी डेवलप नहीं हो पाया । चारों तालाब के नाम पर इतने पैसे का गबन हुआ उसका भी जवाब उनके पास नहीं है । सरकार के पैसा का गबन करने के लिए बेवजह कई निर्माण कर डाले जिसे कोई औचित्य ही नहीं है । स्टेट बैंक के बगल में बौद्ध समाज के सामने बने उस नमूना को आप देखकर समझ सकते हैं जिसमें लगभग 10 लाख से ऊपर की राशि नगर पालिका ने खर्च की है ।लाखों रुपया खर्च करके बनी अटल परिसरपर्यटक विभाग के जनप्रतिनिधि नीलू शर्मा के द्वारा भी पर्यटक की दृष्टि से शहर को विकसित करने के लिए डेम साइड को डेवलप करने की बात कही गई थी जिसे साल भर बीत चुका है वह भी ठंडी बस्ते में चला गया । पुराना बाजार से लेकर यदि आप चिखला कसा तक चले तो सभी दुकानदार अपने दुकान के आगे की लाइट बंद कर दे तो सड़क अंधेरा में घिर जाएगा । सड़क का विद्युत करण भी नगर पालिका की ओर से नहीं किया गया ।आप माने या ना माने लेकिन यह 100% सच है कि शहर को बचाने के लिए किसी भी सरकार ने प्रयास नहीं किया । छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों का शासन रहा । चुनाव आते गए नेता लोगों को रोजगार का लालच देते गए लोग उनके बहकावे में आकर उन्हें जिताते गये । जीतने के बाद जन प्रतिनिधि कंबल ओढ़ कर सो गए लेकिन कभी नहीं सोचा कि राजहरा का विकास हो । स्थिति बद से बदतर होती गई । दुखद बात यह है की इतनी बड़ी रॉयल्टी देने वाले शहर को बचाने के लिए कोई सामने क्यों नहीं आ रहा है । रोजगार का एकमात्र सहारा बीएसपी ही है जहां किसी न किसी माध्यम से शहर बीएसपी से जुड़ा है । यदि कल्पना की जाएगी बीएसपी अपना व्यापार समेट ले खदान बंद कर दें तब शहर का क्या होगा ..? रोजगार के लिए अधिकतर हड़ताल बीएसपी के खिलाफ ही हुआ है किसी भी जन प्रतिनिधि ने सरकार के खिलाफ कभी हड़ताल या विरोध जैसी बात नहीं की जिसका खामियाजा आगे शहर के आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा । सरकार शहर के आसपास जमीन और भूभाग रहने के बावजूद भी शहर वासियों के लिए रोजगार के संबंध में कभी प्रयास ही नहीं किया और ना ही करना चाहा । बस इसे रॉयल्टी देने वाली सोने की मुर्गी समझकर उपयोग करता रहा ।आज भी नगर वासियों को इस बात पर विचार करना होगा अंत करीब है शहर को उजड़ने से बचाने और रोजगार लाने के लिए निर्णायक मोड पर जाना होगा तभी शहर बच सकता है । यही स्थिति राजहरा से जुड़े महामाया माइंस की बनी है ।नगर वासी महामाया को बनते और उजड़ते देख चुके हैं । शहर किदवंती ना बन जाए इसके लिए जब तक निर्णायक सोच के साथ कदम नहीं उठाएंगे तब तक ना तो लोगों को रोजगार मिल पाएगा और ना ही शहर बच पाएगा ।शहर की विकास और शहर को बचाने के लिए राजहरा व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोविंद वाधवानी के नेतृत्व में विशाल आंदोलन भी हुआ लेकिन उसका भी आवाज सरकार के कानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया।जिसका फायदा राजहरा वालों को हो सके। आज भी शहर को बचाने के लिए आपकी सोच क्या है आपके विचार क्या है यह तो आप पर ही निर्भर है कि वास्तव में आप दल्ली राजहरा का नाम विश्व मानचित्र पर देखना चाहते हैं या नही।संडे मेगा स्टोरी में आज बस इतना ही।भोजराम साहू संपादक (हमारा दल्ली राजहरा एक निष्पक्ष समाचार चैनल) 98937 65541 Spread the lovePost navigationनशे की रफ्तार ने ली मासूम की जान, 60 किमी पीछा कर बाल-बाल बचे जवानों ने दबोचा बेलगाम ट्रक ड्राइवर । वैवाहिक वर्षगांठ पर जनपद सदस्य दंपत्ति ने रची सेवा की मिसाल, बच्चों को पिलाई पोलियो ड्रॉप, दीं स्टील चेयर और डोम शेड की सौगात ।