दल्ली राजहरा शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 भोजराम साहू 9893 765541 पति की दीर्घायु और पारिवारिक रिश्तों में प्रगाढ़ता के लिए सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का निर्जला उपवास रखा।पूरे छत्तीसगढ़ में अर्नब चक्रवर्ती तूफान के कारण लगातार बारिश हो रही थी। कल करवा चौथ की रात चांद को भी बादलों ने ढक लिया था। फिर भी दल्लीराजहरा में सुहागिनों ने बड़े ही श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ करवा चौथ का महापर्व मनाया।निर्मला स्कूल के पास सामूहिक कार्यक्रमविश्व गुरु भारत में परिवार के बीच एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए कई त्यौहार मनाए जाते हैं। भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार रक्षाबंधन, भाई दूज, पति-पत्नी के बीच प्रेम का त्यौहार करवा चौथ, तीज और वटसावित्री, तो बच्चों के लिए कमरछट। नेहा माथुर और दिगंत माथुरक्या है करवा चौथ ? करवा चौथ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। ‘करवा चौथ’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘करवा’ यानी ‘मिट्टी का बरतन’ और ‘चौथ’ यानी ‘चतुर्थी’। इस त्यौहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है।इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सफलता के लिए निर्जला उपवास रखती हैं, अर्थात इस उपवास में महिलाएं पानी तक नहीं पीतीं। रात्रि में चंद्रमा का दर्शन होने पर महिलाएं छलनी में दीप रखकर अपने पति को देखती हैं। अपने पति, भगवान शंकर, माता पार्वती, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के साथ चंद्र देव की पूजा-अर्चना के बाद ही अपने पति के हाथों से पानी पीकर व्रत समाप्त करती हैं। क्या है मान्यता ? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का त्यौहार सती सावित्री के द्वारा अपने पति सत्यवान की मृत्यु हो जाने पर यमराज से उन्हें जीवित होने का वरदान मिलने की कथा पर आधारित है।घनश्याम साहू एवं विमला साहूकथा अनुसार पतिव्रता सती सावित्री के पति सत्यवान की मृत्यु हो गई। सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांगने की प्रार्थना की, उसने यमराज से कहा कि वह उसका सुहाग वापस लौटा दे। मगर यमराज ने इसे विधि का विधान कहते हुए उनकी बात नहीं मानी।नेहा माथुर एवं दिगंत माथुरइस पर सावित्री अन्न-जल त्याग कर अपने पति के मृत शरीर के पास बैठकर विलाप करने लगी। काफी दिनों तक सावित्री को देखकर यमराज को उस पर दया आ गई। यमराज ने उनसे अपने पति के जीवन के अलावा कोई भी अन्य वर मांगने को कहा, इस पर सावित्री ने कई बच्चों की मां बनने का वर मांग लिया।खुशबू साहू एवं पुनेश्वर साहूसावित्री पतिव्रता नारी थी और अपने पति के अलावा किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती थी। तो यमराज को भी उनके हठ के आगे झुकना पड़ा और सत्यवान को जीवित कर दिया। तभी से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं सती सावित्री का अनुसरण करते हुए निर्जला व्रत करती हैं। दूसरी कथा सात भाइयों की एक बहन करवा और भाइयों के आपसी प्रेम से संबंधित है। जिसमें करवा पतिव्रता स्त्री ने अपने पति की जान बचाने के लिए चौथ अर्थात चौथे दिन व्रत रखा और अपनी भक्ति से भगवान शिव और पार्वती को प्रसन्न कर अपने पति को जीवनदान दिया।तन्नु साहू एवं तेज साहूतो तीसरी कथा में भगवान शिव और पार्वती की कहानी भी करवा चौथ से जुड़ी हुई है। पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की और करवा चौथ का व्रत रखा, जिससे उन्हें शिव का वरण प्राप्त हुआ।इन कथाओं के माध्यम से करवा चौथ का त्यौहार पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन गया है। सभी विवाहित महिलाएं साल भर इस त्यौहार का इंतजार करती हैं और बड़े विधि-विधान, श्रद्धा-भाव से व्रत को पूरा करती हैं। करवा चौथ का त्यौहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। कहा जाता है कि करवा चौथ की कथा सुनने से विवाहित महिलाओं का सुहाग बना रहता है, उनके घर में सुख-शांति, समृद्धि और संतान सुख मिलता है।लेकिन सच्चाई तो यह है – परिवार में पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और घर में सुख-शांति तभी बनी रहती है, जब एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करें और मान-सम्मान करें। एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहें। दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों में परस्पर सामंजस्य बनी रहेगी तो सिक्का लोगों को खड़ा नजर आएगा।इतिहास क्या कहता है ? – एक जरूरी जानकारी अक्सर धार्मिक साहित्यों और पूजा की किताबों में करवा चौथ का संबंध महाभारत काल में द्रौपदी और भगवान कृष्ण के प्रसंग से जोड़ा जाता है। लेकिन खोजी और टेक्स्टुअल पड़ताल में महाभारत के मूल पाठ में इसका कोई श्लोक या प्रामाणिक संदर्भ नहीं मिलता। भांडारकर प्राच्य शोध संस्थान (BORI, Pune) के क्रिटिकल एडिशन में भी इस कथा की पुष्टि नहीं होती। वीणा साहू एवं पीताम्बर साहूवास्तव में, इस व्रत का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक लिखित दस्तावेज ‘नारद पुराण’ का 113वां अध्याय है, जहाँ इसे ‘करक व्रत’ कहा गया है। इसके अलावा 17वीं शताब्दी के प्रामाणिक ग्रंथ ‘निर्णयसिंधु’ में इसके नियमों का उल्लेख है। ऐतिहासिक और सामाजिक शोध बताते हैं कि यह मूल रूप से उत्तर-पश्चिम भारत की एक समृद्ध लोक-परंपरा (Folk Tradition) थी, जिसे समय के साथ शास्त्रों ने मान्यता दी और आधुनिक समाज ने इसे एक बड़े उत्सव का रूप दे दिया।करवा चौथ मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मनाया जाता है, परंतु अब यह त्यौहार पूरे भारत देश में सुहागिनों के द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। क्या यह छत्तीसगढ़ का त्यौहार नहीं है ? कई लोगों ने यहां तक कहा कि यह त्यौहार हमारे छत्तीसगढ़ का त्यौहार नहीं है, पति-पत्नी के आपसी प्रेम का त्यौहार तीज महोत्सव ही है।लेकिन उलाहना देने वाले क्या यह सोचते हैं, जिस तरह पति-पत्नी के बीच प्रेम को दर्शाने के लिए किसी त्यौहार की आवश्यकता नहीं होती, यह तो आपसी सामंजस्य और अपनापन का पर्व है। यदि करवा चौथ के पर्व पर लोगों को आपत्ति होती है, तो क्या वह जन्मदिन जैसे विभिन्न पर्व पर केक काटने पर भी आपत्ति लगाएंगे ? क्योंकि केक काटना भारतीय संस्कृति नहीं है। भारतीय संस्कृति यही है, जन्मदिन उत्सव पर आरती उतारकर टीका लगाया जाता है, ना कि मोमबत्ती और दीप बुझाया जाता है। Spread the lovePost navigation“विजया सम्मेलन में छलका अपनापन. ..! “भिलाई से बेहतरीन लगा राजहरा का प्यार” – आनंद कुमार सिंह दल्लीराजहरा में कल साहू समाज की तहसील स्तरीय कार्यशाला एवं वार्षिक आमसभा ।