दल्ली राजहरा सोमवार 10 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541
                  सावन महोत्सव 2026

 

सर्व समाज समरसता समिति दल्ली राजहरा के महिला इकाई के अध्यक्ष राजेश्वरी साहू के नेतृत्व में सावन महोत्सव एवं हरेली मिलन समारोह का आयोजन महाप्रभु जय जगन्नाथ मंदिर प्रांगण में रविवार 9 अगस्त को दोपहर 2:00 बजे किया गया था । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेखा गहरवार अध्यक्ष राजहरा महिला समाज एवं विशेष तौर पर अनीता सिंह (मुख्य वक्ता नारी सुरक्षा प्रांत टोली ) को आमंत्रित किया गया था । कार्यक्रम की विशेष अतिथि पूरोबी वर्मा अध्यक्ष सर्व समाज समरसता समिति थी एवं अध्यक्षता राजेश्वरी साहू ने की कार्यक्रम में सर्व समाज समरसता समिति के संरक्षक वीणा साहू एवं द्रौपदी साहू भी उपस्थित थी ।

अतिथियों के द्वारा सर्वप्रथम भारत माता की आरती एवं पूजा अर्चना की गई । उसके बाद अतिथि स्वागत किया गया तथा आयोजकों के द्वारा विभिन्न समाज प्रमुख महिलाओं को आमंत्रित किया गया था । जिसमें साहू समाज से उमा साहू , निषाद समाज से कल्याणी निषाद , सिन्हा समाज से चित्रलेखा सिन्हा , उत्कल समिति से माधुरी रथ छत्तीसगढ़ महार समाज से जानकी कौशल , राजपूत समाज से अनुराधा सिंह , बंगाली समाज से पुरोबी वर्मा , सिंधी समाज से उर्मिला कुकरेजा , रहिदास समाज से सुनीता भांडेकर , तेलुगू समाज से सी. रमन्ना , गुजराती समाज से सुनीता पटेल एवं यादव समाज से सरस्वती यादव का तिलक लगाकर स्वागत किया गया ।

स्वागत भाषण राजेश्वरी साहू
ने दिया जिसमें उन्होंने सर्वप्रथम उपस्थित अतिथियों एवं समाज जनों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारा भारत देश को ऋतुओं एवं त्योहार का देश कहा जाता है । हर रितु अपने साथ नई ऊर्जा , उत्साह, उमंग और त्यौहार लेकर आती है उन्हीं में से एक है सावन का महीना । जैसे ही सावन का आगमन होता है सूखी धरती हरियाली से भर उठती है और उत्सव का सिलसिला शुरू हो जाता है । आज का शुभ अवसर पर हमारे लिए अत्यंत सुख और गौरव का विषय है । सर्व समाज समरसता समिति के द्वारा सभी समाजों को एक सूत्र में पिरोकर सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए सावन महोत्सव का आयोजन किया गया है ।

मुख्य वक्ता  अनीता सिंह  का उद्बोधन 

 

 ने कहा कि हम सब महिलाएं सिर्फ महिलाएं नहीं होती हैं । हम सब एक संस्कृति एक समाज एक धर्म एक व्यक्तित्व की विकास की स्तंभ होती है । किसी भी परिवार के लिए परिवार में आपके पति पिता भाई ससुर कमा कर लाते हैं । उसे आप भोजन में बदलते हैं उस खाने में जो आनंद मिलता है वह सिर्फ हमारे भारत देश की संस्कृति में ही मिलता है । हमारे परिवार के संस्कारों में दो पीढ़ी का अंतर आ चुका है । हमारी माताएं दादी नानी ने जो शिक्षा हमें और संस्कार हमें दी है वह हम अपने बच्चे और परिवार के बीच नहीं ला पा रहे हैं । जिसके कारण हमारे बच्चे विद्रोही बन रहे हैं । इसका सिर्फ एक ही कारण है हम अपने संस्कार समय अभाव के कारण या नजर अंदाज कर दिया है कि हम अपने अंदर कितने महत्वपूर्ण चीज अपने अंदर संजोए हुए हैं जिसे अपने बच्चों को नहीं दे पा रहे हैं । आप अपने बच्चों के लिए समय निकालिए ।

 

पहले संयुक्त परिवार होता था अब टूट चुका है माता-पिता हमारे लिए बोझ हो रहे हैं । हमने अपने बच्चों को समय नहीं दिया आखिर वे भी भी अपने माता-पिता को समय नहीं दे रहे हैं । बच्चे 5 साल के होते हैं बच्चे देखते हैं मां दादी से बात करूं उनसे पूछू और हम देखते हैं कि मुझे घर के काम करना है साफ सफाई करनी है खाना बनानी है कपड़ा धोना है ।

