दल्ली राजहरा रविवार 30 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541
संडे मेगा स्टोरी में 51 वीं कहानी में रविवार 30 अगस्त 2026 के संस्करण में पढ़िए गुलाबी नगरी और मार्बल सिटी के साथ मूर्तियों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान के जयपुर के शास्त्री नगर के नवग्रह मूर्ति भंडार के संस्थापक जितेंद्र कुमार शर्मा की कहानी

 

 

गुलाबी नगरी के मूर्तिकार : हाथों से पत्थर में जान फूंकते हैं जयपुर के जितेंद्र शर्मा

गुलाबी नगरी और मार्बल सिटी के साथ मूर्तियों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान के जयपुर के शास्त्री नगर में स्थित नवग्रह मूर्ति भंडार के संस्थापक 60 वर्षीय मूर्तिकार जितेंद्र कुमार शर्मा की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

जितेंद्र जी ने अपने हाथों से ऐसी-ऐसी मूर्तियां बना कर भारत के कोने-कोने में भेजी हैं जो वास्तव में दिवंगत को अपनी कला से जीवंत कर देती हैं।

उन्होंने बताया कि मूर्तिकला उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिताजी नरसिंह लाल शर्मा जी मूर्ति बनाया करते थे। जब वे बड़े हुए तो पिताजी के साथ इस कला के क्षेत्र में जुड़ गए। पिताजी की मदद करने के कारण समय अभाव में दसवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और पिता के साथ मूर्ति बनाने में लग गए।

 

मूर्तिकला को बेहतरीन ढंग से उभारने और बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट से भी मूर्तिकला के संबंध में प्रशिक्षण लिया।

 

अब उनका जीवन मूर्ति निर्माण से ही गुजर रहा है। उन्होंने अपनी कला यहीं तक ही नहीं समेटा बल्कि अपने आने वाली पीढ़ी को भी आगे कला को बढ़ाने के लिए अपने बच्चों को कला की बारीकियां सिखा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अभी उनकी उम्र 60 साल है। अब तक उन्होंने कई देवी-देवताओं में श्री राम दरबार श्री हनुमान जी श्री राधा कृष्ण जगत जननी मां दुर्गा के साथ-साथ नेताओं जैसे बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित चंद्रशेखर आजाद, महाराणा प्रताप, महारानी लक्ष्मीबाई, गोपीनाथ मुंडे जैसे कई प्रसिद्ध हस्तियों की मूर्तियां बनाई हैं।

देश की सेवा में अपने जीवन को न्योछावर करने वाले देशभक्त सैनिकों की कई मूर्तियां भी अब तक इनके द्वारा बनाई जा चुकी हैं।

वो अविस्मरणीय पल जब जीवित और दिवंगत दोनों रूपों में बनाई मूर्ति

जब उनसे पूछा गया कि अब तक आपने हजारों मूर्तियां बनाई हैं, क्या ऐसा कोई क्षण आया जो आपके जीवन का अविस्मरणीय पल बन गया हो?

तब उन्होंने बताया कि एक बार पंजाब में बाबा जी रहते थे, प्यारा सिंह नाम था उनका। उनके लिए मैंने कई मूर्तियां बनाई थीं। वे प्रसिद्ध हस्ती थे, उनके कई भक्त मिलने आते थे, वहां कैमरा आदि की अनुमति नहीं थी। एक बार मैं उनसे मिलने के लिए गया था तब उन्होंने पास बैठाकर मुझसे कहा कि आप मेरी मूर्ति बनाइए।

 

उनकी अनुमति के बाद कैमरा ले जाने दिया, मैंने उनके तीन-चार फोटो खींचे और साल-डेढ़ साल के बाद उनकी मूर्ति बनाकर उनको दी, वो बहुत खुश हुए। कुछ दिन बाद बाबा जी इस दुनिया में नहीं रहे, उनके बच्चों ने फिर मुझे फोटो देकर उनकी मूर्तियां बनाने के लिए कहा।

 

