दल्ली राजहरा रविवार 23 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541 सावन मास का अंतिम सोमवार नजदीक है और उससे ठीक एक दिन पहले रविवार 23 अगस्त 2026 को कुसुमकसा से दल्ली राजहरा तक आस्था, भक्ति और श्रद्धा का ऐसा सैलाब उमड़ा कि देखने वाले भी हर-हर महादेव के जयकारे लगाने लगे। ग्राम कुसुमकसा एवं आसपास के ग्रामीणों द्वारा विगत 36 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी विशाल कावड़ यात्रा निकाली गई।यह यात्रा कुसुमकसा से 9 किलोमीटर दूर दल्ली राजहरा के प्रसिद्ध झरन मैया कुंड के लिए निकाली जाती है, जहाँ से जल लेकर वापस कुसुमकसा स्थित भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है। इस प्रकार आने-जाने की कुल दूरी लगभग 18 किलोमीटर होती है।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/08/VID-20260823-WA0061.mp4सुबह 11 बजे से शुरू हुई यात्रा, चार सौ पचास से अधिक कावड़िये शामिल विशाल कावड़ यात्रा की शुरुआत रविवार सुबह 11 बजे ग्राम कुसुमकसा से हुई। कुसुमकसा के मंडल अध्यक्ष योगेंद्र सिन्हा ने बताया कि यह कावड़ यात्रा लगभग 36 वर्षों से अनवरत निकाली जा रही है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में स्वर्गीय बुटु सिंह जी बैस, नवल किशोर मिश्रा, सोहनमल डरसेना और डॉक्टर गोविंद मिश्रा के द्वारा की गई थी। उस समय यात्रा साधारण रूप से होती थी, लेकिन आज यह विशाल रूप ले चुकी है। वर्तमान में यह कावड़ यात्रा कुसुमकसा के दुर्गा मंदिर के पुजारी लखन गोस्वामी के नेतृत्व में निकाली जा रही है।इस यात्रा में लगभग 450 से भी अधिक महिला, पुरुष शामिल हुए, लेकिन सबसे खास बात यह रही कि इसमें छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल थे।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/08/VID-20260823-WA0060.mp4नंगे पांव 18 KM चले नन्हे कावड़िये – सबसे बड़ी श्रद्धा इस यात्रा का सबसे भावुक और सबसे बड़ा आकर्षण नन्हे बालक-बालिकाएं रहे। महिलाएं और पुरुष तो थे ही, साथ ही छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी बिना चप्पल के नंगे पांव पैदल चलकर आए।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/08/VID-20260823-WA0063.mp4आज के समय में घर से बाहर 100 मीटर भी बिना चप्पल के चलने में लोगों के पैर दुख जाते हैं, तपती सड़क पर पैर जलने लगते हैं। ऐसे में कुसुमकसा से दल्ली राजहरा आने और जाने की लगभग 18 किलोमीटर की दूरी इन नन्हे बालक और बालिकाओं द्वारा बिना चप्पल के नंगे पांव चलना बहुत ही बड़ी बात है। यह सिर्फ चलना नहीं है, यह उनकी अटूट श्रद्धा, भक्ति और देवाधिदेव महादेव के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है। यह तभी संभव है जब स्वयं महादेव की कृपा इन नन्हे भक्तों पर बरस रही हो। नन्हे पांव थके नहीं, हौसला डिगा नहीं, बल्कि हर-हर महादेव के जयकारों के साथ वे लगातार चलते रहे।दल्ली राजहरा पहुंचने पर भव्य स्वागत, गुप्ता चौक पर तांडव कावड़ यात्रा दोपहर लगभग 2 बजे के करीब दल्ली राजहरा पहुंची। बाजार पहुंचने से पहले संगीता ट्रेडर्स के द्वारा सभी कांवड़ियों को केला वितरण कर स्वागत किया गया।कावड़ यात्रियों के बीच कई झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। राजकुमार सिन्हा के द्वारा देवाधिदेव महादेव के रूप धारण किए हुए था, जिसके द्वारा शहर के मध्य गुप्ता चौक पर तांडव नृत्य किया गया। तांडव नृत्य को देखकर श्रद्धालु दर्शन कर मंत्रमुग्ध हो गए।