दल्ली राजहरासोमवार 15 जून 2026भोजराम साहू 9893 765541 “यह सम्मान केवल मेरा नहीं बल्कि दल्ली राजहरा छत्तीसगढ़ भारत की समृद्ध लोक संस्कृति का सम्मान है !”:– विजय बोरकर पड़ोसी देश श्रीलंका के कैंडी शहर में अंतरराष्ट्रीय नृत्य ओलंपियाड प्रतियोगिता का आयोजन 9 जून से 13 जून 2026 तक किया गया था।जिसमें डी- मैक के संस्थापक एवं संचालक विजय बोरकर को छत्तीसगढ़ एवं भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था।सफल श्रीलंका दौरे से वापस आने पर डी मैक परिवार दल्ली राजहरा के उनके विद्यार्थियों के द्वारा एक सम्मान समारोह का आयोजन कर अपने गुरु विजय बोरकर का बेहतरीन ढंग से सम्मान किया गया । डी मैक परिवार के महिलाओं ने उनके स्वागत के लिए रंगोली बनाई । जैसे ही विजय बोरकर संस्था में पहुंचे फूलों की वर्षा कर उनका अभिनंदन किया गया। संस्था में उनका गुलदस्ता साल एवं श्रीफल से स्वागत किया । उनके मार्गदर्शक कलाकार प्रेम साहू के आकस्मिक निधन पर उन्हें मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।साथ उन्होंने श्रीलंका दौरे के यात्रा स्मृति भी लोगों को बताई उन्हें बताया कि कैंडी जैसे शहर में सबसे बेहतरीन और खास बात वहां की लोगों की लगी कि कोई नहीं चाहता कि मेरे कारण किसी को डिस्टर्ब हो सभी एक दूसरे को सम्मान देते हैं । 3 दिन वे शहर में रहे जहां वाहन चालक भी इतने नियम के बंधे हुए हैं तथा दूसरे को सम्मान देते हैं कि भले रोड खाली हो लेकिन ट्रैफिक नियम और सिग्नल का पालन करते हैं उन्हें बजाने की भी जरूरत भी नहीं पड़ती ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/06/VID-20260616-WA0045.mp4विजय बोरकर ने बताया कि बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत उन्हें लोकनृत्य (मुक्त वर्ग) में स्वर्ण पदक, श्रेष्ठ नृत्य कला शिरोमणि सम्मान, निर्णायक सम्मान, सम्मान पट्टिका एवं महोत्सव कलाकार प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ है।इस अवसर पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय निर्णायक मंडल में शामिल होकर 300 से अधिक प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने तथा विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान करने का अवसर मिला। निर्णायक मंडल में श्रीलंका की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं विदुषी डॉ. सदारा सुपथुम पीरिस (पीएच.डी., एम.ए., बी.ए., कथक – इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, भारत), वरिष्ठ प्राध्यापिका एवं अतिथि व्याख्याता, तमन्ना मैडम, श्री हरि निकेतन, आशीष सर तथा छत्तीसगढ़ से विजय बोरकर सम्मिलित थे।उनकी छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, आदिवासी संस्कृति, आंगा देवता नृत्य, डांग एवं पारंपरिक वेशभूषा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष सराहना मिली।विजय बोरकर ने यात्रा स्मरण में बताया कि श्री हरि निकेतन, आशीष सर, मीडिया प्रतिनिधियों, परिवारजनों तथा अपने स्वर्गीय छोटे भाई प्रेम साहू जी को, जिनके सहयोग, मार्गदर्शन और प्रेरणा से यह सफलता संभव हुई।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/06/VID-20260616-WA0051.mp4विजय बोरकर ने कहा कि सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि दल्लीराजहरा, छत्तीसगढ़ और भारत की समृद्ध लोकसंस्कृति का सम्मान है।Spread the lovePost navigation11 साल में 8000 यूनिट रक्तदान: DB ग्रुप को मिला ‘रेड ड्रॉप’ सम्मान, युवाओं को मिलेगी प्रेरणा..! जनपद सदस्य मंजू संजय बैस के हाथों हुआ अरमुरकसा में नन्हे बच्चों का प्रवेशोत्सव ।