दल्ली राजहरारविवार 24 मई 2026भोजराम साहू 9893 765541संडे मेगा स्टोरी में आज 24 मई 2026 युकेश देवांगन की कहानी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की रग-रग में बसे भक्ति संगीत ‘पचरा गीत’ की मधुर तान जब युकेश देवांगन के कंठ से फूटती है तो सुनने वाला मानो किसी और ही लोक में पहुंच जाता है। तहसील खैरागढ़ के ग्राम पवनतरा-जालबांधा निवासी युकेश आज आदिशक्ति मां दुर्गा, पवनपुत्र हनुमान, देवाधिदेव महादेव और कर्मयोगी वासुदेव श्रीकृष्ण को समर्पित पचरा गीतों के सच्चे वाहक बन चुके हैं। पर विडंबना देखिए, संस्कृति का यह दीप अब तक गुमनामी के अंधेरे में टिमटिमा रहा है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0146.mp4पहले जानिए, पचरा गीत होता क्या है? पचरा छत्तीसगढ़ की माटी का वह पारंपरिक भक्ति गीत है जिसमें झांझ-मंजीरा और ढोल की थाप पर देवी-देवताओं की महिमा गाई जाती है। ‘पचरा’ शब्द संस्कृत के ‘पंचरात्र’ से निकला है, जिसे स्थानीय बोली में ‘पचरणा’ कहा जाता है। चैत्र और शरद नवरात्रि में देवी पंडालों, मंदिरों और घरों में गूंजने वाला यह गीत मुख्य रूप से मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान करता है, पर इसमें हनुमान, महादेव और श्रीकृष्ण की स्तुतियां भी समाहित हैं। इसकी लय, सुर और ताल ऐसी कि सुनने वाले का मन भक्ति रस में डूब जाए।पिता की डायरी से शुरू हुआ सफर युकेश देवांगन बताते हैं कि पचरा गीत का पहला सुर उन्हें पूज्य पिताजी स्वर्गीय रामचरण देवांगन के आशीर्वाद से मिला। उनके पिता की अपनी रामायण मंडली थी। नवरात्रि के दोनों पर्वों पर पवनतरा और आसपास के गांवों में जब वे पचरा गाते तो श्रोता शालीनता से मंत्रमुग्ध होकर सुनते थे। संजय कहते हैं, “पिताजी के साथ एक-दो बार मैंने भी गाया था। आज वे इस दुनिया में नहीं हैं, पर उनकी लिखी गीतों की डायरी मेरी सबसे बड़ी धरोहर है। उसी को देख-देखकर मैं आज भी गाता हूं।”https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0046.mp4पोस्ट ऑफिस में नौकरी, नवरात्रि में भक्ति की ड्यूटी वर्तमान में युकेश देवांगन जालबांधा पोस्ट ऑफिस में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी के कारण वे नियमित रामायण मंडली में नहीं जा पाते, पर नवरात्रि के पूरे नौ दिन वे ‘जय मारुति नंदन मानस मंडली’ के साथ छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में पचरा गीत प्रस्तुत करने जरूर निकलते हैं। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत कई शहरों में उनकी टीम के तबला वादक अरुण मानिकपुरी, ढोलक वादक राहुल साहू और प्रमुख कलाकार लिकेस सेन श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो देते हैं।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0047.mp4युकेश बताते हैं कि जस गीत की तरह पचरा भी दो प्रकार का होता है— ‘इक्कादिया पचरा’ और ‘विस्तार वाला पचरा’। वे सभी प्रकार के जस गीत गा लेते हैं, लेकिन श्रोता सबसे ज्यादा मांग पचरा की ही करते हैं।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0049.mp4‘गाबो बजाबो और गोठियाबो’ में बजी थी उनकी तान रायपुर दूरदर्शन के लोकप्रिय स्तंभ ‘गाबो बजाबो और गोठियाबो’ में राकेश तिवारी के संचालन में युकेश देवांगन को भी बुलाया गया था। वहां उन्होंने छत्तीसगढ़ की परंपरा और पचरा गीत की बारीकियों को लोगों तक पहुंचाया। पर यह मंच भी उनकी कला को वह विस्तार नहीं दे पाया जिसके वे हकदार हैं।कीमत नहीं, आशीर्वाद ही मेहनताना https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0141.mp4कार्यक्रम की फीस पर युकेश देवांगन बेहद संजीदगी से कहते हैं, “हमारी कोई तय कीमत नहीं होती। आने-जाने का खर्च और साथी कलाकारों की मजदूरी निकल जाए, बाकी जो आशीर्वाद स्वरूप मिल जाए वही हमारे लिए बड़ी दौलत है।” यह वाक्य उनकी निस्वार्थ साधना को बयान करता है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0145.mp4युवाओं को मोबाइल से निकालकर संस्कृति से जोड़ना है मकसद युकेश का दर्द साफ झलकता है जब वे कहते हैं, “पचरा गीत हमारे छत्तीसगढ़ की अस्मिता है। मेरे पिताजी गाते थे, मैं गा रहा हूं। मैं चाहता हूं कि आने वाली पीढ़ी भी इसे गाए। आज का युवा मोबाइल में बहक गया है। यह गीत अभी तक युवाओं तक पूरी तरह पहुंचा ही नहीं है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि हमारी असली संस्कृति यही है। मैं इसे बचाकर रखना चाहता हूं, ताकि आने वाली पीढ़ी को दे सकूं।”सम्मान का इंतजार, मंच की दरकार इतनी समर्पित साधना के बाद भी युकेश देवांगन को आज तक शासन-प्रशासन से कोई सम्मान नहीं मिला। न कोई पथ-प्रदर्शक मिला जो उनकी कला को विशाल मंच तक ले जाए। वे कहते हैं, “हमें एक ऐसे मंच की जरूरत है जहां से हमारी आवाज और छत्तीसगढ़ी संस्कृति आम जनता तक पहुंचे।” युकेश देवांगन के फेसबुक पर आज भी कई पचरा गीत सुने जा सकते हैं। उन्हें सुनकर लगता है कि अगर ऐसे कलाकारों को समय रहते संबल न मिला तो हमारी संस्कृति का एक और दीपक गुमनामी के अंधेरे में खो जाएगा।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0147.mp4यदि आप युकेश देवांगन के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं या हमारे छत्तीसगढ़ी पचरा गीत के कलाकार को कार्यक्रम में आमंत्रित करना चाहते हैं तो उनके मोबाइल नंबर 8839102094 पर संपर्क कर सकते हैं । एक अपील https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260523-WA0140.mp4“संडे मेगा स्टोरी” में आज बस इतना ही। अगर आपके आसपास भी कोई ऐसा गुमनाम कलाकार है जिसकी कला को दुनिया तक पहुंचाना जरूरी है, तो हमसे संपर्क करें। ‘हमारा दल्ली राजहरा निष्पक्ष समाचार चैनल’ आपकी कला को आम जनता तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। क्योंकि संस्कृति तभी बचेगी जब उसके वाहकों को सम्मान मिलेगा।भोजराम साहू संपादक (हमारा दल्ली राजहरा- एक निष्पक्ष समाचार चैनल)9893765541 Spread the lovePost navigationआईटीआई के छात्रों ने बढ़ाया मानवता का हाथ, घुमंतू पशु-पक्षियों के लिए बनाई जीवनदायिनी जलकुंडी । उप स्वास्थ्य केंद्र पव्वारा में दिखी इंसानियत की मिसाल, निःशुल्क डिलीवरी और अपनापन देख गदगद हुईं जिला पंचायत सभापति श्रद्धा साहू