दल्ली राजहरा शुक्रवार 24 जुलाई 2026 भोजराम साहू 9893 765541
दल्ली राजहरा में आज बहुड़ा रथ यात्रा 

आज 24 जुलाई को लौह नगरी दल्ली राजहरा में भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा रथ यात्रा है। 9 दिन तक गुंडिचा मंडप अपने मौसी के घर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रांगण विराजमान रहने के बाद भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा आज अपने मुख्य मंदिर वापस लौटेंगे। जहाँ पूरे विधि-विधान के साथ उनकी पुनः स्थापना और पूजा-अर्चना की जाएगी।

 

श्री जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष मोनू चौधरी ने बताया कि द्वारा आज 11:00 बजेभक्ति संगीत तरंग का कार्यक्रम आयोजित की गई है । जिसमें प्रसिद्ध लोक गायिका टी ज्योति एवं प्रसिद्ध भजन गायक राजेश कश्यप और रंजन भारद्वाज के द्वारा मधुर एवं भक्तिमय हिंदी भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी दोपहर 1:00 से महा भोग भंडारा की शुरुआत होगी तथा संध्या 3: 30 बजे से बहुड़ा रथ यात्रा प्रारंभ होगी ।

 

भगवान श्री जगन्नाथ की स्थापना से जुड़ी पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर के अंत में भगवान श्री कृष्ण के देह त्याग के बाद उनका हृदय नहीं जला। उसी “ब्रह्म पदार्थ” को समुद्र में प्रवाहित कर दिया गया था। 

कई वर्ष बाद राजा इंद्रदेव को स्वप्न में आदेश मिला। पुरी के समुद्र तट पर बहकर आई दारु की लकड़ी से मूर्तियां बनवाने का कार्य प्रसिद्ध शिल्पकार विश्वकर्मा जी ने शुरू किया। 21 दिन तक दरवाजा न खोलने की शर्त थी, लेकिन 14वें दिन रानी के आग्रह पर दरवाजा खुल गया। इससे मूर्तियां अधूरी रह गईं। 
तब नारद मुनि के परामर्श पर उन्हीं अधूरी मूर्तियों में “ब्रह्म पदार्थ” स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसी कारण भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों में हाथ-पैर स्पष्ट नहीं हैं।
मंदिर के पुजारियों का मानना है कि हर 12 से 19 वर्ष में होने वाले “नवकलेवर” में पुरानी मूर्ति से नए विग्रह में यही ब्रह्म पदार्थ स्थानांतरित किया जाता है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, परन्तु करोड़ों श्रद्धालुओं की यही गहन आस्था है।

 

रथ यात्रा का आध्यात्मिक संदेश
रथ यात्रा केवल उत्सव नहीं है। शास्त्रों में मानव शरीर को रथ और आत्मा को यात्री कहा गया है। इस दृष्टि से रथ यात्रा आत्मा की ईश्वर की ओर यात्रा का प्रतीक है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन भी सत्य और ज्ञान की खोज की एक यात्रा है।

वैज्ञानिक भी हैरान: मंदिर के 6 चमत्कार
1. ध्वज रहस्य: मंदिर का ध्वज हमेशा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है। हर दिन ध्वज बदलने की परंपरा है।
2. नीलचक्र दर्शन: 20 फीट का सुदर्शन चक्र शहर में कहीं से भी देखने पर आपकी ओर ही मुंह करके दिखता है।
3. महाप्रसाद: 7 मिट्टी के बर्तनों में एक साथ पकने वाला छप्पन भोग में सबसे ऊपर वाला पहले पकता है। प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता।
4. समुद्र की मौन: सिंहद्वार के अंदर समुद्र की आवाज पूरी तरह बंद हो जाती है, बाहर निकलते ही फिर शुरू।
5. ब्रह्म पदार्थ: नवकलेवर में जिस “ब्रह्म पदार्थ” को स्थानांतरित किया जाता है, उसे आज तक किसी ने नहीं देखा।
6. हवा का बहाव: मंदिर के ऊपर हवा की दिशा हमेशा समुद्र से मंदिर की ओर रहती है।

चार धामों में शामिल जगन्नाथ पुरी मंदिर आस्था के साथ-साथ अपने रहस्यों के लिए भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है “
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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