दल्ली राजहरा मंगल वार 13 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर दल्ली राजहरा की प्रसिद्ध कालीबाड़ी मंदिर परिसर एक बार फिर भक्ति और आस्था की रोशनी से जगमगा उठा है। बंग समाज द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मनोकामना ज्योति कलश का भव्य आयोजन किया गया है।नवरात्रि के प्रथम दिन से मंदिर परिसर में 57 मनोकामना ज्योति कलश विधि-विधान के साथ प्रज्वलित किए गए हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में ज्योति कलश प्रज्वलित करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ये ज्योतियां पूरे 9 दिन तक अखंड रूप से प्रज्वलित रहेंगी। ज्योति कलश प्रज्वलन के अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू, जिला महामंत्री सौरभ लुनिया, मंडल अध्यक्ष रामेश्वर साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और समाज के लोग उपस्थित रहे।वहीं कालीबाड़ी कमेटी से अध्यक्ष कनक बनर्जी, सचिव मदन माइती, गौतम बेरा, सजल राय, एस सी सरकार, जयंतो चक्रवर्ती, पिंटू चक्रवर्ती, मिठू कारफा, रिता बैनर्जी, रानी माइती, भगवान दीन सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे।कालीबाड़ी का गौरवशाली इतिहास: 56 साल पुरानी आस्था दल्ली राजहरा की कालीबाड़ी का इतिहास काफी रोचक और संघर्षों से भरा है। समाज के वरिष्ठ सदस्य गगन पंड्या ने बताया कि दल्ली राजहरा में सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव के नाम से सन 1959 में बंग समाज द्वारा दुर्गा पूजा की शुरुआत की गई थी।लगभग 10 वर्ष बीतने के बाद समाज के लोगों ने सोचा कि दुर्गा पूजा के साथ-साथ काली पूजा भी की जाए। इसके लिए पहाड़ी की चोटी को चुना गया। इस कार्य में बी. घोष, रंजन घोष, एस. पी. भौमिक, डी. पी. बाजपेयी, पी. के. राय, एस. के. चौघरी, एन. आर. चक्रवर्ती, पी. के. शर्मा, एस. के. चटर्जी, आर. बी. गोगुलकर, ओ. पी. दत्ता, नारायण महकुल, ए. के. चटर्जी, डी. एन. राय, के. बी. परिरा, एल. एम. मायती, एस. के. दत्ता, जी. एन. बोस, एन. के. मल्लिक, पी. एल. नाग, ए. सी. मंडल, हरि प्रसाद पंडित, एस. आर. कुण्डू, एन. जी. चक्रवर्ती, आर. जे. डे, एस. आचार्जी, टी. पी. राय, एस. राय, एस. एस. पी. मिश्रा, तारा पद मायती, एन. के. दासगुप्ता, बिजन विश्वास और संध्या आइच का अमूल्य योगदान रहा। इनमें से अधिकांश लोग अब इस भौतिक संसार में नहीं हैं, जबकि जयंतीलाल राठौर और बी एन आइच आज भी उस दौर की यादें साझा करने के लिए हमारे बीच हैं।इन्हीं लोगों के प्रयासों से वर्तमान में जहाँ भव्य कालीबाड़ी मंदिर स्थित है, वहाँ सन् 1970 में काली पूजा की शुरुआत हुई। उस समय पहाड़ी के बीच तिरपाल का घेरा बनाकर और मिट्टी की मूर्ति बनाकर दीपावली की अमावस्या पर माँ काली की पूजा की जाती थी।24 जून 1972 को मंदिर निर्माण के उद्देश्य से रायपुर के विवेकानंद आश्रम से महाराज आत्मानंद स्वामी दल्ली राजहरा आए और उनके कर-कमलों से कालीबाड़ी के निर्माण की नींव रखी गई। इस निर्माण कार्य में अनूप चंद जैन, संपत लाल जैन, शांतिलाल जैन और मनोहर लाल जैन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ जो आज हमारे बीच नहीं है।सन 1978 तक मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजा होती रही। इसके बाद लगभग 10 वर्ष की अवधि में मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ। 1982 में मंदिर पूर्ण होने के बाद क्लब की ओर से राजस्थान से माँ काली की काले पत्थर की दिव्य मूर्ति लाने के लिए ए. सी. मंडल और विश्वनाथ आइच गए।28 अप्रैल 1982 को कोलकाता से आए विद्वान पंडितों द्वारा माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस पुनीत कार्य में दयानंद पंड्या, एन. के. मंडल, सुनील चटर्जी, राज चक्रवर्ती, विश्वनाथ आइच का अविस्मरणीय योगदान रहा।गगन पंड्या ने बताया कि वे स्वयं 1968 से दोनों कमेटियों से जुड़े हुए हैं और तब से सभी मिलजुलकर माँ की सेवा कर रहे हैं। यहां प्रतिवर्ष माँ शारदा मणि जयंती, स्वामी विवेकानंद जयंती, श्री रामकृष्ण जयंती, चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, कृष्ण जन्माष्टमी आदि त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। मंदिर परिसर में सिर्फ माँ काली ही नहीं, बल्कि देवाधिदेव महादेव, श्री हनुमान और श्री शनिदेव भी विराजमान हैं।Spread the lovePost navigationबालोद पुलिस का बड़ा कदम: साइबर ठगी की रकम वापसी और होल्ड खातों के लिए MRM-GRM पोर्टल पर मंथन । तोरण लाल साहू ने मुख्यमंत्री से भेंट कर बीएसपी की 130 एकड़ अनुपयोगी जमीन को राजस्व में शामिल करने की रखी मांग