   आप इस बात का ध्यान दीजिए आपने क्या सीखा और क्या अपने बच्चों को बताना चाहती हैं । 90% हमारे बच्चों को यह नहीं पता कि उनके कुलदेवी और देवता कौन से हैं । आप कैलाश मानसरोवर या अमरनाथ चले जाइए कोई मतलब नहीं है जब तक आप अपने ग्राम के घर के कुलदेवी का पूजा अर्चना नहीं कर सकते । आप बच्चों के साथ समय निकालकर परिवार सहित बैठिए । बच्चों को परिवार को समय दीजिए बच्चों को समय दीजिए । आजकल बच्चे परिवार से कट रहे हैं बच्चों से हर विषय में बात करनी चाहिए ।अपने परिवार,धर्म अपनी संस्कृति भी उन्हें बताइए ।
आप किस कुल के हो किस धर्म के हो आपकी यह पहचान है जिससे बच्चे महसूस करेंगे । वह आपकी संस्कृति अपनी पीढ़ी अपने धर्म का वाहक हैं । खुद के धर्म में जिम्मेदारी महसूस करेंगी । आप लड़कों से मित्रता करनी है करिए लड़कियों से मित्रता करनी ही करिए लेकिन एक बात का ध्यान रखिए हम किस स्कूल के हैं किस गोत्र के हैं हमें किस धर्म किस संस्कृति के है इस बात को कभी मत भूलिए । 
आप अपने घरों के आसपास अपने संस्कृति अपने समाज में संबंध बनाकर रखिए । आप अपने समाज परिवार में विश्वास रखिए जिससे आपके बच्चे यदि गलत रास्ता में जाने भी चाहेंगे तो डरेंगे कि मेरी मां मेरे पिता का यहां तक पहचान है । लोग आपने बेटे और बेटियों के बारे में क्या बोलते हैं उन्हें भी ध्यान से सुनिए । आपके संबंध सोसाइटी में लोगों के बीच अच्छे रहेंगे तो लोग आपके खिलाफ अपने के बच्चों के खिलाफ बुराई करने में डरेंगे । आपके बच्चों को गलत रास्ते में भटकने से बचेंगे ।
मुख्य अतिथि रेखा गहरवार
ने कहा कि सर्व समाज समरसता समिति को समान उत्सव के आयोजन के में बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं ।आप सभी ने जिस तरह से सावन उत्सव के बहाने सभी समाजों को एकत्र करने का महान कार्य किया है वह बहुत ही सहारणीय है। हमारा महिला समाज दल्ली राजहरा में एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में विभिन्न संस्थाओं जरूरतमंदों को आर्थिक एवं सामानों की सहायता करते आ रहा है जैसे भी जरूरत पड़ा हमको लगा हमेशा हम जरूरतमंदों की सहायता में आगे आते हैं ।

 

पुरोबी वर्मा (अध्यक्ष सर्व समाज समरसता समिति )
ने कहा कि आज इस सावन उत्सव के समय पर हमने एक विशेष विचार आप लोगों से आमंत्रित की थी जिनमें कहा गया था कि आपने बचपन में मां दादी नानी से जो सीखा था उसे लिख कर दीजिए । आज उन विचारों में एक से एक सिख हमारे पास आए हैं उनमें से प्रमुख रूप से जो है उनमें पूर्णिमा मंडल ने लिखा है “मेरी सिख जीवन में कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता । मेरी मां ने मुझे शिष्टाचार परिवार को संभालना, अच्छे खाना बनाने सिखाया ।” रीता बख्शी ने लिखा कि ममता की छांव में मैंने सीखा बड़ों का आदर करना छोटों को प्यार करना । सीखा है मैंने अपने धर्म को मानना और दूसरे धर्म का सम्मान करना सीखा है मैंने अपनी संस्कृति को मानना और बनाए रखना ।

” मंजू साहू लिखती है मां कहती थी ।:- “शालीन रहना और सब का सम्मान करना ।” ममता पटेल ने लिखी है : मां से यही सीख मिली है परोपकारी बनिए । द्रौपदी साहू ने लिखी है नानी से मैं सीखी हूं पानी और वाणी में विराम रखना चाहिए , इसे व्यर्थ कभी नहीं करनी चाहिए । अनुराधा सिंह मुख्य अतिथि ने लिखा है किसी भी निजी बात को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए क्योंकि एक मुंह से दूसरे मुंह तक जाते उसका स्वरूप ही बदल जाता है ।”

 

सावन महोत्सव में सभी महिलाओं से शपथ दिलाई गई जहां कहा गया कि पूरे समय में बच्चों को एक ज्ञानवर्धक कहानी बताई जाएगी ।बिना वजह घर में किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं करेंगे । सप्ताह में कम से कम 1 दिन मोबाइल मुक्त परिवार रखेंगे । आने वाले भविष्य के बारे में परिवार के साथ मिलकर चर्चा करेंगे। एवं बुराई को छोड़कर अच्छाई को अपनाएंगे ।

सावन उत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया था जिसमें कार्यक्रम में व्यंजन प्रतियोगिता में प्रथम रीता बख्शी , द्वितीय पुष्पा शांडिल्य एवं तृतीय रेणुका साहू रही। सांत्वना पुरस्कार के ममता पटेल , राजेश्वरी साहू एवं माधुरी लता महानता को दिया गया ।मुस्कान बिखेरो प्रतियोगिता में पूर्णिमा मंडल प्रथम , एवं सुज्ञानी द्वितीय स्थान पर रही । वहीं मी ( me)और यू ( you) प्रतियोगिता में मुनमुन सिन्हा प्रथम एवं शिखा सोनी द्वितीय स्थान पर रही एवं सुषमा हरदा को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन पुरोबी वर्मा एवं राजेश्वरी साहू ने दिया उन्होंने कहा कि यह आयोजन अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण रखता है । हमने सभी समाज को एक करने के लिए बेहतरीन आयोजन किया था ।जिसमें भिलाई से आए हमारी वक्ता ने समाज धर्म और संस्कृति के बारे में हमें बताया। उन्होंने बताया कि हमें परिवार और अपने समाज एवं आसपास के बीच कैसे सामंजस्य रखना है । बच्चों को संस्कार कैसे देना है यह आयोजन बहुत ही सफल हुआ । अगले वर्ष भी इस तरह का आयोजन करेंगे सभी समाज जनों को इस कार्यक्रम में जाकर सफल बनाने के लिए मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं ।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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