दल्ली राजहरारविवार 24 मई 2026भोजराम साहू 9893 765541 उप स्वास्थ्य केंद्र पव्वारा में दिखी इंसानियत की मिसाल, सरकारी अस्पतालों को लेकर आम धारणा को बदल देने वाला नजारा शनिवार को उप स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर पव्वारा में देखने को मिला। जिला पंचायत दुर्ग की सहकारिता एवं उद्योग सभापति श्रद्धा पुरेन्द्र साहू जब अचानक ग्राम पंचायत पव्वारा पहुंचीं तो केंद्र के अंदर का माहौल देख उनका मन सुकून से भर गया।सास-ससुर नहीं, गांव बना सहाराग्राम कोकड़ी निवासी परमेश्वरी मेश्राम ने इसी उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वस्थ नवजात को जन्म दिया। परमेश्वरी अपने पति के साथ गांव में रहती हैं और सास-ससुर का पहले ही निधन हो चुका है। ऐसे में गांव की मितानिन बहन और दो-तीन अनुभवी बुजुर्ग दाईयां ही उनका सहारा बनीं और उन्हें समय पर केंद्र लेकर आईं। श्रद्धा साहू ने सरपंच मीना यादव और स्व-सहायता समूह की बहनों के साथ जच्चा-बच्चा का हाल जाना। नवजात के आगमन की खुशी में उन्होंने दाईयों को मिठाई के लिए राशि भेंट कर उनके चरण स्पर्श किए। दाईयों ने भी खुश होकर खूब आशीर्वाद दिया। श्रद्धा साहू ने कहा, “बात मिठाई और पैसे की नहीं, खुशी बांटने की होती है।”साफ-सफाई और व्यवहार ने जीता दिलकेंद्र की साफ-सफाई और स्टाफ का व्यवहार देखकर श्रद्धा साहू अभिभूत हो गईं। CHO मीनाक्षी मैडम और RHO पी. निषाद मैडम का मरीजों के प्रति सेवाभाव और गांव वालों से अपनापन देखकर उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों को लेकर जो निगेटिविटी है, वह यहां आकर दूर हो गई। निःशुल्क सेवा, प्राइवेट से बेहतर जहां एक ओर प्राइवेट अस्पतालों में डिलीवरी का खर्च हजारों में पहुंच जाता है, वहीं इस उप स्वास्थ्य केंद्र में मां और बच्चे दोनों की देखभाल पूरी तरह निःशुल्क की गई। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। श्रद्धा साहू ने इसके लिए गांव वालों के साथ-साथ जिला चिकित्सालय दुर्ग की डॉक्टरों की टीम को भी धन्यवाद दिया।हर गांव में हो ऐसा माहौल श्रद्धा साहू ने अपील की, “जब भी समय मिले, अपने गांव के शासकीय संस्थानों का भ्रमण जरूर करें। काश हर प्रोफेशन इतना सरल, सहज और निष्ठावान हो जाए तो एक-एक गांव से व्यवस्था सुधरते हुए पूरे देश में बदलाव आ सकता है। यह कठिन नहीं है, पर सबके सहयोग से ही संभव होगा।”श्रद्धा बर्तन संग्रहक एवं पर्यावरण संरक्षक सहकारी समिति मर्यादित उमरपोटी की अध्यक्ष श्रद्धा साहू का यह दौरा साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो सरकारी व्यवस्थाएं भी मिसाल बन सकती हैं।Spread the lovePost navigationसंडे मेगा स्टोरी में आज 24 मई 2026 को पढ़िए पचरा गीत का स्वर साधक पवनतरा के युकेश देवांगन की साधना, गुमनामी के अंधेरे में छत्तीसगढ़ी संस्कृति का एक दीपक की कहानी । बड़ी खबर: बालोद में तांदुला नदी को मिली आज़ादी, तड़के 5:30 बजे गरजीं JCB, 7.5 एकड़ से हटा कब्जा ।