दल्ली राजहरा शनिवार 05 सितंबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 डौण्डी और डौण्डी-लोहारा ब्लॉक की दो महिला शिक्षिकाओं की प्रेरक गाथा – शिल्पी राय और रेणुका साहू ने रचा अनुकरणीय इतिहास । जब एक तरफ शिक्षा को व्यापार बनाकर मासूम बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमारे ही अंचल में दो ऐसी महिला शिक्षिकाएँ हैं, जिन्होंने अपने परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों से ऊपर उठकर शिक्षा को ही अपना धर्म बना लिया है। आज शिक्षक दिवस के अवसर पर हम आपको उन दो गुरुओं की कहानी बता रहे हैं, जिनकी जितनी तारीफ की जाए कम है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0017.mp45 सितंबर का दिन, भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। इसकी शुरुआत 5 सितंबर 1962 से हुई थी। कहा गया है – गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0018.mp4 और सच में शिक्षक वह मोमबत्ती है जो खुद जलकर दूसरों को रोशनी देता है। कहा जाता है कि एक डॉक्टर की गलती से एक मरीज मरता है, एक इंजीनियर की गलती से एक पुल टूटता है, लेकिन एक शिक्षक की गलती से पूरा राष्ट्र बर्बाद हो जाता है। इसलिए गुरु को भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है। आज उन्हीं गुरुओं में से दो गुरुओं की कहानी। 1. पहली कहानी : नवाचार की पर्याय – शिक्षिका शिल्पी रायपदस्थापना – शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, कुआँगोंदी, विकासखंड डौण्डी, जिला बालोद शिल्पी राय केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि नवाचारी शिक्षा की एक मिशाल हैं। इनकी पहचान ही कुछ अलग है।सम्मान और उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त: – माननीय सांसद और कलेक्टर महोदय द्वारा “वृक्ष मित्र” सम्मान। प्रत्येक वर्ष शत् वृक्षम् अभियान चलाने और अब तक 1000 से ज्यादा वृक्षों का रोपण कर सुरक्षा के साथ बड़ा करने के लिए यह सम्मान मिला।– कोरोना काल में “पढ़ई तुंहर दुआर” के तहत बालोद जिले की पहली ऑनलाइन क्लास 7 मई 2020 को लेने का गौरव।– डौण्डी ब्लॉक की सबसे पहली “हमारे नायक” के रूप में चयन।– राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षा रत्न सम्मान, रायपुर में सम्मानित।– 5 सितंबर 2025 को शिक्षा रत्न सम्मान से सम्मानित।– मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण “ज्ञानदीप पुरस्कार” से सम्मानित।– कार्यालय जिला परियोजना समग्र शिक्षा जिला बालोद द्वारा सम्मानित ।इनका जीवन मंत्र है – “Teaching the mind as well as teaching the heart is the only aim of my life.”कोरोना काल में जब सब स्कूल बंद थे, तब इन्होंने अप्रैल 2020 में ‘shilpiroy classes’ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू कर बच्चों को लगातार स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराया। http://cgschool.in पोर्टल पर 15 जून 2020 से राज्य स्तरीय ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया और राजहरा जोन की मास्टर ट्रेनर नियुक्त हुईं। इनकी सफलता की कहानी “शिक्षा के गोठ” मासिक न्यूज लेटर में भी प्रकाशित हुई और कई राष्ट्रीय चैनलों ने इनका इंटरव्यू लिया।इनके मार्गदर्शन में बच्चों ने राज्य स्तरीय विज्ञान मेला, चित्रकला, इंस्पायर अवार्ड , कला उत्सव , NMMSE परीक्षा और राष्ट्रीय एथलेटिक्स में लगातार चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया ।शिक्षण के दौरान दृश्य मीडिया का उपयोग, गणित एवं विज्ञान मॉडलों के माध्यम से विषय अध्यापन, कक्षा-कक्ष प्रदर्शन आदि के माध्यम से विद्यार्थियों में क्रिटिकल थिंकिंग ,क्रिएटिविटी , आत्मविश्वास के साथ बोलने आदि में मदद मिलती है ,जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होता है।नागपुर के राष्ट्रभाषा भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय अपूर्व विज्ञान मेले में इन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का नेतृत्व करते हुए विज्ञान संचारक के रूप में सम्मान प्राप्त किया।इतना ही नहीं, जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन और सीईओ डी.डी. मंडले के नेतृत्व में इन्होंने निर चेतना अभियान’ जल संरक्षण के लिए चलाया।इनके मार्गदर्शन में नीर चेतना अभियान के अंतर्गत किया गया नवाचार “वॉटर बेल एक्टिविटी ” की राष्ट्रीय स्तर पर (National Water Mission) प्रशंसा हुई। बच्चों में पर्यावरण के प्रति प्रेम जगाने के लिए इनका ‘शत वृक्ष अभियान’ चलता है, जिसमें हर साल 100 वृक्ष लगाकर शिक्षक, छात्र और परिजन मिलकर उसे बड़ा करते हैं।