यह एक ऐसा पल था जब मैंने व्यक्ति के जीवित रहते और उनके इस दुनिया में ना रहने के बाद दोनों समय मूर्तियां तैयार की थीं, जो मेरे लिए एक अद्भुत क्षण था।

 

कला से कभी समझौता नहीं

 

मैं अपनी कला से कभी समझौता नहीं करता। मेरा पूरा प्रयास रहता है कि बेहतर से बेहतर मूर्ति बना कर दूं। पत्थरों की क्वालिटी से भी कभी समझौता नहीं किया।

 

मूर्ति बनाने की प्रक्रिया क्या है?
मैंने पूछा कि मूर्तियां कैसे बनाते हैं, उसकी प्रक्रिया क्या है?

उन्होंने बताया कि देश के कोने-कोने से लोग अपने परिजन की फोटो या जिसका मूर्ति बनाना होता है उसका फोटो भेजते हैं। मैं पहले फोटो के आधार पर मूर्ति को प्लास्टर ऑफ पेरिस से मिट्टी में बनाता हूं फिर उनके परिजन या जिन्होंने आर्डर दिया रहता है उनको फोटो खींचकर भेजता हूं। उनके द्वारा संतुष्ट होने के बाद मूर्ति को पत्थरों में उकेरते हैं। प्रक्रिया लंबी रहती है लेकिन समय के अंदर बना कर देने का हमारा प्रयास रहता है।

अधिकतर मूर्ति में लगने वाले पत्थर हमें राजस्थान से ही मिल जाते हैं लेकिन कई बार लोगों की मांग पर बाहर से भी पत्थर मंगवा कर मूर्तियां बनाई जाती हैं।

क्या सरकार से सम्मान मिला?

 

मैंने उनसे पूछा कि आप इतनी बेहतरीन मूर्तियां बनाते हैं, क्या भारत सरकार या राजस्थान राज्य सरकार द्वारा आपको सम्मानित किया गया है?

 

तब उन्होंने बताया कि आज तक कभी किसी संस्था या सरकार के द्वारा सम्मानित नहीं किया गया। बस लोगों की संतुष्टि और उनका आशीर्वाद ही हमारे लिए सम्मान है। बस इस कला से घर परिवार का गुजर-बसर हो जाता है। परमात्मा का आशीर्वाद हम पर बना रहे और बच्चे इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं और बढ़ाते रहें। बस मैं इतना ही कहना चाहता हूं।

 

 

 

कितनी बड़ी मूर्तियां बनाई हैं?

 

मैंने उनसे पूछा अभी तक आपने कितनी छोटी और बड़ी मूर्तियां बना चुके हैं?

 

तब उन्होंने कहा कि परिजन की मूर्तियां या स्टैचू 18 इंच से ऊपर का ही बनाते हैं। भगवान की 5 इंच से लेकर 5 फीट, 10 फीट की मांग रहती है उस हिसाब से बनाते हैं। अभी तक 9 फीट तक की मूर्तियां बनाई हैं, लेकिन 15 फीट मूर्तियों का काम चल रहा है। मूर्ति बनाने के समय एक विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि एक ही पत्थर से बने, थोड़ी सी भी गड़बड़ हुई तो मूर्ति खंडित हो जाती है और वह किसी काम की नहीं रह जाती। मूर्ति को आपके निवास स्थान तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी हमारी रहती है, हम बेहतरीन ढंग से आपके दिए गए पते तक सकुशल मूर्ति पहुंचा कर देंगे।

 

यदि आप भी अपने परिजन जो अब इस दुनिया में नहीं रहे, या किसी देवी-देवताओं या किसी महान पुरुषों की मूर्ति बनवाना चाहते हैं तो आप इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं –
मोबाइल नंबर : 9829819801, 9983781307
नवग्रह मूर्ति भंडार, जयपुर, राजस्थान

 

 

आज की संडे मेगा स्टोरी में बस इतना ही। आपके पास यदि कोई बेहतरीन कहानी हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। आपकी कहानी निःशुल्क लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

 

 

धन्यवाद
भोजराम साहू
संपादक
(हमारा दल्ली राजहरा _एक निष्पक्ष समाचार चैनल )
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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