दल्ली राजहरा रविवार 09 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541 केंद्र की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जेल भरो, रेल रोको, चक्का जाम। सीएमएस, सीटू, एटक, इंटक, किसान मोर्चा साथ केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 10 अगस्त को संयुक्त ट्रेड यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर होने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थानीय स्तर पर सफल बनाने के लिए सीटू यूनियन ने कमर कस ली है। इस संबंध में आज शाम सीटू यूनियन कार्यालय में श्रमिकों की विशाल बैठक आयोजित की गई। बैठक में लगभग 250 श्रमिक उपस्थित रहे और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया। क्या हैं आंदोलन के मुद्दे बैठक में सीटू के संगठन सचिव प्रकाश क्षत्रिय ने आंदोलन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार देश के हर वर्ग को परेशान कर रही है। किसानों के काले कानून तो वापस लिए गए, लेकिन उनसे वादा की गई 10 मांगें अब तक पूरी नहीं की गईं। देशभर का किसान खाद, बीज, महंगी बिजली और एमएसपी न मिलने से परेशान है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/08/VID-20260808-WA0088.mp4उन्होंने कहा कि मजदूरों के श्रम कानूनों में भारी विरोध के बावजूद मजदूर विरोधी परिवर्तन किए गए हैं। अब उन्हें लागू करके मजदूरों के हितों के विरुद्ध प्रबंधन पक्ष को मजबूत किया जा रहा है। इससे देश के सभी उद्योगों में बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति पैदा हो रही है। ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमला किया गया और कारखानों में सरकारी निरीक्षण प्रणाली को कमजोर कर मालिकों को शोषण का मौका दिया जा रहा है।प्रकाश क्षत्रिय ने कहा कि देश के सभी उद्योगों में रोजगार में कटौती की जा रही है जिससे बेरोजगारी का संकट बढ़ रहा है। छात्रों के साथ भी यही व्यवहार हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और विरोध करने पर छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार तानाशाही की ओर बढ़ रही है। इससे त्रस्त होकर देश के किसान, मजदूर और अन्य वर्गों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/08/VID-20260808-WA0089.mp4पीएफ और श्रम सम्मेलन पर सवाल सीटू के अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि पहले श्रम कानूनों को कमजोर करके मजदूरों पर हमला किया गया और अब पीएफ जैसी बुनियादी सुविधा पर भी डाका डाला जा रहा है। हाल ही में एक अधिसूचना द्वारा पीएफ कटौती के लिए वेतन की सीमा 15,000 रुपये निर्धारित कर दी गई है। इससे मजदूरों की भविष्य निधि कम होगी और मालिकों को फायदा होगा। यह सरकार पूरी तरह मालिकपरस्त है और देश के श्रम ढांचे को तबाह करने पर आमादा है।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 के बाद से राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन नहीं बुलाया गया। मजदूरों से संबंधित कानून बदलने में श्रमिक संगठनों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। विदेशों से ऐसे समझौते किए जा रहे हैं जिससे देश के किसान और लघु उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। महंगाई चरम पर है और सरकार लाठी के दम पर सबको दबाना चाहती है। दल्ली राजहरा की स्थानीय मांगेंयूनियन के सचिव पुरुषोत्तम सिमैया ने कहा कि केंद्र की श्रम विरोधी नीतियों का असर हमारे इस्पात उद्योग पर भी दिख रहा है। खदानों में नियमित मजदूरों की संख्या बेहद कम हो गई है। पद रिक्त होने के बावजूद भर्ती नहीं की जा रही है। ठेका मजदूरों से उत्पादन कराया जा रहा है, लेकिन अब ठेका मजदूरों की संख्या कम करने का फरमान इस्पात मंत्रालय ने जारी कर दिया है। इससे खदानों में कार्यरत मजदूरों की छटनी तय है, जिसे हम किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।उन्होंने कहा कि यहां प्रस्तावित 6 मिलियन टन पैलेट प्लांट को तरह-तरह के बहाने बताकर भिलाई में स्थानांतरित करना क्षेत्र की जनता के साथ धोखा है। वर्षों तक इस क्षेत्र का दोहन करने के बाद अगर यहां के लोगों को उनके हाल पर छोड़ा जाएगा तो केंद्र और राज्य सरकार से इसका जवाब जरूर मांगा जाएगा। कैसा रहेगा आंदोलन का स्वरूप बैठक में तय किया गया कि 10 अगस्त के राष्ट्रीय आंदोलन को दल्ली राजहरा में सीएमएस, सीटू, एटक, इंटक और संयुक्त किसान मोर्चा मिलकर सफल बनाएंगे। आंदोलन के प्रथम चरण में पूरे देश में जेल भरो आंदोलन, रेल रोको और चक्का जाम किया जाएगा।बैठक में उपस्थित सभी 250 लोगों ने 10 अगस्त के आंदोलन में पूर्ण सक्रियता से भागीदारी करने का संकल्प लिया।Spread the lovePost navigationसर्व समाज समरसता समिति के द्वारा भव्य सावन उत्सव कल: जगन्नाथ मंदिर में होंगी विभिन्न प्रतियोगिताएं । 10 अगस्त को दल्ली राजहरा में जिला स्तरीय ‘जेल भरो आंदोलन’: गोटुलमुंडा में चक्काजाम, धरना और प्रदर्शन ।