इनके द्वारा बोटैनिकल गार्डन, पोषण वाटिका और खेल मैदान का निर्माण भी शाला में कराया गया। मिशन LOC कार्यक्रम के अंतर्गत SRG के रूप में अंग्रेजी विषय की कक्षाओं का सफल संचालन किया गया। विज्ञान विषय के DRG एवं BRG के रूप में डोंडी एवं बालोद जिला में सेवाएं दी गई।इनके नेतृत्व में बंगाली क्लब दल्ली राजहरा में आओ ब्रह्मांड को जाने कार्यक्रम और सरस्वती शिशु मंदिर दल्ली-राजहरा में प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा द्वारा एक दिवसीय बाल विज्ञान कार्यशाला का आयोजन किया गया था , जिसके उपरांत इन्हें विज्ञान संचारक की उपाधि से सम्मानित किया गया। ELTAI द्वारा आयोजित स्टेट लेवल सेमिनार में इंग्लिश लैंग्वेज टीचिंग पर पेपर प्रजेंट कर चुकी है। मैं समय-समय पर करियर काउंसलिंग भी करती हूं जिससे विद्यार्थियों को भविष्य करने की तैयारी में मदद मिल सके। 2. दूसरी कहानी : जीवन जीने की कला सिखाती शिक्षिका – रेणुका साहूपदस्थापना – शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, कोड़ेकसा, विकासखंड डौण्डी-लोहारादूसरी प्रेरणा हैं कोड़ेकसा की शिक्षिका रेणुका साहू, जो कहती हैं – शिक्षक एक पद नहीं, जिम्मेदारी है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0004.mp4वे बताती हैं, 2010 में जब मेरी पहली पदस्थापना हुई, तो तीन कमरों का एक छोटा सा भवन और एक ऑफिस था। न कोई पेड़-पौधा, न कोई सुंदर वातावरण। तब मैंने इस चुनौती को ही अपना प्रणाम मानकर इसे अपने सपने जैसा सुंदर बनाने का संकल्प लिया। शुरुआत में उन्होंने कोर्स पर ध्यान दिया, फिर बच्चों को सुनना शुरू किया। कक्षा के अंदर एक जिम्मेदार टीचर, कक्षा के बाहर उनकी दोस्त और माँ बन गईं। परिणाम यह हुआ कि बच्चे खुद आकर अपने मन की बात बताने लगे।बालिका शिक्षा और सुरक्षा पर विशेष कार्य: मिडिल स्कूल में 11 से 14 साल के बच्चे होते हैं। यही उम्र लड़कियों में शारीरिक बदलाव की होती है। इस पर रेणुका जी ने विशेष कक्षाएं शुरू कीं। पहले सिर्फ लड़कियों को बताती थीं, फिर सोचा कि लड़कों को भी समझना जरूरी है, क्योंकि जो बच्चा आज इन बातों को समझेगा, वही कल अपनी माँ के लिए अच्छा पुत्र, पत्नी के लिए अच्छा पति और बेटी के लिए अच्छा पिता बनेगा। आज स्थिति यह है कि किसी भी बालिका को कोई समस्या होती है तो वह बिना डरे, बिना संकोच के अपनी बात उनसे कह देती है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0007.mp4करके सीखो पर जोर:उन्होंने अपनी कक्षाओं को पूरी तरह प्रयोगात्मक और TLM आधारित बना दिया है। रटने की जगह बच्चे प्रयोग करके खुद उत्तर निकालते हैं। परिणाम स्वरूप 2016-17 में उनकी शाला से एक साथ तीन प्रयोगात्मक मॉडल का चयन *INSPIRE Award* के लिए राज्य स्तर पर हुआ था।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0005.mp4व्यावसायिक शिक्षा और आत्मनिर्भरता:इनका मानना है कि किताबी ज्ञान ही सब कुछ नहीं। जीवन जीने की कला भी आनी चाहिए। वे बच्चों को खेतों में ले जाकर किसानों से मिलवाती हैं, खेती कैसे होती है, फसल कैसे बोई जाती है, सिखाती हैं। इस वर्ष रक्षाबंधन पर उन्होंने गांव में आसानी से उपलब्ध होने वाले अनाजों से राखियाँ बनवायीं, उनकी पैकेजिंग सिखाई और बाजार में बिकवाया भी, जिससे बच्चों को आर्थिक लाभ भी हुआ और आत्मनिर्भर बनने का ज्ञान भी मिला।स्काउट गाइड और पर्यावरण प्रेमी:https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0006.mp4भारत स्काउट गाइड में गाइड कैप्टन के रूप में वे लगातार सक्रिय हैं। बालोद के दुधली में आयोजित नेशनल जंबूरी में उनके बच्चों की विशेष सहभागिता रही और उन्होंने राज्य का प्रतिनिधित्व ‘नारी शक्ति पवेलियन’ में किया। शाला प्रांगण में उनके लगाए फलदार और छायादार वृक्ष आज उनकी मेहनत की कहानी कह रहे हैं। आज उनके पढ़ाए हुए छात्र अलग-अलग क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं और जब साल में कभी मिलने आते हैं, तो उनकी आँखों में जो सम्मान दिखता है, वही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।Spread the lovePost navigationराज्य स्तरीय बहुविकल्पीय ज्ञान प्रतियोगिता में चिखलाकसा के आशीष कुमार गुप्ता ने लहराया परचम । स्वामी आत्मानंद विद्यालय राजहरा में हर्षोल्लास से मना शिक्षक दिवस, बच्चों ने गुरुजनों को दिया सम्मान ।