दल्ली राजहरा गुरुवार 29 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

संजय बैंस और राम जानकी सेवा समिति ने निभाया सनातन धर्म – सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है ।

 

कहते हैं, जब मन में सेवा की भावना हो, तो लोग ना जाति देखते हैं, ना धर्म देखते हैं। बस एक ही धर्म दिखता है – इंसानियत का धर्म।
और इसी धर्म को संजय बैंस कुसुम कसा की श्री राम जानकी सेवा समिति ने एक बार फिर पूरी निष्ठा से निभाकर दिखाया है। इस बार सेवा का हाथ बढ़ा दल्ली राजहरा वार्ड क्रमांक 12 के निवासी फारूक शेख की ओर।

 

क्या हुआ था फारूक के साथ ?

 

फारूक शेख पिता प्यारे जान, उम्र लगभग 40 वर्ष, दिनांक 16 सितंबर 2026 को सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे। पिता प्यारे जान बेटे को लेकर अस्पताल भागे। जान तो बच गई, लेकिन डॉक्टरों ने कहा – दोनों आँखों की रोशनी चली गई है, बड़ा ऑपरेशन करना पड़ेगा, यहाँ नहीं हो पाएगा।
पिता ने हार नहीं मानी। बेटे को लेकर पहले राजनांदगांव गए, फिर रायपुर एम्स गए। हर जगह एक ही जवाब – ऑपरेशन होगा, लेकिन खर्च होगा। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, कमाने वाले यही फारूक हैं, घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि इतना बड़ा ऑपरेशन करा सकें।अंत में वे पुष्पा अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए कहा, लेकिन खर्च की चिंता फिर सामने आ गई।

फिर याद आए संजय बैस

 

नगर के लोगों ने सलाह दी – एक बार संजय बैस से मिल लो।
फारूक के पिता प्यारे जान ने पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस से संपर्क किया और रोते हुए अपनी पूरी समस्या बताई – बेटे की दोनों आँखों की रोशनी चली गई है, घर में छोटे बच्चे हैं, उसी की कमाई से घर चलता है, ऑपरेशन नहीं करा पा रहे हैं। संजय बैस ने एक पल भी देर नहीं की। उन्होंने तुरंत श्री राम जानकी सेवा समिति के सभी सदस्यों से संपर्क किया। सभी ने एक स्वर में कहा – आप बेटे को अस्पताल में भर्ती करवाइए, जो भी खर्च होगा, समिति वहन करेगी।और आज, समिति की मदद से फारूक शेख का सफल ऑपरेशन हो चुका है।
संजय बैस ने क्या कहा ?

 

संजय बैस ने कहा -“फारूक के पिता प्यारे जान मेरे पास आए थे। उन्होंने बताया था कि दुर्घटना के कारण बेटे की दोनों आँखों की रोशनी चली गई है। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, उन्हीं की कमाई से घर चलता है। तब मैंने समिति के सदस्यों से बात की, सभी ने मिलकर फारूक को नई रोशनी देने का संकल्प लिया। आज डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर दिया है। हमें पूरा विश्वास है कि फारूक पूरी तरह ठीक हो जाएंगे और अपने परिवार के साथ हंसी-खुशी जीवन यापन करेंगे।”

 

फारूक ने क्या कहा ?

 

फारूक शेख ने हाथ जोड़कर संजय बैस एवं राम जानकी सेवा समिति का धन्यवाद दिया और कहा – “जिस तरह समिति ने मेरी मदद की है, मैं सदैव उनका आभारी रहूंगा। उन्होंने मुझे सिर्फ इलाज नहीं दिया, मुझे नई जिंदगी दी है।”
यही है सनातन परंपरा

 

राम जानकी सेवा समिति, कुसुम कसा ने एक बार फिर बता दिया कि सनातन परंपरा का असली अर्थ मंदिर में पूजा ही नहीं, दुखी की सेवा है।

 

ना जात पूछी, ना धर्म पूछा। बस पूछा तो यही – किसको जरूरत है ? क्षेत्र के लिए यह एक बहुत बड़ी मिसाल है।

राम जानकी सेवा समिति कुसुमकसा की यह पहल सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और मानवता के प्रति समर्पण का संदेश देती है। भगवान श्रीराम और माता जानकी के आदर्शों से प्रेरित सेवा की भावना को आगे बढ़ाते हुए समिति ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि सच्ची धार्मिक आस्था वही है, जो जरूरतमंदों के दुख-दर्द को समझे और उनकी सहायता के लिए आगे आए।

फारुख शेख के उपचार में सहयोग की यह पहल केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को संदेश देती है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं और जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं।

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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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