वहीं एक अन्य कावड़ यात्री भी आकर्षण का केंद्र था, जिसने अपने कावड़ में 12 ज्योतिर्लिंग के साथ श्री बद्रीनाथ धाम, श्री रामेश्वरम मंदिर, श्री जगन्नाथ मंदिर और श्री द्वारकाधीश मंदिर को समाहित किया हुआ था।नन्हे बालक भी महादेव के रूप में सजे हुए नजर आए। छोटी उम्र में ही महादेव के प्रति उनका विश्वास देखकर हर कोई भावुक हो रहा था।झरन कुंड से जल लेकर वापस कुसुमकसा में किया अभिषेक सभी कावड़िये दल्ली राजहरा के झरन माता मंदिर परिसर स्थित प्राकृतिक झरन कुंड पहुंचे। वहां से पवित्र जल लेकर फिर वापस 9 किलोमीटर पैदल चलकर संध्या 6:00 बजे कुसुमकसा पहुंचे और ग्राम पंचायत के समीप स्थित भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक किया। जल अभिषेक उपरांत महा आरती संपन्न हुई तथा इस अवसर पर महा भंडारा का आयोजन किया गया था ।क्या है कुसुमकसा के भगवान शिव मंदिर का अलौकिक इतिहास..? इस मंदिर का इतिहास भी कम चमत्कारी नहीं है। मंदिर निर्माण के संबंध में पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस और अनिल सुथार ने बताया कि सन 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश से एक भागवताचार्य मणि प्रसाद मिश्रा कुसुमकसा आए थे। वे गांव-गांव घूम कर भगवान की कथा सुनाया करते थे और इसी दौरान उन्होंने दान-दक्षिणा के माध्यम से लगभग 3000 रुपये की राशि एकत्र की।उन्होंने ग्रामीणों के समक्ष भगवान शिव का विशाल मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे ग्रामीणों ने सहर्ष स्वीकार किया। अपनी ओर से जैसा भी बन पड़ा, उन्होंने सहयोग किया और मंदिर का निर्माण प्रारंभ हुआ।https://hamaradallirajhara.in/wp-content/uploads/2026/08/VID-20260823-WA0061.mp4इसी बीच भागवताचार्य ने एक ऐसी बात कही जो सबके मन में रह गई। उन्होंने कहा था कि जिस दिन महादेव के मंदिर का निर्माण पूर्ण होगा और मंदिर में भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी, वह दिन मैं नहीं देख पाऊंगा। उससे पहले ही मैं इस संसार से विदा हो जाऊंगा। ग्रामीणों ने अनमने मन से भी मंदिर का निर्माण निरंतर जारी रखा और अंततः मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ। पंडितों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा की तारीख तय की गई और पंडित मणि प्रसाद जी द्वारा कही गई बात उस दिन सत्य हो गई, जब मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से ठीक पूर्व मंदिर में बैठे ही बैठे उनकी प्राण पखेरू उड़ गए। ग्रामीणों ने पहले पंडित जी का अंतिम संस्कार करने के पश्चात ही भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा की। संजय बैस ने बताया कि उनकी मौत अप्रत्याशित थी लेकिन हमारे लिए यह घटना अलौकिक रह गई।36 सालों से अनवरत जारी है परंपरा ग्रामीण बड़े हर्षोउल्लास के साथ इस कावड़ यात्रा को आज भी जारी रखे हुए हैं। पहले कावड़ यात्रा साधारणतः होती थी, लेकिन वर्तमान समय के हिसाब से डीजे और संगीत के साथ विशाल कावड़ यात्रा निकाली जाती है। जिसके लिए पिछले 4 साल से श्री राम जानकी सेवा समिति कुसुमकसा पूरा सहयोग कर रही है। इस यात्रा में आज संजय बैस, नितिन जैन, संतोष जैन मोतीलाल कोचरिया राजू सिन्हा, योगेंद्र सिन्हा अनिल सुथार देवेंद्र सिंहा पूनम चंदसिन्हा नीलकंठ साहू पुष्कर साहू खोर बाहरा धनकर शैलेश कोठारी कमलेश कोठारी विजय लक्ष्मीबाई गांगुली मैडम नंदकुमार पिस्दा का विशेष सहयोग रहा ।Spread the lovePost navigationगौ सेवा के लिए दल्लीराजहरा के अमर लालवानी को राज्य अधिवेशन उदय 2026 में सम्मान । डौण्डी: महिला समूहों को दोना-पत्तल मशीन के नाम पर 3.89 लाख की ठगी, आरोपी खेमेन्द्र सेन गिरफ्तार ।