दल्ली राजहरा शुक्रवार 28 अगस्त 2026 भोजराम साहू 9893 765541

 

 लौह नगरी दल्ली राजहरा में भाई-बहन के अटूट प्रेम का महापर्व रक्षाबंधन बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। घर-घर में भाई-बहन के प्यार की मिठास घुली तो बाजारों में पिछले दो-तीन दिनों से रौनक बनी हुई थी।

घरों में भाई-बहनों के बीच अक्सर होने वाली नोक-झोंक के बीच यह पर्व गहरे प्रेम को दर्शाता है। यह पर्व बचपन के प्रेम का प्रतीक है। जब बहन ससुराल चली जाती है तो रक्षाबंधन अपने पीहर, मायके, मम्मी-पापा और भैया-भाभी से मिलने का एक सुंदर बहाना बन जाता है। हर बहन को अपने भाई से यही उम्मीद रहती है कि भाई जीवन भर उसकी रक्षा करेगा।

पिछले दो-तीन दिनों से बाजारों में भारी चहल-पहल देखने को मिली। बहनें राखी और मिठाइयाँ खरीदने दुकानों में पहुंचीं तो भाई भी अपनी बहनों के लिए उपहार खरीदते नजर आए।

आरपीएफ जवानों की कलाई भी सजी

 

इस रक्षाबंधन पर एक बेहद भावुक और अनुकरणीय पहल देखने को मिली। जन्मभूमि से हजारों किलोमीटर दूर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे आरपीएफ के जवानों को पार्षद एवं लोक गायिका टी. ज्योति, पुसईं बाई साहू और अनीता सोनवानी के नेतृत्व में नगर पालिका दल्ली राजहरा की पार्षद बहनों ने आरपीएफ बैरक पहुंचकर राखी बांधी। जवानों की कलाई पर राखी बांधकर बहनों ने उनकी बहन की कमी को पूरा किया।

वहीं नगर के आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में भी रक्षाबंधन का पर्व बड़े उत्साह से मनाया गया। छोटे-छोटे बच्चों ने एक-दूसरे को राखी बांधकर प्रेम और एकता का संदेश दिया।

क्या है रक्षाबंधन की पौराणिक कहानी?

 

कहा जाता है कि राजा बलि ने जब राजसूय यज्ञ किया तो भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर उनके पास गए और तीन पग जमीन की मांग की। गुरुदेव शुक्राचार्य के मना करने के बावजूद राजा बलि ने अपने वचन अनुसार उन्हें तीन पग जमीन देने का वचन दे दिया। भगवान विष्णु ने वामन अवतार में पहला पग जमीन पर और दूसरा पग आकाश पर रख दिया तथा तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर उनके सामने रख दिया। तब भगवान विष्णु (वामन) ने प्रसन्न होकर उन्हें पाताल का राजा बना दिया, लेकिन राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपना द्वारपाल बनने के लिए मजबूर कर दिया।

कुछ समय बाद मां लक्ष्मी भगवान विष्णु को न पाकर पाताल में राजा बलि के पास गईं। तब उन्होंने रक्षा सूत्र राजा बलि के हाथों में बांधकर उन्हें भाई बना लिया तथा रक्षाबंधन के उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांग कर वापस स्वर्ग ले गईं। उनके द्वारा कहा गया मंत्र आज भी रक्षा सूत्र का मंत्र कहा जाता है –

 

येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल।।

 

जिसका हिंदी में अर्थ है – जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा। हे रक्षा सूत्र! तुम अडिग रहो।
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Bhojram Sahu

By Bhojram Sahu

प्रधान संपादक "हमारा दल्ली राजहरा: एक निष्पक्ष समाचार चैनल"

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