दल्ली राजहरा शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541

क्वार नवरात्रि महोत्सव 2026
 मनोकामना घी ज्योति कलश _91
मनोकामना तेलज्योति कलश _343
कुल मनोकामना ज्योति कलश =434
आस्था और भक्ति का केंद्र मां महामाया, राजघराने सहित 12 गांव की कुलदेवी

 

 आस्था और भक्ति का केंद्र मां महामाया का प्राचीन मंदिर बहुत ही सुंदर और शांत वातावरण के बीच ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। जहां चारों तरफ लौह अयस्क के पहाड़ नजर आते हैं तो वहीं पास ही हर मौसम में जमीन से निकलकर बहता हुआ साफ पानी का झरना बेहद आकर्षक लगता है।

मंदिर में प्रवेश करने से पहले दोनों तरफ मां दुर्गा के नौ रूपों की मूर्तियां स्थापित हैं, जिसके सामने श्रद्धालु शीश झुकाकर प्रणाम करने के बाद ही मंदिर में प्रवेश करते हैं। मंदिर परिसर के ऊपर भगवान देवाधिदेव महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग के साथ शिवालय की स्थापना की गई है।

क्या है मंदिर का इतिहास

 

मंदिर प्रांगण के बुजुर्ग ग्रामीण जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है, वे बताते हैं कि हम नहीं जानते कि कितने समय से मां महामाया की सेवा करते आ रहे हैं। लेकिन हमने अपने बाप-दादाओं से सुना है कि मां की पूजा अर्चना उस जमाने से होती आ रही है जब 6 माह की रात और 6 माह का दिन हुआ करता था।

मान्यता है कि सभी देवी-देवता रात में घेरा बना रहे थे और अपने कार्यों में मग्न थे। जब सुबह हुई तो जो देवी-देवता जहां खड़े थे वहीं पत्थर की मूर्ति के रूप में स्थापित हो गए। कालांतर में अन्य मूर्तियां कहां गई पता नहीं, लेकिन आज भी यहां मां महामाया और गणेश जी की मूर्तियां उस प्राचीन काल से मौजूद हैं जिनकी आज भी पूजा अर्चना की जाती है। मां महामाया ऊपर पहाड़ी पर तो भगवान गणेश नीचे जमीन पर विराजमान हैं।

इस मंदिर परिसर में ऊंचाई पर मां महामाया, भगवान शंकर, ब्रह्मा, विष्णु, महेश की मूर्तियां हैं तो मंदिर परिसर के नीचे भगवान गणेश की दक्षिणमुखी मूर्ति स्थापित है।

 

12 गांव की कुलदेवी हैं मां महामाया

 

मां महामाया को आसपास के 12 गांव के लोग अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। हर दशहरा के समय यहां धान की बाली चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी के दिन आसपास के सभी 12 गांव के लोग यहां इकट्ठा होते हैं, जहां ज्योति कलश का विसर्जन किया जाता है। उस दिन यहां विशाल भीड़ उमड़ती है।

जिन 12 गांवों की कुलदेवी मां महामाया हैं उनमें कुमुड़कट्टा, इमलीपारा, तूयेदंड, नलकसा, भीड़कापार, नारंगसुर, कोटागांव, ककरेल, बमहनी, महामाया और कुशवाड़ा शामिल हैं।

 

डौंडीलोहारा राजघराने की भी कुलदेवी

मां महामाया को डौंडीलोहारा राजघराने की कुलदेवी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि राज परिवार हर खुशी के मौके पर मां के दर्शन करने अवश्य आता है। स्व. लाल महेंद्र सिंह टेकाम जब डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में विजयी हुए थे, तब उन्होंने अपनी विजय जुलूस की शुरुआत मां महामाया के दर्शन के बाद ही की थी।

1972 से हो रही ज्योति कलश स्थापना

 

मां महामाया मंदिर में ज्योति कलश की स्थापना 1972 से की जा रही है। मनोकामना पूर्ति के लिए देश ही नहीं विदेश से भी लोग यहां ज्योति कलश स्थापित करते हैं। दीवारों पर लिखे नामों से पता चलता है कि बालोद जिले के अलावा छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों, भोपाल, दिल्ली, कोलकाता जैसे शहरों और विदेश में अमेरिका तक के भक्तों के नाम ज्योति कलश की लिस्ट में अंकित हैं।

कैसे पहुंचे मां महामाया मंदिर

 

दल्ली राजहरा से लगभग 22 किलोमीटर दूर मां महामाया मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। दल्ली राजहरा से निकलते ही रास्ते में झरन माता मंदिर, चारों तरफ पहाड़ियों के बीच डैम साइड से होते हुए गोटूलमुड़ा से मुड़कर आप मां महामाया मंदिर पहुंचते हैं। बड़े-बड़े वृक्ष प्राकृतिक रूप में आपका स्वागत करते हैं। आगे दल्ली राजहरा की जीवनदायिनी डैम है। आगे बढ़ने पर दाईं ओर सैकड़ों मीटर ऊंचाई पर किलेवाड़ी की मंदिर है जहां मां दुर्गा, पवन पुत्र हनुमान और भगवान शिव विराजमान हैं।

यहां से पूर्व की ओर देखने पर लगभग 6 से 7 गांव दिखाई देते हैं, पश्चिम की ओर देखने पर बोड़ी डैम की विशाल खाई है और दक्षिण की ओर देखने पर मां महामाया मंदिर का धुंधला दृश्य दिखाई देता है। बेहद शांत वातावरण में विराजमान मां महामाया मंदिर पर एक बार जाने के बाद बार-बार जाने का मन करता है।

 

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग

भिलाई इस्पात संयंत्र लौह अयस्क समूह दल्ली राजहरा द्वारा सीएसआर फंड और डीएमएफ फंड के नाम से करोड़ों रुपये सरकार को दिए जाते हैं, लेकिन सड़क की दुर्दशा देखते ही बनती है। तेज रफ्तार से लौह अयस्क लेकर चलने वाले ट्रकों और संकरी सड़क के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मांग है कि सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग सड़क के चौड़ीकरण और मरम्मत पर ध्यान दे, ताकि श्रद्धालु परिवार सहित शांतिपूर्ण ढंग से मां के दर्शन कर सकें। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन और राज्य सरकार को कदम बढ़ाना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

 

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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