दल्ली राजहरा
शनिवार 11 जुलाई 2026
भोजराम साहू 9893 765541

 

 शिक्षा के मंदिर में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ “पानी” के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। डौंडी ब्लॉक के ग्राम दिघवाडी स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला और शासकीय प्राथमिक शाला में पिछले 3-4 महीनों से पेयजल संकट गहराया हुआ है।
स्कूल में लगा एकमात्र हैंडपंप पीएचई विभाग द्वारा उखाड़कर ले जाया जा चुका है। कारण बताया गया – पानी में लाल रंग और पीने योग्य नहीं है। लेकिन इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था आज तक नहीं की गई। नतीजा: लगभग 50-60 बच्चे और स्कूल स्टाफ बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
 क्या है पूरा मामला…?

पिछले शैक्षणिक सत्र में हैंडपंप से लाल पानी आने लगा। शिकायत के बाद पीएचई विभाग की टीम जांच के लिए आई और पानी का सैंपल ले गई। जांच में पानी अयोग्य घोषित हुआ और विभाग ने आनन-फानन में हैंडपंप को ही निकाल लिया।
उसके बाद से स्कूल में पानी का एकमात्र स्रोत बंद हो गया। अब पीने, मिड-डे मील बनाने, बर्तन धोने और शौचालय के लिए शिक्षक और बच्चे मिलकर लगभग 200 मीटर दूर से पानी ढोकर ला रहे हैं।

प्रशासन मौन, जनप्रतिनिधि आक्रोशित
इस मामले को जनपद सदस्य डौंडी श्री तुलेश्वर हिचामी ने सामान्य सभा की बैठक में भी उठाया था। उन्होंने जिले के कार्यपालन अभियंता वर्मा जी से चर्चा की।

जनपद सदस्य हिचामी ने बताया – ईई वर्मा जी कह रहे हैं कि नया बोर खनन किया जाएगा। लेकिन कब होगा, इसकी कोई तारीख नहीं बता रहे। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, बच्चे परेशान हैं।इस संबंध में जानकारी के लिए जब वर्मा जी के मोबाइल नंबर  पर दो बार संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
 “अब आर-पार की लड़ाई होगी
जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा – बार-बार आवेदन और निवेदन का समय अब खत्म हो गया है। पानी अब सिर से ऊपर जा चुका है। अगर अगले 3 दिनों के अंदर शाला में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो ग्रामवासी और क्षेत्र की जनता को मजबूरन ठोस कदम उठाना पड़ेगा।
उन्होंने साफ कहा – इसके बाद जो भी स्थिति बनेगी उसकी पूरी जिम्मेदारी पीएचई विभाग और जिला प्रशासन की होगी।
 बच्चों का भविष्य दांव पर
पानी की समस्या है मिड-डे मील और शौचालय। पानी के बिना स्कूल कैसे चलेगा? सवाल सिर्फ हैंडपंप का नहीं है, सवाल 50-60 बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा का है।
शासन की मंशा है “हर घर नल, हर बच्चे को शुद्ध पानी”। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि स्कूल में बच्चे आज भी बाल्टी लेकर 200 मीटर दूर जा रहे हैं।क्या पीएचई विभाग को 4 महीने का समय भी एक स्कूल के लिए नया बोर कराने के लिए कम पड़ गया?
रिपोर्ट: हमारा दल्ली राजहरा निष्पक्ष समाचार चैनल
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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