दल्ली राजहरा बुधवार 02 सितंबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है परंपरा और संस्कारों से अभिभूत यह भारत देश का एक ऐसा प्रदेश जहां प्रदेश को भी मां अर्थात महतारी (छत्तीसगढ़ महतारी ) की दर्जा दी गई है। जहां महिलाओं की सम्मान होती है और महिलाएं संस्कारों और त्याग से परिपूर्ण होती है । छत्तीसगढ़ के प्रथम त्यौहार हरियाली जो की धरती मां को समर्पित है तो दूसरा त्यौहार रक्षाबंधन भाई और बहनों के प्रेम का प्रतीक है तो तीसरा त्यौहार कमर छठ जिसे महिलाएं अपने संतानों के प्रति समर्पण के रूप में मनाती है । कमर छठ छत्तीसगढ़ के मया और मां के ममता से भरे त्यौहार है ।जिसमें अपने-अपने बच्चों की सुखी जीवन अच्छा स्वास्थ्य है के लिए मां उपवास रखती है । यह सिर्फ त्यौहार ही नहीं मां के ममता आस्था श्रद्धा और अपने संतान के प्रति निस्वार्थ प्रेम (मया ) का त्यौहार है।कमर छठ ऐसा त्यौहार है जहां विवाहित महिलाएं निर्जला उपवास ( बिना पानी पिए ) रहकर मनाती है l इस उपवास में महिलाएं 6 की संख्या में पूजा में उपयोग हेतु समान एकत्र करते हैं l https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260902-WA0103.mp4जहां विवाह उपरांत पहले साल जो महिलाएं उपवास रहती है उसे कमर छठ की पूजा में 6 प्रकार की अनाज जिसमें लाई और चना उड़द मूंग मसूर महुआ जैसे कृषि फसल पूजा में आवश्यक होता है l 6 बास के बनी छोटे छोटे टोकनी तथा 6 प्रकार के मिट्टी के बने खिलौने जिसमें बाटी भावरा जैसे खेल सामग्री बनाए जाते हैं l बिना हल चलाए निकाले धान के चावल जिसे पसहर चावल कहा जाता है का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है l इस पूजा में गाय के बजाय भैंस के दूध दही और घी का उपयोग किया जाता है lइस पूजा में खमार और महुआ के पेड़ का विशेष उपयोग होता है l महिलाएं इनके टहनी को दातुन के रूप में उपयोग करती हैं तथा उसके पत्ती को पूजा में उपयोग करते हैं। महिलाएं खम्हार या महुआ की पत्ते को भोजन पतरी के रूप में उपयोग कर इसी के ऊपर में भोजन रखकर करते हैं l इस पूजा में बिना नमक का भोजन बनाया जाता है l भोजन बन जाने के बाद उन्हें 6 हिस्से में 6 जीव जंतुओं जिसमें चींटी पक्षी पशु गाय कुत्ता बिल्ली चूहा जैसे जीव जंतुओं के हिस्से का अलग निकाल कर प्रसाद के रूप में उपवास महिलाएं ग्रहण करती है lइस पूजा में जमीन में एक गड्ढा बनाया जाता है जिसमें दो हिस्से में बांटा जाता है जिसे सागरी कहा जाता है l सागरी के चारों तरफ फूल के पेड़ काशी के पौधे लगाए जाते हैं जिसे सागरी माता का रूप मानकर चारों तरफ महिलाएं बैठकर पूजा करती है l तथा सगरी माता का सभी महिलाएं 6 बार परिक्रमा करती है एवं बुलाए गए पंडित या किसी वृद्ध महिलाओं के द्वारा 6 ज्ञानवर्धक कहानी बताई जाती है l पूजा उपरांत सभी महिलाएं सागरी में पानी डालते हैं तथा अपने छोटे बच्चे का पैर इस सागरी के पानी से धुलवाती है सभी महिलाएं पूजा उपरांत उपस्थित बड़े बुजुर्गों का प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लेती है l कई महिलाएं पीला मिट्टी का पोटली बनाकर पूजा स्थल पर ले जाते हैं तथा घर में लाकर उसे बच्चों के पीठ में निशाना बनाते हैं l कहा जाता हैं इससे सगरी माता का आशीर्वाद मिलता है l इस पूजा में महिलाएं सगरी माता के साथ देवाधिदेव महादेव की पूजा करती है पौराणिक मान्यता है कि कंस ने देवकी के 7 बच्चों का वध कर दिया था l तब देवकी ने हल छठी मां का व्रत रखा जिसके फलस्वरूप भगवान कृष्ण का जन्म हुआ l अन्य मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान विष्णु मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में जन्म लिया तथा शेषनाग लक्ष्मण के रूप में l उन्होंने द्वापर में भगवान राम ने कृष्ण के रूप में तथा शेषनाग बलराम के रूप में बड़े भाई बन कर अवतार लिए l जिनके जन्म दिन को हल छठी के रूप में मनाया जाता है l हल छठी पर्व कमरछठ जिसमें अपने बच्चों के सुख समृद्धि और सुखद भविष्य के लिए छत्तीसगढ़ में उपवास रखा जाता हैl यह यू पी एवं बिहार के द्वारा दीपावली के छठे दिन मनाया जाने वाला छठ पर्व से मिलता-जुलता है दोनों की पूजा पद्धति अलग है लेकिन दोनों उपवास अपने संतान के लिए ही की जाती है l कमर छठ उपवास को किसी कारणवश यदि महिलाएं एक साल छोड़ देती है तो अगले साल से यह उपवास को नहीं रख सकती है l दल्ली राजहरा वार्ड क्रमांक 2 गणेश चौक में महिलाएं एकत्र होकर कमर छठ व्रत विधि विधान के साथ मन कर पूजा अर्चना कर भगवान देव आदि देव महादेव की आरती की गई जिसमें प्रमुख रूप से द्रौपदी साहू नर्मदा साहू कविता निषाद रोशनी निषाद प्रेमलता निर्मलकर रोशनी साहू पूनम जायसवाल राजकुमारी साहू लोकेश्वरी डोलेश्वरी बबली भारती आशा किरण साहू मानकी साहू संत्री निर्मलकर पूर्णिमा दूलेश्वरी सुनीता द्रोपती मोहिनी निर्मला चेमन रीना जायसवाल रवि साहू एवं चौक के अनेक महिलाएं एकत्रित थी । Spread the lovePost navigationगोस्वामी तुलसीदास जयंती पर खलारी में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे ..! रेंघई के माताओं ने हलषष्टी व्रत हर्षोल्लास पूर्वक मनाया ।