दल्ली राजहरा सोमवार 20 जुलाई 2026 भोज राम साहू 9893765541
पौधारोपण के साथ संरक्षण और जवाबदेही तय करे सरकार..!

 छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने राज्य सरकार से मांग की है कि मानसून में चलाए जा रहे पौधारोपण अभियानों को केवल “रिकॉर्ड और फोटो” तक सीमित न रखा जाए। संगठन का कहना है कि सरकार को पौधारोपण के साथ-साथ संरक्षण और संवर्धन की ठोस नीति बनानी चाहिए।
करोड़ों खर्च, पर पेड़ कितने बचे?

 

मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष _ जनक लाल ठाकुर_ ने कहा कि हर साल “एक पेड़ माँ के नाम”, “एक पेड़ पिता के नाम” जैसे अभियानों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन सवाल ये है कि लगाए गए पौधों में से कितने वृक्ष बन पाते हैं? 

केवल पौधा लगाकर फोटो खिंचवाना पर्यावरण संरक्षण नहीं है। 3 महीने बाद अधिकांश पौधे सूख जाते हैं और कोई जवाबदेह नहीं होता। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग होता है” – श्री ठाकुर ने कहा।

डौंडी-लोहारा का संबलपुर मॉडल बने उदाहरण
जनक  लाल ठाकुर ने कहा कि अगर सरकार वानिकीकरण को सफल बनाना चाहती है तो उसे बालोद जिले के डौंडी-लोहारा विकासखंड के संबलपुर क्षेत्र के स्थानीय मॉडल को अपनाना चाहिए। 

“वहां यह साबित हुआ है कि 1000 लापरवाही से लगाए गए पौधों से बेहतर हैं 50 पौधे जिन्हें जिम्मेदारी से पाला जाए। संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों को ही जिम्मेदारी दी जानी चाहिए” उन्होंने कहा।
जलवायु परिवर्तन और कृषि पर संकट

प्रदेश अध्यक्ष ने चिंता जताई कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ रहा है। अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान और घटती हरियाली से खेती-किसानी संकट में है। ऐसे में वृक्षारोपण सरकारी अभियान नहीं, बल्कि कृषि और पर्यावरण सुरक्षा का आधार बनना चाहिए।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की 4 मांगें:
1. हर पौधे का रिकॉर्ड – GPS टैगिंग के साथ डिजिटल निगरानी हो 
2. जीवित रहने की दर सार्वजनिक हो – हर 6 महीने में रिपोर्ट जारी हो ।
3. जवाबदेही तय हो – सूखे पौधों के लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार हों ।
4. पिछले सालों की जांच हो – जहां-जहां पौधारोपण हुआ वहां सर्वे कराया जाए ।

सोमनाथ उइके ने कहा कि पौधारोपण पर खर्च का मूल्यांकन “कितने पौधे लगे” से नहीं, बल्कि “5 साल बाद कितने पेड़ बचे” से होना चाहिए। इस कार्यक्रम को भ्रष्टाचार से बचाकर केवल स्थानीय लोगों को संरक्षण की जिम्मेदारी देनी चाहिए।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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